अपनी पार्टी पर भड़के पूर्व मंत्री, लगाया ओछी मानसिकता का आरोप
समझें क्या है पूरा मामला
- डीग कांग्रेस में निकाय चुनाव से पहले गुटबाजी सामने आई।
- वार्ड प्रभारी सूची में विश्वेंद्र सिंह का नाम नहीं होने से नाराजगी।
- पूर्व मंत्री ने इसे सोची-समझी साजिश बताया।
- विश्वेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पर जिलाध्यक्ष पर निशाना साधा।
- अंदरूनी कलह का असर निकाय चुनाव पर पड़ने की आशंका।
राजस्थान के डीग जिले में निकाय चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी सामने आई है। जिलाध्यक्ष राजीव सिंह की जारी वार्ड प्रभारी सूची में पूर्व कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह का नाम शामिल नहीं किया गया। इसकी जगह सिर्फ 'कांग्रेस प्रत्याशी विधानसभा डीग-कुम्हेर' लिखा गया। इससे नाराज विश्वेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे पार्टी के भीतर सोची-समझी साजिश बताया है।
सूची में किसके नाम शामिल, किसका नाम गायब
डीग जिला कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष राजीव सिंह ने निकाय चुनाव के लिए वार्ड प्रभारियों की सूची जारी की। इस सूची में प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, क्षेत्रीय सांसद संजना जाटव, जिला प्रभारी देशराज मीणा और सह-प्रभारी हिम्मत सिंह सहित कई वरिष्ठ नेताओं के नाम पूरे सम्मान के साथ शामिल किए गए।
लेकिन इस सूची में राज्य सरकार में दो बार कैबिनेट मंत्री रह चुके और भरतपुर राजघराने से जुड़े वरिष्ठ नेता विश्वेंद्र सिंह का नाम शामिल नहीं किया गया। उनके नाम की जगह केवल 'कांग्रेस प्रत्याशी विधानसभा डीग-कुम्हेर' लिखा गया।
पूर्व मंत्री का सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा
नाम गायब होने से नाराज पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने अपनी ही पार्टी के जिलाध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर की।
अपने पोस्ट में विश्वेंद्र सिंह ने लिखा, "डीग कांग्रेस के जिलाध्यक्ष राजीव सिंह द्वारा आगामी निकाय चुनावों के लिए प्रभारियों की सूची जारी की गई है। उसमें मेरा नाम ना लिखकर सिर्फ 'कांग्रेस प्रत्याशी विधानसभा डीग-कुम्हेर' लिखकर जिस ओछी मानसिकता का परिचय दिया गया है, उसकी मैं घोर निंदा करता हूं।" यह विश्वेंद्र सिंह का अपना बयान है, जिलाध्यक्ष राजीव सिंह की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
'इतने पदों के बाद भी यह अपमान बर्दाश्त नहीं'
विश्वेंद्र सिंह ने अपने राजनीतिक अनुभव का हवाला देते हुए भी नाराजगी जताई। उन्होंने लिखा, "मैं अपने राजनीतिक जीवन में 1 बार जिला प्रमुख, 3 बार सांसद, 3 बार विधायक और 2 बार कैबिनेट मंत्री रहने के बावजूद इस तरह का अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकता।"
उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों को नीचा दिखाने की सोची-समझी कोशिश हो रही है। यह आरोप भी विश्वेंद्र सिंह का अपना दावा है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
चुनाव में नुकसान की दी चेतावनी
पूर्व मंत्री ने आगे लिखा, "राजीव सिंह द्वारा जिस ओछी मानसिकता का परिचय दिया गया है, उसका असर आगामी निकाय चुनावों में कांग्रेस पार्टी को भुगतना पड़ सकता है। इस षड्यंत्र में जो भी लोग शामिल हैं, उनको जनता जवाब देने को तैयार है।"
इस बयान से साफ है कि विश्वेंद्र सिंह इस मुद्दे को लेकर बेहद गंभीर हैं और आने वाले चुनाव में इसका असर दिखने की आशंका जता रहे हैं।
लंबे समय से चली आ रही है गुटबाजी
भरतपुर-डीग अंचल राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना जाता है। डीग जिले के गठन और निकाय चुनाव की सुगबुगाहट के बीच स्थानीय संगठन में लंबे समय से दो फाड़ की स्थिति बनी हुई है।
विश्वेंद्र सिंह इससे पहले भी जिला स्तर पर संगठन के निष्क्रिय रहने और राहुल गांधी के कार्यक्रम आयोजित न करने को लेकर स्थानीय नेतृत्व की आलोचना कर चुके हैं। इस ताजा विवाद ने पुरानी अंदरूनी खींचतान को फिर उजागर कर दिया है।
कार्यकर्ताओं में बढ़ रही नाराजगी
जारी सूची में पीसीसी चीफ, सांसद और जिला प्रभारियों के नाम शामिल हैं, जबकि पूर्व मंत्री को सिर्फ 'पूर्व प्रत्याशी' के तौर पर दिखाना विवाद की मुख्य वजह बना। डीग और कुम्हेर नगर पालिका व नगर परिषद क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं के बीच भी इसे लेकर असंतोष बढ़ रहा है।
स्थानीय कार्यकर्ताओं का मानना है कि अगर शीर्ष नेतृत्व ने समय रहते यह अंतरकलह शांत नहीं किया, तो आने वाले निकाय चुनाव में पार्टी को भारी राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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