एनर्जी ड्रिंक लिखना अब पड़ेगा भारी, सरकार ने किया अभियान शुरू
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान में ‘एनर्जी ड्रिंक’ नाम से बिक रहे उत्पादों पर सरकार ने सख्ती शुरू की।
- भ्रामक दावे करने वाले प्रोडक्ट पर फूड सेफ्टी एक्ट के तहत कार्रवाई होगी।
- खाद्य सुरक्षा विभाग ने पूरे प्रदेश में जांच अभियान शुरू किया है।
- दुकानों, निर्माताओं और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर उत्पादों की जांच होगी।
- ‘एनर्जी ड्रिंक’ लेबल को अब भ्रामक मानकर कंपनियों पर कार्रवाई की जाएगी।
एनर्जी ड्रिंक के नाम पर बिकने वाले प्रोडक्ट पर राजस्थान सरकार ने सख्ती शुरू कर दी है। बाजार में 'एनर्जी ड्रिंक' लिखकर बेचे जाने वाले उत्पादों को अब भ्रामक माना जाएगा। खाद्य सुरक्षा आयुक्तालय ने इसके खिलाफ अभियान शुरू किया है। नियम तोड़ने वालों पर फूड सेफ्टी एक्ट के तहत कार्रवाई होगी। दुकानों से लेकर ई-कॉमर्स तक सभी प्लेटफॉर्म की जांच की जाएगी।
राजस्थान में एनर्जी ड्रिंक के नाम पर बिकने वाले प्रोडक्ट पर नकेल कसने की तैयारी शुरू हो गई है। बाजार में बिकने वाली ड्रिंक पर 'एनर्जी ड्रिंक' की ब्रांडिंग या कमजोरी दूर करने के दावों को अब भ्रामक माना जाएगा।
ऐसे दावों के साथ बिकने वाले उत्पादों पर सख्त कार्रवाई होगी। राज्य सरकार के खाद्य सुरक्षा और औषधि नियंत्रण आयुक्तालय ने इसके लिए विशेष अभियान शुरू कर दिया है। इसके तहत भ्रामक दावों के साथ बिकने वाले फूड प्रोडक्ट पर सख्ती की जाएगी।
किन लेबलिंग को माना जाएगा मिसब्रांडिंग
नियमों का उल्लंघन करने वाले खाद्य कारोबारियों के खिलाफ फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट-2006 (Food Safety and Standard Act) के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। खाद्य सुरक्षा आयुक्त डॉ. टी. शुभमंगला ने इस आदेश को पूरे प्रदेश में तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए हैं।
एफएसएसएआई (FSSAI – Food Safety and Standards Authority of India) के निर्देशों के बाद जारी आदेश में कहा गया है कि फिलहाल 'एनर्जी ड्रिंक' शब्द या इससे मिलते-जुलते किसी भी दावे के लिए कोई अधिसूचित खाद्य मानक तय नहीं है।
ऐसे में उत्पादों पर 'एनर्जी ड्रिंक' लिखना भ्रामक लेबलिंग और मिसब्रांडिंग माना जाएगा। यह पूरे राज्य में लागू होने वाला महत्वपूर्ण नियम है।
दुकानों से ई-कॉमर्स तक होगी जांच
इसी के चलते सरकार ने ताकत बढ़ाने, मानसिक क्षमता या एकाग्रता बढ़ाने और कमजोरी दूर करने जैसे भ्रामक दावों वाले लेबल और विज्ञापनों पर भी सख्त रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
अब सिर्फ दुकानों तक ही यह जांच सीमित नहीं रहेगी। वितरकों, निर्माताओं के साथ-साथ ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बिकने वाले उत्पादों की भी जांच की जाएगी।
इससे भ्रामक दावों के जरिए ग्राहकों को गुमराह करने वाली कंपनियों पर लगाम कसने की उम्मीद है। सरकार का मकसद उपभोक्ताओं को सही और सटीक जानकारी उपलब्ध कराना है।
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