द्रव्यवती नदी की जमीन पर भू-माफिया का कब्जा, जेडीए सचिव ने मंगवाया रिकार्ड
समझें क्या है पूरा मामला
- द्रव्यवती नदी के 75 मीटर के दायरे में कीमती सरकारी जमीन पर कब्जा।
- जेडीए अफसरों की शह पर चारदीवारी और पक्के अवैध निर्माण का आरोप।
- भूमाफिया ने खाली पड़ी सरकारी जमीन को दो बड़े भूखंडों में बांट दिया।
- एक भूखंड मुंबई के एक व्यवसायी को करोड़ों रुपये में बेच दिया गया।
- जेडीए सचिव ने मांगा इस जमीन का पूरा रिकार्ड, भूमाफिया का कब्जा बरकार।
राजस्थान में इन दिनों चल रहे शहरी समाधान शिविर में भूमाफिया भी सक्रिय हैं। ऐसा ही एक मामला जयपुर में सामने आया है।
मामला जयपुर में आतिश मार्केट से जुड़ी एक सरकारी जमीन का है। यह जमीन द्रव्यवती कैचमेंट एरिया में आती है।
नदी के 75 मीटर दायरे में बिना अदालत की मंजूरी के कोई काम करने पर हाई कोर्ट की पाबंदी है। इसके बावजूद भूमाफिया शहरी समाधान शिविर की आड़ में इस जमीन का कमर्शियल पट्टा लेने की फिराक में है।
तलब किया जमीन का रिकॉर्ड
भूमाफिया की सक्रियता के बाद तरुण शर्मा भारती ने आरटीआई (RTI) के जरिए जेडीए से जमीन की जानकारी मांगी है।
जेडीए संबंधित जोन कार्यालय ने कोई सूचना उपलब्ध नहीं कराई। इसके बाद तरुण ने प्रथम अपील के साथ अपनी शिकायत भी दोहराई है।
इस पर जेडीए सचिव ने संबंधित जोन कार्यालय और प्रवर्तन इंस्पेक्टर से विवादित जमीन से जुड़ा समस्त रिकार्ड पेश करने को कहा है।
हाउसिंग सहकारी समिति का है खेल
यह जमीन आतिश मार्केट के पास गोपालपुरा बाइपास पर स्थित है। इस जमीन पर मित्र गृह निर्माण सहकारी समिति के कर्ताधर्ताओं ने गैर-कानूनी कब्जा कर रखा है।
शिकायतकर्ता के अनुसार इन लोगों ने इस जमीन का एक हिस्सा मुंबई के एक व्यवसायी को बेच दिया। ये लोग जेडीए अफसरों की मिलीभगत से इस जमीन को पट्टा लेने की कोशिश में हैं।
पहले शिकायत होने पर तत्कालीन जेडीसी आनंदी ने पट्टा देने पर रोक लगा दी थी। इसके बाद भी जमीन से कब्जा नहीं हटाया गया।
अब भू-माफिया ने शहरी समाधान शिविर के जरिए फिर से इस जमीन का पट्टा लेने की कोशिश शुरु कर दी है।
पहले करोड़ों में बेची जमीन, अब नियमन की तैयारी
शिकायत के अनुसार यह जमीन पहले पूरी तरह खाली पड़ी थी। लेकिन कब्जा जमाने के उद्देश्य से यहां रातों-रात ईंटों से चारदीवारी खड़ी कर दी गई। कुछ कोठरीनुमा कमरों का निर्माण कर लिया गया।
द्रव्यवती नदी से लगती इस जमीन को क्रॉस करके गैर-अनुमोदित करार दिया गया था। आतिश मार्केट से लगती इस जमीन पर दो हजार वर्ग गज के बड़े दो भूखंड तैयार कर दिए हैं।
भू-माफिया ने इसी जमीन से दो हजार वर्ग गज का एक हिस्सा मुंबई के एक व्यवसायी को करोड़ों रुपए में बेच दिया।
नदी की जमीन पर कब्जे जेडीए है खामोश
द्रव्यवती नदी के कैचमेंट एरिया की करीब-करीब पूरी जमीन को सरकार की मिलीभगत से कब्जाया जा चुका है।
हाईकोर्ट नदी के कैचमेंट एरिया में अतिक्रमण हटाने व बिना अदालत की मंजूरी के कोई काम करने पर पाबंदी लगा चुका है। यह रोक नदी के 75 मीटर के दायरे में प्रभावी है।
इसके बावजूद सरकारी मिलीभगत से नदी के दोनों ओर कैचमेंट एरिया में निर्माण हो रहे हैं।
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