डॉक्टर से लेडी सिंघम तक, आईपीएस डॉ. अमृता दुहन की प्रेरक कहानी

Jageshwar prasad | May 31, 2026, 17:39 IST
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Ashish Bhardwaj - 2026-05-31T173220.750
Photograph: (the sootr)

आईपीएस डॉ. अमृता दुहन, लेडी सिंघम, रोहतक की डॉक्टर से उदयपुर की पहली महिला SP बनीं। 33 वर्ष की उम्र में UPSC पास कर, उन्होंने राजस्थान में प्रभावी पुलिसिंग, अपराध नियंत्रण और महिला-सशक्तिकरण में मिसाल बनाई। उनका जीवन युवाओं और महिलाओं के लिए प्रेरणा है।

राजस्थान पुलिस में एक नाम है जो अपनी सख्त कार्यशैली, प्रभावी पुलिसिंग और अपराधियों के बीच खौफ के लिए जाना जाता है - डॉ. अमृता दुहन, जिन्हें लेडी सिंघम के नाम से भी पहचाना जाता है। वर्तमान में वे उदयपुर जिले का पुलिस अधीक्षक (SP) हैं। ये बहुत गर्व की बात है कि वे उदयपुर जिले की पहली महिला एसपी हैं।

लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने का सफर बेहद संघर्षपूर्ण रहा है। एक प्रतिष्ठित डॉक्टर और मेडिकल प्रोफेसर से आईपीएस अधिकारी बनने तक डॉ. अमृता दुहन का जीवन यह दिखाता है कि जब इरादे मजबूत हों, तो उम्र, पेशा या पारिवारिक जिम्मेदारियां कभी बाधा नहीं बन सकतीं। यह लेख उनके प्रेरक जीवन, अडिग संकल्प और उपलब्धियों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करता है।

रोहतक से शुरुआत और डॉक्टर बनने तक का सफर

11 नवंबर 1983 को हरियाणा के रोहतक में जन्मी अमृता दुहन का बचपन से ही कुछ अलग करने की चाह थी। उनके परिवार ने उन्हें पढ़ने की पूरी आजादी दी। उन्होंने मेडिकल क्षेत्र में उच्च शिक्षा हासिल करने का निर्णय लिया। मेहनत के बल पर उन्होंने एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की और फिर पैथोलॉजी में एमडी की डिग्री प्राप्त की।

इतना ही नहीं, उन्होंने डिप्लोमेट ऑफ नेशनल बोर्ड (DNB) की उपाधि भी हासिल की। यह उपलब्धि अपने आप में बड़ी थी, क्योंकि मेडिकल की पढ़ाई कठिन और लंबी होती है। पढ़ाई पूरी करने के बाद वे बीपीएस मेडिकल कॉलेज फॉर वुमेन में सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हो गईं। इस समय तक वे एक सम्मानित डॉक्टर और प्रोफेसर थीं, जिनका भविष्य उज्ज्वल था। समाज की नजर में वे पहले ही सफल हो चुकी थीं।

लेकिन उनके मन में एक और सपना था - एक ऐसा सपना जो बचपन में देखा गया था और जो अब भी जिंदा था।

बचपन का आईपीएस का सपना और चुनौतियां

डॉक्टर बनने के बाद भी डॉ. अमृता के मन में आईपीएस अधिकारी बनने की इच्छा बनी हुई थी। लेकिन जीवन ने नए मोड़ ले लिए थे - शादी, परिवार, नौकरी की जिम्मेदारियां। सामान्य तौर पर अधिकांश लोग ऐसे में अपने सपनों को अलविदा कह देते हैं, यह सोचकर कि अब वक्त निकल गया।

लेकिन अमृता दुहन ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने सोचा - अगर अब नहीं तो कभी नहीं। सबसे बड़ी चुनौती तब आई जब उनके बेटे का जन्म हुआ। एक छोटे बच्चे की देखभाल, नौकरी की जिम्मेदारी और घर के कामों के बीच UPSC जैसी देश की सबसे कठिन परीक्षा की तैयारी करना किसी चमत्कार से कम नहीं था।

