कभी कलेक्टर की गाड़ी के पीछे दौड़ते थे, आज हैं मुख्यमंत्री के सचिव
कभी कलेक्टर की गाड़ी के पीछे दौड़ने वाला बच्चा आज उसी कुर्सी पर बैठकर हजारों लोगों की जिंदगी बदल रहा है। यह कहानी है आईएएस डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी की।
इन्होंने गरीबी, अभाव और कठिनाइयों को कामयाबी की अपनी राह में कभी रोड़ा नहीं बनने दिया। आज वे मुख्यमंत्री के सचिव, राजस्थान एवं शासन सचिव, सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, जयपुर हैं। वे एक सफल लेखक भी हैं। हाल ही में उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार 2025 से सम्मानित किए जाने की घोषणा हुई है।
वो बचपन के दिन
राजस्थान कैडर के 2010 बैच के आईएएस डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी हनुमानगढ़ जिले का धनासर गांव के रहने वाले हैं। उनका जन्म 29 नवंबर 1981 को एक ऐसे सामान्य परिवार में हुआ, जहां पिता घड़ी सुधारने का काम करते थे।
मां रेश्मा अशिक्षित थीं। संसाधनों की इतनी कमी कि कई बार उन्हें रोजमर्रा की आम जरुरत का भी अभाव रहता था। लेकिन जितेंद्र के मन में बचपन से ही कलेक्टर बनने का सपना था।
वे सरकारी प्राथमिक स्कूल में पढ़ते थे तो गांव में सरकारी गाड़ी देखकर उसके पीछे दौड़ लगाते थे। यही समझते थे कि इसमें कलेक्टर बैठे होंगे, जो जिले का सबसे बड़ा अधिकारी होता है।
यह देखकर उनके पिता ने भी मन में ठान लिया कि वे अपने बेटे को कलेक्टर बनाने के लिए हाड़तोड़ मेहनत करेंगे। तमाम कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने बेटे को कभी पढ़ाई में कभी बाधा नहीं आने दी, बल्कि हर बार प्रोत्साहित किया।
शिक्षा को बनाया हथियार
डॉ. जितेंद्र ने अपनी शुरुआती पढ़ाई हिंदी माध्यम के सरकारी स्कूल से की। उनकी प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने न केवल पढ़ाई में टॉप किया, बल्कि शिक्षा के लिए लगातार आगे बढ़ते रहे।
उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर से फिलॉसफी में एमए और राजनीतिक विज्ञान में पीएचडी की। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक सरकारी शिक्षक के रूप में की, जहां उन्होंने बच्चों को पढ़ाया और साथ ही अपने बड़े सपनों को भी सींचा।
पहले ही प्रयास में बने IAS
जितेंद्र कुमार सोनी की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि उन्होंने यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा पहले ही प्रयास में पास कर ली। एक सरकारी शिक्षक के रूप में काम करते हुए सीमित संसाधनों में उनकी सफलता को देखकर सभी लोग दंग रह गए। उनकी ऑल इंडिया रैंक 29 बनी। यह सफलता इस बात की मिसाल है कि सही दिशा, ईमानदारी और समर्पण से कोई भी लक्ष्य मुश्किल नहीं होता।
वे बताते हैं कि उन्होंने व्यावहारिक ज्ञान को अकादमिक ज्ञान से जोड़ा, एक स्मार्ट स्टडी प्लान बनाया और अपने लक्ष्य पर पूरी तरह फोकस किया। उनका मानना है कि संसाधन नहीं, बल्कि लगन और समर्पण सफलता की असली कुंजी हैं।
प्रशासनिक कार्यों में नवाचार और उत्कृष्टता
आईएएस जितेंद्र कुमार सोनी नागौर, झालावाड़, अलवर, जालोर और जयपुर में कलेक्टर रहे हैं। उनके द्वारा शुरू किए गए अभियान और नवाचार आज भी याद किए जाते हैं।
जालोर कार्यकाल के दौरान 'जाबरो जालोर फेसबुक पेज' की शुरुआत एक अनोखी पहल थी, जिसमें फेसबुक के जरिए आमजन की शिकायतें एकत्र की गईं, फिर उनका निवारण किया गया। इससे आम लोगों का कलेक्टर से जुड़ना आसान हो गया।
जालोर में ही चरण पदुका अभियान में दानदाताओं के सहयोग से गरीब स्कूली बच्चों को मुफ्त जूते उपलब्ध कराए गए।
उज्जास अभियान में सरकारी स्कूलों को बिजली से जोड़ा गया, जिससे विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षा और बेहतर वातावरण मिल सके। इसी तरह रास्ता खोलो अभियान में अतिक्रमण हटाकर और सहमति बनाकर खेतों, ढाणियों और गांवों के रास्तों को सुगम बनाया गया।
राजस्थानी भाषा के साहित्यकार भी हैं आईएएस सोनी
जितेंद्र कुमार सोनी सिर्फ एक सफल प्रशासक ही नहीं, बल्कि एक श्रेष्ठ साहित्यकार भी हैं। वे राजस्थानी और हिंदी दोनों भाषाओं में सक्रिय रचनाकार हैं। कहानी, कविता, डायरी लेखन और अनुवाद के क्षेत्र में उनका सृजन जारी है।
उनकी अब तक 15 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिन्हें पाठकों और साहित्यिक समीक्षकों से व्यापक सराहना मिली है। उनकी रचनाओं में लोक संस्कृति की गहरी समझ, मानवीय संबंधों की सूक्ष्म संवेदनाएं और सामाजिक यथार्थ का जीवंत चित्रण दिखता है।
साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित
हाल ही में डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी को साहित्य अकादमी पुरस्कार 2025 से सम्मानित किए जाने की घोषणा हुई है। यह देश का प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मान है। उन्हें यह पुरस्कार राजस्थानी भाषा में उनके चर्चित कहानी संग्रह भरखमा के लिए मिल रहा है। इससे पहले उनकी राजस्थानी कविता संग्रह रणखार के लिए उन्हें साहित्य अकादमी का युवा पुरस्कार भी मिल चुका है।
प्रशासनिक कार्यों के लिए सम्मान
उन्होंने प्रशासनिक कार्यों में कई नवाचार किए। कड़ी मेहनत और समर्पण के लिए उन्हें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार (2021), जीवन रक्षापदक (2015) जैसे कई सम्मान मिले हैं। इसके अतिरिक्त, उन्हें राष्ट्रपति के द्वारा 'दिव्यांगजन के लिए किए गए कार्यों के लिए भी सम्मानित किया गया है।
युवाओं के लिए मिसाल बने जितेंद्र
डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी का जीवन हमें सिखाता है कि सफलता के लिए मंहगे संसाधनों की नहीं, बल्कि मेहनत और अटूट धैर्य की जरूरत होती है। आज वह केवल एक जिले के कलेक्टर नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए एक मशाल हैं जो गरीबी और अभावों के बीच आईएएस बनने के बड़े सपने देख रहे हैं।
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