भूमि हड़पने का आरोप, पावर ऑफ अटॉर्नी के दुरुपयोग की जांच, ईडी ने तलब किए किसान
News In Short
- जयपुर के किसानों ने लगाया रियल एस्टेट डेवलपर्स पर जमीन हड़पने का आरोप।
- किसानों कहना है कि डेवलपर्स ने पावर ऑफ अटॉर्नी का दुरुपयोग किया।
- ईडी ने मामले की जांच के लिए कई किसानों को बयान दर्ज कराने के लिए तलब किया।
- किसानों का कहना है कि उन्होंने 2005 में जमीन कानूनी रूप से बेची थी।
- प्रवर्तन निदेशालय पिछले दो दशकों के स्वामित्व रिकॉर्ड और पावर ऑफ अटॉर्नी की जांच कर रहा है।
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जयपुर जिले के कई किसानों ने गंभीर आरोप लगाया है कि रियल एस्टेट डेवलपर्स ने पावर ऑफ अटॉर्नी का दुरुपयोग करके धोखाधड़ी से उनकी पुश्तैनी कृषि भूमि हड़प ली है। इस मामले में अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जांच शुरू कर दी है। ईडी की जयपुर शाखा ने कई किसानों को तीन जून को बयान दर्ज कराने और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए तलब किया है।
किसानों ने क्या कहा?
जयसिंहपुरा और सांगानेर क्षेत्र के गांवों के किसानों का कहना है कि उन्होंने अपनी जमीन सालों पहले कानूनी तरीके से बेच दी थी और पूरा भुगतान भी प्राप्त कर लिया था। बाद में उन्हें पता चला कि उनके स्वामित्व अधिकारों में उनकी जानकारी के बिना बदलाव किया गया।
एक किसान ने कहा कि उनके परिवार ने 2005 में लगभग 1.82 हेक्टेयर भूमि पिंकसिटी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि. को बेची थी और पूरा भुगतान बैंकिंग चैनलों के माध्यम से प्राप्त किया था।
पावर ऑफ अटॉर्नी का दुरुपयोग
किसान के बेटे ने बताया कि हमने बिक्री कानूनी रूप से पूरी की थी और किसी अन्य से कोई लेन-देन नहीं किया। बाद में पता चला कि पावर ऑफ अटॉर्नी का दुरुपयोग कर हमारी जमीन पर बिना सहमति कब्जा कर लिया गया। हमें तीन जून को दस्तावेज जमा करने के लिए बुलाया गया है।
एक अन्य किसान मदन बलाई को भी एजेंसी ने मामले में तलब किया है। गांववालों से बिक्री दस्तावेज और अन्य बैंकिंग लेन-देन प्रस्तुत करने को कहा गया है।
भूमि माफिया नेटवर्क से जुड़ा मामला
जांच एजेंसी को दिए हलफनामे की प्रति के अनुसार यह जांच कथित भूमि माफिया नेटवर्क की गतिविधियों से जुड़ी है, जिसमें ज्ञानचंद अग्रवाल नामक व्यक्ति और अन्य लोग शामिल बताए गए हैं।
अधिकारी पिछले दो दशकों में किए गए स्वामित्व रिकॉर्ड, सरेंडर डीड और पावर ऑफ अटॉर्नी की पड़ताल कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में धोखाधड़ी का पैटर्न साफ नजर आ रहा है और कई किसानों के साथ इसी तरह की गड़बड़ी की गई है।
रेरा में भी दर्ज है शिकायत
कंपनी ने राजस्थान रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (रेरा) में अपनी शिकायत में बताया कि श्रीनाथ विहार कॉलोनी के कुछ भूखंडों का विकास जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) से अनुमति लेकर किया गया था, जबकि उन भूखंडों के स्वामित्व को लेकर विवाद पहले से ही जारी था।
आरोप है कि परियोजना को झूठे दस्तावेज के आधार पर पंजीकृत किया गया और विवादों व मुकदमों को छिपाया गया। शिकायत में पंजीकरण रद्द करने और फोरेंसिक ऑडिट जैसी कार्रवाई की मांग भी की गई है।
300 से अधिक प्राथमिकी दर्ज
मामले की जांच जयपुर में विशेष संचालन समूह (एसओजी) भी कर रहा है। रेरा शिकायत में यह भी कहा गया है कि ज्ञानचंद अग्रवाल के खिलाफ राजस्थान में 300 से अधिक प्राथमिकी दर्ज हैं। यह आंकड़ा अपने आप में बताता है कि यह कोई छोटा मामला नहीं है बल्कि एक बड़े भूमि माफिया नेटवर्क का पर्दाफाश हो सकता है।
अब क्या होगा?
ईडी अब इस मामले में सभी पक्षों के बयान दर्ज करेगी और दस्तावेजों की बारीकी से जांच करेगी। अगर प्रारंभिक जांच में धोखाधड़ी के सबूत मिलते हैं तो ईडी इस मामले को अपने हाथ में ले सकती है। साथ ही एसओजी की जांच भी जारी है।
किसानों को उम्मीद है कि इस जांच से उन्हें न्याय मिलेगा और उनकी जमीन वापस दिलाई जाएगी। फिलहाल सभी की नजरें तीन जून पर टिकी हैं, जब किसान ईडी के सामने पेश होंगे और अपने दस्तावेज जमा करेंगे। इसके बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।
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