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Photograph: (the sootr)
News In Short
- बाड़मेर के गडरा रोड एसडीएम सुरेश कुमार मेघवाल रील में दिखे सिंघम स्टाइल में
- सुरेश कुमार बाड़मेर कलैक्टर टीना डाबी के हैं मातहत, वे भी रील प्रेम से लोक​प्रिय
- 'देसी-सिंधी' लुक में एसडीएम की रील पर सोशल मीडिया में यूजर्स ले रहे मजे
- आरएएस सुरेश कुमार की छवि अच्छे अधिकारियों में, लेकिन विवादों से रहा नाता
- बड़ा सवाल, क्या अधिकारियों का रील प्रेम आता है अनुशासनहीनता श्रेणी में
News In Detail
राजस्थान के सरहदी जिले बाड़मेर में इन दिनों प्रशासनिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक सिर्फ एक ही चर्चा है— 'साहब का जलवा'। बाड़मेर आईएएस टीना डाबी, जो अपनी कार्यशैली के साथ-साथ सोशल मीडिया रील के लिए देशभर में मशहूर हैं, अब उनके नक्शेकदम पर जिले के अन्य अधिकारी भी चलने लगे हैं। ताजा मामला भारत-पाक सीमा पर स्थित गडरा रोड के एसडीएम सुरेश कुमार मेघवाल का है, जिनका 'सिंघम' स्टाइल वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो रहा है।
यह है माननीय SDM साहब गडरा रोड़ बाड़मेर के....
— Balkaur Singh Dhillon (@BalkaurDhillon) February 7, 2026
सरकार की योजनाएं धरातल तक पहुँचे या ना पहुंचे
साहब की रील हर जगह पहुंची हुई है @BhajanlalBjp@RajCMO@svoruganti1466@BarmerDm
pic.twitter.com/Czzzup7sLx
​सिंध के सांस्कृतिक रंग में रंगे 'कड़क' साहब
वायरल वीडियो में एसडीएम सुरेश कुमार किसी फिल्मी नायक की तरह आॅफिस में एंट्री लेते दिख रहे हैं। खास बात यह है कि उन्होंने इस रील में जो पोशाक पहनी है, वह चर्चा का केंद्र बनी हुई है। सुरेश कुमार ने तेवटा, कमीज और साफा पहना है, जो कि मूल रूप से पाकिस्तान के सिंध कल्चर की पारंपरिक वेशभूषा है। चूंकि गडरा रोड बिल्कुल सीमा पर है, इसलिए यह पहनावा राजस्थान के इस सीमावर्ती क्षेत्र में भी काफी लोकप्रिय है। हाथ में चश्मा और चेहरे पर प्रशासनिक रौब के साथ उनका यह 'देसी-सिंधी' लुक युवाओं को खूब पसंद आ रहा है।
जलने वाले जलते रहेंगे,
— SDM Suresh K.Meghwal (RAS) (@sdmsureshkm_) January 1, 2026
हम कर्म से रोशनी बनते रहेंगे। 🔥
शोर नहीं, परिणाम बोलेंगे।
मेहनत रुकेगी नहीं।
✨ नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ!#sdmsureshkm बॉस pic.twitter.com/fRNe2AuKGM
कौन हैं आरएएस सुरेश कुमार?
​मूल रूप से जोधपुर के रहने वाले सुरेश कुमार 2017 बैच के राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) के अधिकारी हैं। सितंबर 2025 में उन्हें गडरा रोड उपखंड की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। सुरेश कुमार की पहचान केवल रील बनाने वाले अधिकारी की ही नहीं है, बल्कि वे एक बेहतरीन मोटिवेशनल स्पीकर भी हैं और युवाओं के बीच करियर गाइडेंस को लेकर काफी सक्रिय रहते हैं।
“कुछ तो है तुझमें ऐ हस्ती,
— SDM Suresh K.Meghwal (RAS) (@sdmsureshkm_) December 16, 2025
जो मिटती नहीं।
यूँ ही नहीं लोग तुझे
मिटाने की कोशिश करते हैं।”#sdmsureshkmpic.twitter.com/2JvlYWyN5K
SIR में 100% लक्ष्य: जब प्रदेश में बटोरी सुर्खियां
​प्रशासनिक दक्षता की बात करें तो सुरेश कुमार ने हाल ही में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने अपने क्षेत्र में एसआईआर (SIR) के तहत बहुत कम समय में 100 फीसदी लक्ष्य हासिल किया। इस सफलता के बाद उनकी गिनती प्रदेश के उन चुनिंदा अफसरों में होने लगी जिन्होंने इतनी तेजी से इस टारगेट को छुआ। सोशल मीडिया पर उनके काम की तारीफों के पुल बांधे गए और उन्हें 'रिजल्ट ओरिएंटेड' ऑफिसर माना गया।
​विवादों से भी रहा है पुराना नाता
​जहां एक तरफ सुरेश कुमार की कार्यशैली की तारीफ होती है, वहीं उनके साथ विवादों का साया भी रहा है। गडरा रोड से पहले वे पाली जिले के रायपुर में तैनात थे, जहां एक गाड़ी जलाने के मामले में वे विवादों के घेरे में आ गए थे।
इतना ही नहीं, सुरेश कुमार अपनी सोशल मीडिया पोस्ट्स को लेकर भी सुर्खियों में रहे हैं। उन्होंने पूर्व में 'जेड जी' (Z-G) को लेकर एक विवादास्पद पोस्ट की थी, जिसमें उन्होंने संकेत दिया था कि भारत में भी नेपाल जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं। इस पोस्ट के बाद प्रशासनिक हलकों में काफी हड़कंप मचा था और उनकी समझ व निष्ठा पर सवाल उठाए गए थे।
हम जैसे सामान्य लोग भी ऐसी रीलें बनाने से बचते हैं..
— kapil bishnoi (@Kapil_Jyani_) February 8, 2026
कहीं लोग छपरी ना बोल दें….
ये लोग SDM बनने के बाद भी ऐसे कंटेंट कैसे बना लेते हैं और पोस्ट भी कर लेते हैं….
अंतरात्मा रोकती नहीं होगी क्या….?? pic.twitter.com/xXetMTwIwc
​टीना डाबी इफेक्ट: रील बनाम ड्यूटी
​बाड़मेर कलेक्टर टीना डाबी अपनी हर एक्टिविटी को सोशल मीडिया पर शेयर करने के लिए जानी जाती हैं। अब उनके अधीन काम करने वाले अधिकारी भी इसी राह पर चल पड़े हैं। सुरेश कुमार इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। आलोचकों का मानना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात अधिकारियों को अपनी सुरक्षा और गोपनीयता का ध्यान रखना चाहिए, वहीं समर्थकों का कहना है कि स्थानीय संस्कृति (सिंधी वेशभूषा) को बढ़ावा देना और जनता से जुड़ने का यह एक आधुनिक तरीका है।
​क्या रील बनाना अनुशासनहीनता?
​सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। क्या अधिकारी को फिल्मी गानों और स्लो-मोशन वीडियो के जरिए अपनी छवि चमकानी चाहिए? हालांकि, राजस्थान में पिछले कुछ बरसों में अधिकारियों के बीच रील बनाने का चलन तेजी से बढ़ा है। सुरेश कुमार के मामले में, उनके काम की गति और 100% लक्ष्य प्राप्ति ने उनके पक्ष में माहौल बना रखा है, लेकिन विवादित बैकग्राउंड और ताजा रील ने उन्हें एक बार फिर 'टॉक ऑफ द टाउन' बना दिया है।
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