भजनलाल सरकार का यू-टर्न, हाईकोर्ट की जेडीए को लताड़- सरकार बदलने से नहीं बदलते वादे और कांट्रेक्ट
Mukesh Sharma | Jun 04, 2026, 07:41 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान हाईकोर्ट ने ओटीएस फ्लाईओवर कांट्रेक्ट रद्द करने का जेडीए का फैसला पलट दिया है। जस्टिस समीर जैन ने कहा कि राजनीतिक कारणों से सरकारी वादे नहीं तोड़े जा सकते। कोर्ट ने पुरानी योजना बहाल कर मुख्य सचिव को दोषी अफसरों पर कार्रवाई के निर्देश दिए।
News In Short
- जेएलएन मार्ग के ओटीएस चौराहे पर फ्लाई ओवर प्रोजेक्ट को वापिस लेने का आदेश रद्ध्
- कोर्ट ने जेडीए अधिकारियों के दावों की हवा निकालते हुए कॉन्ट्रैक्ट रद्द करने के फैसले को माना दुर्भावनापूर्ण ।
- जेडीए की नोटशीट ने खोली अफसरों की पोल,कंपनी की लापरवाही से नहीं, बल्कि प्रशासनिक अड़चनों व जमीन न मिलने से अटका प्रोजेक्ट।
- वैध प्रोजेक्ट को रोककर नए सिरे से डीपीआर और टेंडर निकालने को हाईकोर्ट ने जनता के पैसे की बर्बादी बताया।
- कोर्ट ने जेडीए की दोहरी चाल पर मुख्य सचिव को उच्च स्तरीय जांच कर दो महीने में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
News In Detail
जस्टिस समीर जैन ने मैसर्स जेसीएल इन्फ्रा प्राइवेट लिमिटेड की याचिका को स्वीकार करते हुए, भजनलाल सरकार द्वारा ओटीएस (OTS) चौराहे के प्रोजेक्ट को रद्द करने, नया टैंडर जारी करने और नई डीपीआर (DPR) बनाने के आदेशों को रद्द (Quash) कर दिया है। अदालत ने जेडीए को पुराने कॉन्ट्रेक्ट के अनुसार ही इस परियोजना को आगे बढ़ाने और समय सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
बजट घोषणा से लेकर विवाद तक
टेंडर प्रक्रिया के बाद जेसीएल इन्फ्रा प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में वर्क ऑर्डर जारी हुआ और 27 दिसंबर 2022 को ₹184.30 करोड़ का कांट्रेक्ट हुआ। शर्तों के मुताबिक कंपनी को 6 जनवरी 2023 से काम शुरू कर 5 जनवरी 2024 तक पूरा करना था।
क्यों अटका था प्रोजेक्ट
यह थे प्रमुख कारण
OTS का जमीन देने से इंकार
पेड़ काटने का विरोध व बीसलपुर लाइन
कंपनी की ओर से एडवोकेट एस.एस. होरा और आदेश अरोड़ा ने कोर्ट को बताया कि कंपनी ने ड्राइंग-डिजाइन बनाकर मंजूरी के लिए भेज दिए थे और स्टील भी खरीद लिया था। लेकिन जेडीए ने न तो आवश्यक अनुमतियां दीं और न ही साइट पर जमीन उपलब्ध कराई।
सरकार बदलते ही रुख बदलना,सार्वजनिक धन की बर्बादी
इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि मौजूदा वैध कांट्रेक्ट को अचानक वापस लेना और नई डीपीआर के लिए टैंडर जारी करना न केवल मनमाना है,बल्कि दुर्भावनापूर्ण (Malafide) भी है। इससे किसी बड़े सार्वजनिक हित की पूर्ति नहीं हो रही, बल्कि यह अनावश्यक देरी, लागत में बढ़ोतरी और जनता के संसाधनों व पैसों की खुली बर्बादी है।
कोर्ट के निर्देश
कांट्रेक्ट रद्द करने के आदेश खारिज
फौरन शुरु हो काम
मुख्य सचिव करें जांच
दोषी अधिकारियों पर 2 महीने में कार्रवाई:
राज्य के लिए नसीहत
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