बिना तैयारी कोर्ट पहुंचे अफसर पर भड़के जज, बोले पेंशन केस में ऐसी घोर लापरवाही

Mukesh Sharma | Jul 21, 2026, 21:49 IST
अधिकारी पर नाराज हुए जज
राजस्थान हाईकोर्ट ने विधवा की पेंशन याचिका में बिना तैयारी पहुंचे विभागीय ओआईसी (OIC) को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने सरकारी अधिकारियों के रवैये को घोर लापरवाही बताया और मुख्य सचिव को पत्र भेजकर अदालती कार्यवाही के प्रति जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए।

समझें क्या है पूरा मामला

  • बिना तैयारी कोर्ट पहुंचे अफसर पर भड़के जज,बोले पेंशन केस में ऐसी घोर लापरवाही!
  • ओआईसी के पास न जवाब की कॉपी थी, न नियम-कायदों का पता
  • जज ने पूछा नीति पढ़ी है? अफसर बोला- आज तक कभी नहीं देखी
  • विधवा की पारिवारिक पेंशन याचिका पर हाईकोर्ट हुआ बेहद सख्त
  • मुख्य सचिव को भेजी आदेश की कॉपी, अफसरों को सुधरने की हिदायत

राजस्थान हाई कोर्ट ने एक विधवा की पारिवारिक पेंशन के मामले में न्यायिक कार्यवाही के प्रति राज्य के अधिकारियों के उदासीन और ढीले रवैये पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है।



जस्टिस गणेशराम मीणा ने गंगा देवी की याचिका सुनवाई करते हुए पेंशन एवं पेंशन कल्याण विभाग के प्रभारी अधिकारी (OIC) के बिना किसी तैयारी के अदालत में पेश होने पर गंभीर सवाल खड़े किए।



दरअसल वकीलों ने शनिवार को न्यायिक कार्यों का बहिष्कार कर रखा है। इस कारण सरकारी वकील की अनुपस्थिति में पेंशन एवं पेंशन कल्याण निदेशालय के सहायक लेखाधिकारी प्रथम हमीर सिंह OIC के रूप में अदालत में हाजिर हुए थे।



जब अदालत ने उनसे सवाल पूछे तो अधिकारी ने स्वीकार किया कि उनके पास विभाग की ओर से पेश जवाब की कॉनी नहीं है। इसके अलावा, याचिकाकर्ता के दावों से संबंधित प्रासंगिक अधिसूचनाओं या आदेशों की प्रतियां भी उनके पास नहीं थीं।



इस पर अदालत ने अधिकारी से उनके कर्तव्यों और दायित्वों के बारे में पूछा और यह जानना चाहा कि क्या उन्होंने OIC के कार्यों के लिए तय मुकदमेबाजी नीति (Litigation Policy) का अध्ययन किया है। इस पर अधिकारी ने स्वीकार किया कि उन्होंने इसे कभी नहीं पढ़ा है।



घोर लापरवाही है यह

इस पर नाराज अदालत ने कहा कि सभी तथ्य अदालत के समक्ष उपस्थित हुए विभागीय अधिकारी की घोर लापरवाही को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। वह भी एक ऐसे मामले में जहां एक विधवा ने अपनी पारिवारिक पेंशन के दावों के लिए याचिका दायर की है।



हमेशा ध्यान रखें कि

जस्टिस गणेश राम मीणा ने कहा कि विभागाध्यक्षों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि OIC बनाए गए अधिकारी अदालती कार्यवाही को लेकर गंभीर रहें। अधिकारियों को बिना किसी देरी के समय पर जवाब दाखिल करना चाहिए। अदालत में पेश होते समय मामले के तथ्यों व संबंधित आदेशों की पूरी जानकारी रखनी चाहिए।



अदालत ने आदेश की कॉपी मुख्य सचिव,प्रमुख शासन सचिव और निदेशक,पेंशन व पेंशन कल्याण विभाग को भेजकर इस प्रकार की लापरवाही रोकने को कहा है। मामले में अगली सुनवाई 4 अगस्त,2026 को होगी।



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