वनरक्षक भर्ती में बड़ा फर्जीवाड़ा, डमी कैंडिडेट से परीक्षा पास कर नौकरी पाई
News In Short
- वनरक्षक भर्ती परीक्षा-2020 में डमी कैंडिडेट बैठाकर फर्जीवाड़ा।
- SOG जांच में वास्तविक कैंडिडेट से फोटो और हस्ताक्षर मिलान ही नहीं हुए।
- आरोपी विकास बिश्नोई ने नियुक्ति लेकर सरकार से सैलरी भी उठाई।
- SOG की रिपोर्ट के बाद जोधपुर के महामंदिर थाने में मामला दर्ज।
- मामले की जांच एडीसीपी वीरेंद्र सिंह राठौड़ को सौंपी गई है, डमी कैंडिडेट की तलाश जारी।
News In Detail
वनरक्षक सीधी भर्ती परीक्षा-2020 में फर्जीवाड़ा कर सरकारी नौकरी हासिल करने का एक और मामला सामने आया है। एसओजी की जांच में खुलासा हुआ है कि एक युवक ने लिखित परीक्षा में खुद की जगह डमी कैंडिडेट को बैठाकर परीक्षा पास की और बाद में फर्जी डॉक्यूमेंट्स के जरिए नियुक्ति हासिल कर सैलरी भी उठाई।
एसओजी की जांच रिपोर्ट और सिफारिश के आधार पर अब जोधपुर पुलिस कमिश्नरेट के महामंदिर थाने में आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
फोटो और हस्ताक्षर के मिलान में खुली पोल
एसओजी द्वारा कर्मचारी चयन बोर्ड से मिले दस्तावेजों की बारीकी से जांच करने पर इस पूरे फर्जीवाड़े की परतें खुलीं। जांच में सामने आया कि लोहावट थाना क्षेत्र के कालीराना निवासी विकास बिश्नोई ने वनरक्षक भर्ती के लिए आवेदन किया था। 13 नवंबर 2022 को सेंट एनी बीसेंट स्कूल स्थित परीक्षा केंद्र पर परीक्षा आयोजित हुई थी।
एसओजी ने जब परीक्षा केंद्र के रिकॉर्ड में मौजूद उपस्थिति पत्रक और आवेदन में लगी मूल अभ्यर्थी की फोटो व हस्ताक्षर का क्रॉस-वेरिफिकेशन किया तो दोनों आपस में बिल्कुल भी मेल नहीं खा रहे थे। इससे यह स्पष्ट हो गया कि विकास बिश्नोई की जगह परीक्षा केंद्र पर किसी अन्य व्यक्ति ने लिखित परीक्षा दी थी।
शारीरिक परीक्षा और दस्तावेजों में भी फर्जीवाड़ा
डमी कैंडिडेट के जरिए लिखित परीक्षा पास करने के बाद आरोपी विकास बिश्नोई ने 3 और 4 मई 2023 को आयोजित शारीरिक दक्षता परीक्षा में भी हिस्सा लिया और उसे पास कर लिया। एसओजी की जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि शारीरिक दक्षता परीक्षा और अंतिम चयन प्रक्रिया के दौरान पेश किए गए दस्तावेजों में बड़े स्तर पर कांट-छांट कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए थे।
इन्हीं जाली दस्तावेजों के आधार पर आरोपी ने विभाग को गुमराह कर वनरक्षक के पद पर नियुक्ति प्राप्त कर ली और सरकार से नियमित रूप से वेतन भी उठाता रहा।
थाने में मामला दर्ज, जांच शुरू
पुख्ता सबूत मिलने और फर्जीवाड़े की पुष्टि होने के बाद एसओजी के डीआईजी परिस अनिल देशमुख ने जोधपुर पुलिस कमिश्नर कार्यालय को एक परिवाद भेजा। जांच रिपोर्ट के आधार पर महामंदिर थाना पुलिस ने आरोपी विकास बिश्नोई और इस साजिश में शामिल उसके अन्य सहयोगियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
आरोपियों के खिलाफ पहचान बदलकर धोखाधड़ी करने, फर्जी दस्तावेज तैयार कर उन्हें असली के रूप में इस्तेमाल करने, आपराधिक साजिश रचने और राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम के कड़े प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
एडीसीपी को जांच सौंपी गई
पुलिस के अनुसार अब इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच एडीसीपी (पूर्व) वीरेंद्र सिंह राठौड़ को सौंपी गई है। पुलिस अब डमी कैंडिडेट और इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है। फिलहाल पुलिस जल्द से जल्द सभी आरोपियों को गिरफ्तार करने की कवायद में जुटी है।
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