वन विभाग की बेशकीमती जमीन साफ, तान दिए आलीशान शोरूम

Mukesh Sharma | Jun 10, 2026, 19:44 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान की राजधानी जयपुर में 200 फीट सड़क निर्माण के लिए डायवर्ट की गई वन भूमि पर रसूखदारों ने कब्जा कर लिया है। कानूनी शर्तों में इस भूमि को ग्रीन बेल्ट के रूप में रखना था, लेकिन अधिकारियों की कारस्तानी से यहां आलीशान कमर्शियल इमारतें खड़ी कर दी गई।

ऐसे समझें पूरा मामला

  • केंद्र सरकार ने दी थी मात्र सड़क बनाने की मंजूरी, ग्रीन बेल्ट उजाड़कर खड़े कर दिए शोरूम।
  • शर्तों के विपरीत अफसरों ने वन भूमि को चुपके से जेडीए और पीडब्ल्यूडी के नाम किया दर्ज।
  • वन विभाग की पक्की दीवार से सटकर खुली शराब की दुकान, अधिकारियों की मिलीभगत उजागर।
  • नाहरगढ़ वन सुरक्षा समिति ने अवैध निर्माणों के लिए केंद्र और मुख्य सचिव को भेजी शिकायत।
  • शिकायत में की गई अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने और एफसीए रद्द करने की मांग।

जयपुर में सरकारी जमीनों को हड़पने और अवैध निर्माण करने का कारनामा नया नहीं है। अफसरों की मिलीभगत से सरकारी जमीन को हड़पने का काम लगातार चला आ रहा है।



इसी कड़ी में जयपुर के जगतपुरा इलाके से पर्यावरण और वन संरक्षण नियमों की धज्जियां उड़ाने वाला एक और जमीन घोटाला सामने आया है।



दरअसल, राजधानी में अपेक्स हॉस्पिटल सर्कल से जगतपुरा आरओबी को जोड़ने वाली 200 फीट सड़क पर बेशकीमती वन भूमि पर अवैध कब्जे हो गए हैं। वन विभाग व जेडीए की मिलीभगत से वन विभाग की बेशकीमती जमीन पर धड़ल्ले से शोरूम, दुकानें और मॉल तान दिए गए हैं।



चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरा खेल स्थानीय वन चौकी और रेंज कार्यालय से महज 50 से 100 मीटर की दूरी पर अधिकारियों की नाक के नीचे चल रहा है।





वन विभाग की जमीन


सड़क के लिए मिली थी वन भूमि

वर्ष 2009 में जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) और वन विभाग की सिफारिश पर पर्यावरण व वन मंत्रालय ने 200 फीट चौड़ी सड़क बनाने के लिए 0.858 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि को डायवर्ट (Forest clearance ) करने की सशर्त मंजूरी दी थी।



शर्त के अनुसार इस 0.858 हेक्टेयर वन भूमि की कानूनी स्थिति कभी नहीं बदली जाएगी। सड़क बनने के बाद भी राजस्व रिकार्ड में उक्त भूमि वन भूमि के रुप में ही दर्ज रहेगी।



इस वन भूमि का उपयोग केवल सड़क और यातायात के लिए होगा। सड़क के दोनों ओर खाली बची जमीन पर सघन वृक्षारोपण किया जाएगा। शर्त के अनुसार उक्त वन ​भूमि का उपयोग अन्य किसी भी काम के लिए नहीं किया जा सकता।



मजेदार बात यह कि शर्त के विपरीत राजस्व रिकॉर्ड में वन भूमि को जेडीए (JDA) और पीडब्यूडी (PWD) के नाम दर्ज कर दिया गया। ऐसा करना वन संरक्षण अधिनियम-1980 की धारा-2 का उल्लंघन है।



इस वन भूमि के रिकार्ड की सुरक्षा की जिम्मेदारी उप-वन संरक्षक वन्यजीव चिड़ियाघर जयपुर की है। लेकिन, वह न तो रिकार्ड की सुरक्षा कर पाए और न ही वन भूमि के उपयोग की शर्तों की पालना की मॉनिटरिंग ही कर पाए।





वन विभाग


वन विभाग की जमीन पर बने गैर-कानूनी शोरुम

वन भूमि को डायवर्ट (Forest clearance ) करने की 15 अप्रेल, 2009 की मंजूरी के अनुसार 0.858 हेक्टेयर वन भूमि का अन्य किसी भी काम में उपयोग नहीं हो सकता। इसके बावजूद सड़क के दोनों ओर गैर-कानूनी रुप से अवैध व्यावसायिक निर्माण हो चुके हैं।



खसरा नंबर-42 की गैर-मुमकिन सड़क की जमीन पर अरोड़ा हुंडई,ओला और रॉयल इनफील्ड शोरूम के आलीशान शोरूम खड़े हैं। अरोड़ा हुन्डई के ऊपर दो मंजिला अवैध निर्माण कार्य भी हो रहा है। इसी खसरे में Ola और Royal Enfield के शोरूम भी नियमों को ठेंगा दिखाकर चलाए जा रहे हैं। इसके साथ ही 10 से 15 अन्य दुकानें भी बन गई हैं।



खसरा नंबर-6 की जमीन की सड़क सीमा पर क्रेजी कॉफी का संचालन हो रहा है। उसके ऊपर बहुमंजिला अवैध कमर्शियल बिल्डिंग बनाई जा रही है। इसके ठीक बगल में Naughtydogs नाम का आलीशान मॉल भी इसी दायरे में आता है।



खसरा नंबर-173 में वन विभाग की पक्की दीवार से सटकर अंग्रेजी व देशी शराब की दुकान खोल दी गई है। उसके ऊपर भी अवैध निर्माण हो रहा है।



खसरा नंबर 41/335 में JDA की मंजूरी आड़ में अज्ञात व्यक्ति ने भारी संख्या में हरे-भरे पेड़ों को काटकर जमीन को समतल कर दिया है और व्यावसायिक निर्माण की तैयारी हो रही है।





अवैध निर्माण


अफसरों की जेबें गर्म, आंखें बंद

नाहरगढ़ वन एवं वन्यजीव सुरक्षा समिति के मंत्री हेमराज मीणा ने स्थानीय वन प्रशासन, जेडीए और पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं।



उन्होंने कहा है कि यह कैसे संभव है कि वन विभाग की रेंज चौकी से महज 50 मीटर की दूरी पर बहुमंजिला इमारतें खड़ी हो जाती हैं और किसी अफसर को भनक तक नहीं लगती?



यह सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट के 1996 के ऐतिहासिक पर्यावरण आदेश और वन संरक्षण अधिनियम की धारा 2 का खुला उल्लंघन है। इसमें स्थानीय अधिकारियों की मूक सहमति और बड़ी मिलीभगत साफ नजर आ रही है।



मीणा ने बताया कि उक्त वन भूमि पर बने हुए सभी अवैध निर्माण तत्काल ध्वस्त किए जाएं और इसकी Forest clearance को रद्ध किया जाए। साथ ही दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त अनुशानात्मक कार्यवाही की जाए।



समिति ने इस संबंध में केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC), पर्यावरण एवं वन मंत्रालय (MoEF) और राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव व वन विभाग सहित अन्य ​अधिकारियों को शिकायत भेजकर कार्रवाई की मांग की है।



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