कोटा में नहीं थम रहा मौतों का सिलसिला, लापरवाही से अब तक 4 प्रसूताओं की मौत
News In Short
- कोटा में सरकारी अस्पताल घोर अव्यवस्थाओं से घिरे।
- लापरवाही से एक और प्रसूता ने देर रात दम तोड़ा।
- अस्पताल की लापरवाही से तक चार प्रसूताओं की हो चुकी हैं मौत।
- सभी मौतें अस्पताल की आॅपरेशन थिएटर में फैले संक्रमण से हुई।
- गंभीर रोगियों को भी अस्पताल में नहीं मिल पा रहा वेंटिलेटर।
News In Detail
Kota: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के निर्वाचन क्षेत्र कोटा में मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों में
लापरवाही का सिलसिला जारी है। चिकित्सा प्रशासन की लापरवाही और संक्रमण के चलते पिछले 24 घंटों में दो और प्रसूताओं की मौत हो गई। अब तक कुल चार प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। इस घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा पर बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।
किडनी संक्रमण और वेंटिलेटर की कमी बनी काल
इन मौतों का प्राथमिक कारण किडनी संक्रमण बताया जा रहा है। रविवार देर रात चौथी प्रसूता पिंकी महावर (26) ने दम तोड़ दिया। पिंकी को सिजेरियन डिलीवरी के बाद जेके लोन अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनकी हालत बिगड़ती चली गई। संक्रमण इतना फैल चुका था कि उन्हें वेंटिलेटर की सख्त आवश्यकता थी, लेकिन समय पर उचित चिकित्सा प्रबंध न होने के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका।
पिंकी से पहले शनिवार को पायल और ज्योति नाम की दो अन्य महिलाओं की भी मौत हो चुकी थी। रविवार सुबह एक और प्रसूता प्रिया महावर ने भी दम तोड़ दिया। प्रिया की मौत के पीछे का कारण हार्ट बीट का अचानक 200 से अधिक हो जाना (टैचीकार्डिया) बताया जा रहा है। वर्तमान में अस्पताल में भर्ती चार अन्य प्रसूताओं की स्थिति भी अत्यंत गंभीर बनी हुई है, जो आईसीयू में वेंटिलेटर पर जीवन और मौत की जंग लड़ रही हैं।
गायब होते दस्तावेज
इतनी बड़ी त्रासदी के बावजूद चिकित्सा प्रशासन का रवैया संवेदनहीनता की पराकाष्ठा पर है। जब मीडिया और परिजनों ने इस संबंध में जवाब मांगा तो जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे रहे। हैरान करने वाली बात यह है कि घटना के बाद ओटी (ऑपरेशन थिएटर) और वार्ड का ड्यूटी रजिस्टर तक गायब कर दिया गया है।
सूत्रों के अनुसार उच्च अधिकारियों ने कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि वे इस मामले में मीडिया से कोई बात न करें। प्रशासन की यह चुप्पी कई गहरे राज़ और अपनी गलतियों को छिपाने की कोशिश की ओर इशारा कर रही है।
क्या अस्पतालों में फैल रहा है संक्रमण?
लगातार हो रही इन मौतों ने सिजेरियन ऑपरेशन (C-Section) की सुरक्षा पर सवाल उठा दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पताल के ओटी या वार्ड में कोई गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण हो सकता है, जो प्रसूताओं को अपनी चपेट में ले रहा है।
डर का आलम यह है कि सरकारी अस्पतालों में अब सिजेरियन ऑपरेशन टालने की कोशिश की जा रही है और नई प्रसूताओं को भर्ती करने से इनकार किया जा रहा है। रामपुरा सैटेलाइट अस्पताल जैसे केंद्रों ने भी प्रसूताओं को भर्ती करने से हाथ खड़े कर दिए हैं।
एम्बुलेंस में ऑक्सीजन की कमी से युवक की मौत
कोटा के साथ-साथ प्रदेश के अन्य हिस्सों से भी स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली की खबरें आ रही हैं। पाली जिले में 108 एम्बुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर खाली होने के कारण 20 वर्षीय युवक सावन कुमार की मौत हो गई।
परिजनों का आरोप है कि समय पर ऑक्सीजन न मिलने के कारण सावन ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। यह घटना दिखाती है कि केवल अस्पतालों के भीतर ही नहीं, बल्कि आपातकालीन परिवहन सेवाओं का ढांचा भी पूरी तरह चरमरा गया है।
सरकार की कार्रवाई का आश्वासन
इस पूरे मामले के तूल पकड़ने के बाद राज्य सरकार हरकत में आई है। प्रमुख शासन सचिव (चिकित्सा शिक्षा) आईएएस गायत्री राठौड़ ने पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी, चिकित्सक या स्वास्थ्यकर्मी को बख्शा नहीं जाएगा और उनके विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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