आयुषी केस में नया मोड़, पिता की मौत भी शक के घेरे में, कोर्ट ने खारिज की जमानत
समझें क्या है पूरा मामला
- मां की हत्या आरोपी आयुषी पर अब पिता की हत्या का भी आरोप।
- मामा राकेश शर्मा का दावा, दोनों हत्याओं के पीछे एक ही साजिश।
- पिता को अस्पताल ले जाने के बहाने से शुरू हुई पूरी कहानी।
- तीन महीने तक परिवार को नहीं पता था पिता कहां हैं।
- अभी तक संपत्ति और नफरत की वजह पुलिस जांच में आई सामने।
जयपुर में मां नीरज शर्मा हत्याकांड में नया मोड़ आया है। आरोपी आयुषी के मामा राकेश शर्मा ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि अप्रैल 2025 में आयुषी ने पिता विजय शर्मा की भी हत्या की थी।
यह काम कथित तौर पर चचेरे भाई बलराम के साथ मिलकर किया गया। पुलिस का कहना है कि परिवार की शिकायत के आधार पर इन आरोपों की जांच होगी।
मामा ने लगाए नए आरोप
जयपुर की एलएलबी अंतिम वर्ष की छात्रा आयुषी पहले से मां की हत्या के मामले में गिरफ्तार है। अब उसके मामा राकेश शर्मा ने एक नया आरोप लगाया है। उनका दावा है कि पिता विजय शर्मा की मौत भी हत्या थी। यह घटना कथित तौर पर अप्रैल 2025 में हुई थी।
राकेश शर्मा के अनुसार विजय शर्मा लंबे समय से बीमार थे। उनका आरोप है कि आयुषी उनका सही इलाज नहीं होने दे रही थी। उस दौरान चचेरा भाई बलराम भी घर पर ही रह रहा था। परिवार का कहना है कि इलाज के बाद विजय शर्मा की तबीयत सुधर गई थी।
अस्पताल ले जाने का बहाना
मामा का आरोप है कि आयुषी ने परिवार से एक बात कही। उसने कहा कि एक डॉक्टर से मिलकर आई है और पिता को दूसरे अस्पताल ले जाना जरूरी है। इसके बाद आयुषी और बलराम विजय शर्मा को अपने साथ ले गए।
आरोप है कि करीब तीन महीने तक परिवार को उनका ठिकाना नहीं बताया गया। बाद में परिवार को बताया गया कि विजय शर्मा दिल्ली रोड स्थित निम्स अस्पताल में भर्ती हैं। मामा का कहना है कि नीरज शर्मा अपने बीमार पति को देख भी नहीं पाईं।
फिर एक दिन संदेश आया कि विजय शर्मा निविक अस्पताल के आईसीयू (ICU – Intensive Care Unit) में भर्ती हैं। परिवार जब वहां पहुंचा तो डॉक्टरों ने बताया कि उनके करीब 90 प्रतिशत अंग प्रभावित हो चुके हैं।
पिता की मौत के बाद क्या हुआ?
इसके बाद आयुषी उन्हें घर ले आई, जहां उनकी मौत हो गई। परिवार का आरोप है कि मौत के बाद आयुषी और बलराम शव को गांव ले गए। वहीं उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
मामा का दावा है कि इसके तुरंत बाद आयुषी ने पिता की जगह अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन की बात कही। राकेश शर्मा के अनुसार आयुषी ने परिवार की संपत्ति अपने नाम करने की भी बात कही थी।
उनका आरोप है कि इन सभी फैसलों में बलराम उसे सलाह देता था। विजय शर्मा राजस्थान हाईकोर्ट में कोर्ट मास्टर के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने ही आयुषी और बलराम को एलएलबी की पढ़ाई करवाई थी।
पूछताछ में आयुषी के बयान
पुलिस पूछताछ में आयुषी ने अपने बचपन को लेकर कई बातें बताई हैं। उसने कहा कि मां का पूरा ध्यान उसके स्पेशल चाइल्ड भाई पर रहता था। उसने खुद को परिवार में अकेला महसूस करने की बात कही। साथ ही बताया कि दादी, ताऊ और चचेरा भाई बलराम उसके अधिक करीब थे।
आयुषी ने यह भी बताया कि मां से अक्सर विवाद होता था। बाद में वह बलराम के कहने पर पिता के दूसरे घर में रहने चली गई थी। पुलिस के अनुसार पूछताछ में उसने मां की हत्या की योजना को लेकर बलराम से बातचीत होने की बात भी स्वीकारी है।
गिरफ्तार हेमंत शर्मा ने पुलिस को बताया कि वह हत्या नहीं करना चाहता था, लेकिन उस पर दबाव बनाया गया।
मनोवैज्ञानिकों की मदद से पूछताछ
जयपुर डीसीपी (DCP) रंजीता शर्मा ने इस मामले पर जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि फरार बलराम की तलाश जारी है। परिजनों की शिकायत के आधार पर सभी आरोपों की जांच की जाएगी।
पुलिस के अनुसार अब तक की जांच में संपत्ति और मां के प्रति नफरत की बात सामने आई है। डीसीपी ने बताया कि आयुषी मानसिक रूप से मजबूत और कानूनी जानकारी रखने वाली है। इसलिए उससे मनोवैज्ञानिकों की मदद से पूछताछ की जाएगी। पुलिस का कहना है कि वह अपने बचपन को खराब बताती है, लेकिन विस्तार से पूछे जाने पर चुप हो जाती है।
सड़क हादसे में मौत की आड़ में की थी मां की हत्या
शुरुआत में परिवार ने इसे हिट एंड रन हादसा बताया था और उसी आधार पर पुलिस में रिपोर्ट भी दर्ज हुई। लेकिन घटनास्थल के तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी (Closed Circuit Television) फुटेज की टाइमिंग और मृतका के शरीर पर चोटों के पैटर्न ने पुलिस को शक हुआ।
डीसीपी (Deputy Commissioner of Police) ईस्ट रंजीता शर्मा के निर्देश पर स्पेशल टीम ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और पारिवारिक पृष्ठभूमि की गहन जांच शुरू की, तब एक-एक कर पर्दे उठते गए।
पुलिस के अनुसार मृतका एक सरकारी विभाग में कार्यरत थीं। बेटी भूमिका चाहती थी कि मां की मौत के बाद उसे अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) मिले और वह खुद सरकारी अधिकारी बन जाए।
साथ ही घर की कीमती संपत्ति और बैंक बैलेंस पर भी उसका पूरा कब्जा हो जाए। इसी अंधी महत्वाकांक्षा में उसनेहत्या की सुपारी देकरअपनी ही जन्मदात्री की हत्या का प्लान बनाया।
जमानत अर्जी खारिज
शहर की निचली अदालत ने जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए कहा कि आरोपी के खिलाफ हत्या जैसे गंभीर अपराध के आरोप हैं। मामले में पुलिस जांच अभी जारी है, इसलिए इस स्तर पर आरोपी को जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।
आयुषी की ओर से कोर्ट में जमानत के लिए आवेदन पेश किया गया था। इसमें उसे राहत देने की मांग की गई थी। हालांकि, अदालत ने अपराध की गंभीरता और जांच की स्थिति को देखते हुए याचिका खारिज कर दी।
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