पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल को एक और झटका, याचिका पर सुनवाई से जज का इनकार
News In Short
- पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल की याचिका पर जज का सुनवाई से इनकार।
- सुबोध अग्रवाल चर्चित जल जीवन मिशन घोटाले में हैं मुख्य आरोपी।
- पूर्व आईएएस ने एफआईआर रद्द करने के लिए दायर की है याचिका।
- अब हाई कोर्ट की अन्य बैंच में सुबोध की याचिका पर होगी सुनवाई।
- सुबोध अग्रवाल के खिलाफ कोर्ट से जारी हो चुके हैं गिरफ्तारी वारंट।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान के चर्चित जल जीवन मिशन घोटाले में एक नया मोड़ आया है। हाई कोर्ट के जस्टिस अनिल कुमार उपमन ने इस घोटाले के आरोपी पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल की आपराधिक याचिका पर सुनवाई करने से खुद को अलग कर लिया। अब यह मामला किसी अन्य बैंच के समक्ष लिस्टेड किया जाएगा।
सुनवाई से हटने का निर्देश
सुनवाई के दौरान जस्टिस उपमन ने सुबोध अग्रवाल और 10 अन्य आरोपियों की याचिका पर विचार करने से मना कर दिया। उन्होंने कहा है कि इस मामले को किसी अन्य बेंच के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए, जिससे सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ सके। हालांकि, जज के सुनवाई से हटने का विशिष्ट कारण स्पष्ट नहीं किया गया है।
क्या है सुबोध अग्रवाल की मांग?
रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल ने अपनी आपराधिक याचिका के माध्यम से एसीबी की ओर से उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की है। एसीबी ने उनके खिलाफ यह एफआईआर 30 अक्टूबर, 2024 को दर्ज की थी। अग्रवाल का पक्ष है कि यह मामला कानूनी आधार पर टिकने योग्य नहीं है, इसलिए इसे निरस्त किया जाना चाहिए।
अन्य आरोपियों को मिली राहत बरकरार
मामले से जुड़े अधिवक्ता सुधीर जैन ने कोर्ट को जानकारी दी कि हाई कोर्ट ने पूर्व में 29 जनवरी को एक आदेश जारी किया था। इस आदेश के तहत पांच अन्य आरोपियों के खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी गई थी। इन आरोपियों में पदमचंद जैन, महेश मित्तल, रामकिशन मीणा, रमेश मीणा और परितोष गुप्ता शामिल हैं। अधिवक्ता ने बताया कि इन आरोपियों के संदर्भ में हाई कोर्ट द्वारा लगाई गई यह रोक अभी भी जारी है। हालांकि, सुबोध अग्रवाल और अन्य याचिकाओं पर सुनवाई न होने के कारण उनकी स्थिति फिलहाल अधर में लटकी हुई है।
घोटाले की पृष्ठभूमि
जल जीवन मिशन घोटाला राजस्थान के सबसे बड़े प्रशासनिक और वित्तीय घोटालों में से एक माना जा रहा है। इसमें पेयजल परियोजनाओं के आवंटन और कार्यान्वयन में भारी अनियमितताओं और रिश्वतखोरी के आरोप लगे हैं। सुबोध अग्रवाल उस समय जलदाय विभाग के एसीएस थे। अब वे एसीबी की जांच के घेरे में हैं।
एसीबी कर रही सुबोध की तलाश
पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल की तलाश के लिए एसीबी की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं, लेकिन वे किसी शातिर अपराधी की तरह बार-बार चकमा दे रहे हैं। गिरफ्तारी से बचने के लिए सुबोध ने अब तक 60 से अधिक वाहनों का इस्तेमाल किया है। इसमें पुलिस को चकमा देने के लिए सबसे ज्यादा सहारा ऑटो रिक्शा का लिया गया।
सूत्रों के मुताबिक उन्होंने अपनी यात्रा के दौरान करीब 40 से अधिक ऑटो रिक्शा बदले। चूंकि उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी हो चुका है, इसलिए वे हवाई यात्रा नहीं कर सकते। रेलवे स्टेशनों और बस स्टैंडों पर एसीबी की पैनी नजर होने के कारण सुबोध अग्रवाल ने सड़क मार्ग से छोटे वाहनों के जरिए ठिकाने बदलना शुरू किया।
फार्म हाउस में छिपने की जानकारी
हाल ही में उनके हरियाणा के सोहना में एक उद्योगपति के फार्म हाउस पर छिपे होने की सूचना मिली थी। एसीबी की टीम ने जब वहां घेराबंदी की, तो भनक लगते ही अग्रवाल वहां से एक ऑटो में बैठकर रफूचक्कर हो गए। इसके बाद से जाँच एजेंसियों के पास उनका कोई पुख्ता सुराग नहीं है। इससे पहले एसीबी सुबोध की तलाश के लिए बॉलीवुड स्टार सलमान खान के पनवेल फार्म हाउस भी पहुंच चुकी है।
अब संपत्ति कुर्की की तैयारी
फरार आरोपियों पर नकेल कसने के लिए अब कानूनी शिकंजा कड़ा कर दिया गया है। एसीबी कोर्ट संख्या-1 ने सुबोध अग्रवाल समेत अधिशाषी अभियंता जितेंद्र शर्मा, निजी व्यक्ति संजीव गुप्ता और तत्कालीन एससी मुकेश गोयल के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिए हैं।
एसीबी अधिकारियों का कहना है कि यदि इन वारंटों की तामील समय पर नहीं होती है और आरोपी आत्मसमर्पण नहीं करते हैं, तो अदालत के माध्यम से उनकी संपत्ति कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। प्रशासन अब उनकी चल-अचल संपत्तियों का ब्यौरा जुटा रहा है।
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