बीमारी से नहीं टूटा हौसला, 15 वर्षीय गर्वित बने एक दिन के कलेक्टर

Jageshwar prasad | Jun 04, 2026, 14:07 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान के डीडवाना-कुचामन के जिला कलेक्टर अवधेश मीना ने दुर्लभ व लाइलाज बीमारी (DMD) से पीड़ित 15 वर्षीय मेधावी छात्र गर्वित रेवाड़ को एक दिन का कलेक्टर बनाया। 10वीं में 82.83% अंक लाने वाले गर्वित ने अधिकारियों की बैठक लेकर जनसुनवाई की।

News In Short

  • डीडवाना-कुचामन जिले में छात्र गर्वित रेवाड़ को 1 दिन का जिला कलेक्टर बनाया।
  • गर्वित मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (DMD) जैसी गंभीर और लाइलाज बीमारी से पीड़ित हैं।
  • शारीरिक अक्षमता के बावजूद गर्वित ने 10वीं बोर्ड में 82.83% अंक प्राप्त किए हैं।
  • गर्वित ने अधिकारियों की बैठक लेकर समस्याओं के त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए।
  • गर्वित का सपना आईएएस अधिकारी बनकर देश सेवा करना है।

News In Detail

डीडवाना-कुचामन जिला कलेक्ट्रेट परिसर बुधवार को एक अनूठे, भावुक और बेहद प्रेरणादायक पल का गवाह बना। जिले के वास्तविक जिला कलेक्टर अवधेश मीना ने लाडनूं क्षेत्र के ग्राम रोडू निवासी 15 वर्षीय किशोर गर्वित रेवाड़ की प्रशासनिक मुखिया बनने की इच्छा को हकीकत में बदल दिया।



गंभीर शारीरिक चुनौतियों से जूझ रहे गर्वित को एक दिन का जिला कलेक्टर बनाकर प्रशासन ने न केवल संवेदनशीलता की मिसाल पेश की, बल्कि समाज को यह संदेश भी दिया कि मजबूत हौसलों के आगे कोई भी बीमारी बड़ी नहीं होती।



पूरे प्रोटोकॉल के साथ संभाली कलेक्टर की कुर्सी

गर्वित को बुधवार सुबह पूरे राजकीय प्रोटोकॉल के साथ उनके निवास से वीआईपी (VIP) सरकारी वाहन में कलेक्ट्रेट लाया गया। कलेक्ट्रेट पहुंचने पर स्वयं जिला कलेक्टर अवधेश मीना ने गुलदस्ता भेंट कर गर्वित का आत्मीय स्वागत किया।



इसके बाद उन्हें कलेक्टर के मुख्य चैंबर में ले जाया गया, जहां गर्वित ने आधिकारिक कुर्सी संभाली और एक दिन के प्रशासनिक मुखिया की जिम्मेदारी का निर्वहन किया।



अधिकारियों की बैठक ली, प्रतीकात्मक अवकाश भी घोषित

कलेक्टर की कुर्सी संभालने के बाद 15 वर्षीय गर्वित पूरी तरह प्रशासनिक रंग में नजर आए। उन्होंने कलेक्ट्रेट में विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारियों और कर्मचारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक ली।



बैठक में गर्वित ने संवेदनशीलता दिखाते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनता की शिकायतों और समस्याओं का त्वरित और समयबद्ध निस्तारण होना चाहिए। प्रशासन का पहला और अंतिम दायित्व केवल आमजन की बात को पूरी गंभीरता से सुनना और उनकी तकलीफों को दूर करना है।



कार्यवाही के दौरान गर्वित ने प्रतीकात्मक रूप से एक दिन के राजकीय अवकाशकी घोषणा भी की, जिसका उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों ने तालियां बजाकर स्वागत किया। इस दौरान कलेक्ट्रेट पहुंचे कई नागरिकों ने नए कलेक्टर को अपनी समस्याओं के ज्ञापन सौंपे और विभिन्न कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि के रूप में आने के निमंत्रण भी दिए।



क्या है DMD बीमारी, जिससे जूझ रहे हैं गर्वित?

24 अगस्त 2010 को जन्मे गर्वित रेवाड़ डीएमडी (Duchenne Muscular Dystrophy - ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी) जैसी अत्यंत गंभीर, दुर्लभ और लाइलाज आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित हैं। इस बीमारी के कारण समय के साथ मांसपेशियां बेहद कमजोर हो जाती हैं और शरीर के अधिकांश अंग काम करना बंद कर देते हैं।



गर्वित भी शुरुआती सालों में सामान्य बच्चों की तरह ही थे, लेकिन धीरे-धीरे इस बीमारी ने उन्हें अपनी गिरफ्त में ले लिया। शारीरिक रूप से अत्यधिक अक्षम होने के बावजूद गर्वित का आत्मविश्वास और मानसिक क्षमता अद्भुत है।



बिना हाथ चलाए प्राप्त किये 10वीं बोर्ड में 82.83% अंक

शारीरिक अक्षमता गर्वित की पढ़ाई के आड़े कभी नहीं आई। हाल ही में घोषित हुए 10वीं कक्षा के बोर्ड परीक्षा परिणामों में गर्वित ने 82.83 प्रतिशत अंक हासिल कर अपनी कुशाग्र बुद्धि का लोहा मनवाया है।



शारीरिक कमजोरी के कारण वे स्वयं लिखने में पूरी तरह असमर्थ थे, इसलिए परीक्षा के दौरान वे उत्तर मुंह से बोलते थे और प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए एक अन्य छात्र (Scribe) ने उनकी जगह उत्तर पुस्तिका में लिखा था।



सपना है असली IAS बनना

गर्वित का अंतिम लक्ष्य भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में चयनित होकर देश की सेवा करना है। उन्होंने युवाओं और संघर्ष कर रहे लोगों को संदेश देते हुए कहा कि जीवन में चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, व्यक्ति को कभी हार नहीं माननी चाहिए। पूरी लगन, ईमानदारी और सकारात्मकता से किया गया प्रयास एक न एक दिन जरूर सफल होता है।



इस अवसर पर जिला कलेक्टर अवधेश मीना ने बताया कि डीएमडी जैसी गंभीर बीमारी के बावजूद गर्वित की यह शैक्षणिक और मानसिक उपलब्धि पूरे जिले के लिए गौरव की बात है। उनके माता-पिता ने हमसे गर्वित की यह इच्छा साझा की थी। उसे एक दिन का कलेक्टर बनाकर हमारा उद्देश्य समाज और युवाओं को प्रेरित करना है।



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