बहुत से लोगों ने उन्हें समझाया कि अब उम्र भी हो गई है, बच्चा भी छोटा है, मेडिकल प्रोफेसर की नौकरी छोड़कर अनिश्चितता में क्यों जाना? लेकिन उन्होंने एक बात तय कर ली थी - हार मानना कोई विकल्प नहीं है।

उन्होंने हर सुबह जल्दी उठना शुरू किया। बच्चे के सो जाने के बाद रात गहरी होने तक पढ़ाई करतीं। सीमित समय में वे अधिकतम प्रभावी तैयारी पर ध्यान देती थीं। कई बार मन घबराता था, कई बार थकावट होती थी, लेकिन हर बार वे खुद को याद दिलाती थीं कि एक बार सपना देखा है तो उसे पूरा करके ही रहूंगी।

33 वर्ष की उम्र में सफलता की ऐतिहासिक छलांग

लगातार प्रयास, अनुशासन और अटूट संकल्प के दम पर डॉ. अमृता दुहन ने वर्ष 2016 में UPSC सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की। उस समय उनकी उम्र 33 वर्ष थी, जब कई लोग अपने करियर के चरम पर होते हैं या स्थिरता की तलाश में होते हैं। लेकिन उन्होंने स्थिरता की जगह सपने को चुना।

UPSC में सफलता ने उन्हें भारतीय पुलिस सेवा (IPS) का अधिकारी बना दिया। वे राजस्थान कैडर में आईं - एक ऐसा राज्य जहां पुलिसिंग की चुनौतियां बहुत विविध हैं, लेकिन उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण थी कि अगर आप सच्चे दिल से कुछ चाहें तो उम्र, लिंग या पेशे की कोई बाधा आपको रोक नहीं सकती। एक डॉक्टर, एक मां, एक पत्नी - एक ही समय में ये सभी भूमिकाएं निभाते हुए उन्होंने वह कर दिखाया, जो बहुत कम लोग कर पाते हैं।

Doctor, Mother & Top Cop: How IPS Amrita Duhan Juggled It All to Become a  Role Model
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लेडी सिंघम की उपाधि और कड़ी कार्रवाईयां

IPS बनने के बाद डॉ. अमृता दुहन ने राजस्थान के कई जिलों में अपनी सेवाएं दीं। उनकी सख्त कार्यशैली और अनुशासन ने उन्हें अधिकारियों और आम जनता दोनों के बीच लोकप्रिय बनाया।

प्रतापगढ़ में ऐतिहासिक तैनाती:

जब वे प्रतापगढ़ जिले में पुलिस अधीक्षक बनीं, तो वहां की दूसरी महिला IPS अधिकारी होने का गौरव उन्हें प्राप्त हुआ। उन्होंने कानून व्यवस्था को मजबूत करने और अपराध नियंत्रण के लिए कई सख्त कदम उठाए। स्थानीय अपराधियों में उनके नाम से ही दहशत फैल गई।

जोधपुर में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई पर शिकंजा:

जोधपुर में तैनाती के दौरान उन्होंने कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के नेटवर्क पर कड़ी कार्रवाई की। उनके एक गुर्गे के खात्मे में उनकी अहम भूमिका रही। इसी सख्त कार्रवाई के चलते उन्हें पुलिस महकमे और मीडिया में लेडी सिंघम के नाम से जाना जाने लगा। यह नाम उनके साहस, निडरता और अपराधियों के प्रति कठोर रवैये का प्रतीक बन गया।

कोटा में अनोखी पहल:

