2 टीचरों ने फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाकर की 12 साल सरकारी नौकरी, एक गिरफ्तार दूसरा फरार

Ashish Bhardwaj | Jun 04, 2026, 20:20 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान के झालावाड़ में 12 साल से फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने एक अध्यापक को गिरफ्तार कर लिया है जबकि दूसरा फरार है।

News In Short

  • राजस्थान में फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट के जरिए सरकारी नौकरी पाने का खुलासा हुआ।
  • झलावाड़ पुलिस ने 12 साल से वरिष्ठ अध्यापक बनेसिंह को गिरफ्तार किया।
  • मेडिकल जांच में दिव्यांगता 6 प्रतिशत पाई गई, जबकि नियम अनुसार 40 प्रतिशत होना चाहिए।
  • मामले का दूसरा आरोपी योगेश कुमार फिलहाल फरार है और पुलिस उसकी तलाश में है।
  • पुलिस पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रही है और अन्य गिरफ्तारियों की संभावना है।

News In Detail

राजस्थान में सरकारी नौकरियों में दिव्यांगता कोटे का गलत इस्तेमाल करने का एक बड़ा मामला सामने आया है। झालावाड़ पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए 12 साल से वरिष्ठ अध्यापक बनेसिंह को गिरफ्तार किया है। यह शिक्षक वर्तमान में बकानी ब्लॉक के स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल में तैनात था। मामले का दूसरा आरोपी योगेश कुमार फिलहाल फरार है।



यह खुलासा ऐसे समय हुआ जब पुलिस को लंबे समय से गोपनीय शिकायतें मिल रही थीं कि कई लोग फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी सेवाओं में नौकरी हासिल कर रहे हैं।



मेडिकल जांच में फर्जीवाड़े का खुलासा

पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के अनुसार, शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए एसओजी जयपुर की मदद से विशेष जांच शुरू की गई। जांच में शामिल कर्मचारियों का बायोमेट्रिक सत्यापन कराया गया और कोटा मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ चिकित्सकों के बोर्ड से उनकी पुनः मेडिकल जांच करवाई गई।



नियमों के अनुसार दिव्यांगता आरक्षण पाने के लिए व्यक्ति की दिव्यांगता कम से कम 40 प्रतिशत होनी चाहिए। लेकिन मेडिकल बोर्ड ने पाया कि बकानी स्कूल के वरिष्ठ अध्यापक बनेसिंह की दिव्यांगता केवल 6 प्रतिशत थी। वहीं, दूसरे आरोपी शिक्षक योगेश कुमार की दिव्यांगता शून्य प्रतिशत पाई गई। इससे स्पष्ट हो गया कि दोनों ने सरकारी सिस्टम को धोखा देकर नौकरी हासिल की थी।



पुलिस ने दर्ज किया मामला

जालसाजी के इस मामले में कोतवाली थाने में प्रकरण संख्या 307/2026 दर्ज की गई। पुलिस ने नियुक्ति के समय पेश किए गए दस्तावेज़ और चिकित्सा प्रमाण पत्रों का गहन मिलान किया।



मुख्य आरोपी बनेसिंह को 3 जून 2026 को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया। मामले का दूसरा आरोपी योगेश कुमार फिलहाल फरार है। पुलिस की टीमें लगातार दबिश (Raids) दे रही हैं ताकि उसे गिरफ्तार किया जा सके।



जालसाजी के नेटवर्क की गहन जांच

पुलिस का कहना है कि यह केवल शुरुआत है। पूरे नेटवर्क की गहन जांच की जा रही है ताकि पता लगाया जा सके कि फर्जी सर्टिफिकेट बनाने में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों की संभावना जताई जा रही है।



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