कोटा शहर, जो कोचिंग के क्षेत्र में अपने तनाव और छात्रों की मानसिक समस्याओं के लिए चर्चित है, वहां एसपी अमृता दुहन ने एक बहुत बड़ा काम किया। उन्होंने छात्रों की सुरक्षा और मानसिक शांति के लिए एक हेल्पलाइन ऐप शुरू किया, जिससे कोई भी छात्र अपनी समस्या सीधे पुलिस तक पहुंचा सकता था।

वे खुद समय-समय पर कोचिंग संस्थानों में जाकर छात्रों से मिलतीं, उनकी समस्याएं सुनतीं और उन्हें मानसिक रूप से मजबूत रहने का मंत्र देतीं। यह कोटा मॉडल इतना सफल रहा कि बाद में देश के कई अन्य शहरों ने इसे अपनाया। आज भी कोटा के छात्र उन्हें प्यार से याद करते हैं।

Mardaani 2': Rani Mukerji meets super cop Dr. Amrita Duhan at Kota
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उदयपुर की पहली महिला एसपी

हाल ही में राजस्थान सरकार ने प्रशासनिक फेरबदल किया और डॉ. अमृता दुहन को उदयपुर जिले का पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया। यह नियुक्ति इसलिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि वे उदयपुर जैसे ऐतिहासिक और संवेदनशील जिले की पहली महिला SP हैं। उदयपुर जैसे शहर में पर्यटक, स्थानीय कानून व्यवस्था, सांप्रदायिक सौहार्द और अपराध नियंत्रण - कई चुनौतियां एक साथ होती हैं।

डॉ. अमृता दुहन की कहानी से युवाओं को क्या सीख मिलती है?

कभी भी शुरुआत देर से नहीं होती:

33 वर्ष की उम्र में UPSC पास करना यह दिखाता है कि आपने किसी काम की शुरुआत किस उम्र में की, यह मायने नहीं रखता। मायने रखता है आपने कितने जुनून से वह काम किया।

पारिवारिक जिम्मेदारियां बाधा नहीं, प्रेरणा बन सकती हैं:

एक छोटे बच्चे की मां होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने परिवार को रोड़ा नहीं, बल्कि प्रेरणा बनाया। हर मां यह सोचती है कि बच्चे के बाद करियर संभव नहीं – अमृता दुहन ने यह मिथक तोड़ दिया।

सपने को कभी मरने मत दो:

डॉक्टर और प्रोफेसर जैसी प्रतिष्ठित नौकरी होते हुए भी उन्होंने अपने बचपन के सपने को जिंदा रखा। इसका मतलब है कि आप जितना भी ऊपर पहुंच जाएं, अगर आपका सच्चा सपना अधूरा है, तो उसे पूरा करने का प्रयास करते रहिए।

महिलाएं किसी से कम नहीं:

लेडी सिंघम की उपाधि इस बात का प्रतीक है कि पुलिसिंग जैसे कठोर पेशे में भी महिलाएं पुरुषों से किसी भी मोर्चे पर कम नहीं हैं। वे उतनी ही सख्त, उतनी ही निडर और उतनी ही प्रभावी हो सकती हैं।

प्रभावी पुलिसिंग सिर्फ डंडा नहीं, दिल भी होती है:

कोटा में छात्रों के लिए हेल्पलाइन ऐप और उनकी व्यक्तिगत संवेदनशीलता दर्शाती है कि एक सच्चा पुलिस अधिकारी कानून की किताबों के साथ-साथ लोगों की भावनाओं को भी समझता है।

डॉ. अमृता दुहन उन महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं जो सोचती हैं कि शादी या बच्चों के बाद करियर बदलना संभव नहीं। वे उन युवाओं के लिए प्रेरणा हैं जो उम्र का बहाना बनाकर अपने सपने टाल देते हैं। वे उन मेडिकल छात्रों के लिए प्रेरणा हैं जो सोचते हैं कि एक बार डॉक्टर बन जाने के बाद अब दूसरे करियर के बारे में सोचना व्यर्थ है।

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