चिकित्सा मंत्री फिर विवाद में आए, बोले-आप पता करो, महिलाएं चलते आईं या नाचते

Jageshwar prasad | Jun 12, 2026, 20:11 IST
राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर
राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के बोल बिगड़ गए। प्रसूताओं के इलाज में लापरवाही को लेकर पूछे गए सवालों पर मंत्री झल्ला गए। उन्होंने कहा कि आप पता करो, बीमार महिलाएं चलते हुए आई थीं या नाचते हुए।

समझें क्या है पूरा मामला

  • राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर बीकानेर दौरे पर गए थे।
  • बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में प्रसूताओं में किडनी इंफेक्शन की शिकायत मिली थी।
  • खींवसर ने हालातों का जायजा लेने के लिए पीबीएम अस्पताल का दौरा किया।
  • इस दौरान मीडिया के सवालों पर चिकित्सा मंत्री खींवसर आपा खो बैठे।
  • खींवसर ने जवाब दिया, आप पता करो, महिलाएं चलते हुए आई थीं या नाचते हुए?

राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर फिर एक नए विवाद में घिर गए हैं। पीबीएम अस्पताल के दौरे के समय जब पत्रकारों ने प्रसूताओं के इलाज में बरती लापरवाही को लेकर सवाल पूछे तो वे अपना आपा खो बैठे।



दरअसल, मामला बीकानेर के पीबीएम हॉस्पिटल में प्रसूताओं में किडनी इंफेक्शन फैलने


से जुड़ा है। कोटा के बाद बीकानेर में भी प्रसूताओं में किडनी फेल के मामले सामने आए थे। अस्पताल में स्थिति का जायजा लेने के लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री खींवसर बीकानेर पहुंचे थे।



​पत्रकारों के सवालों पर झल्लाए मंत्री

पत्रकारों के तीखे सवालों से झल्लाए मंत्री ने तल्ख लहजे में जवाब दिया, आप पता करो, बीमार महिलाएं चलते हुए आई थीं या नाचते हुए? मंत्री के इस बयान के बाद वहां मौजूद लोग और मीडियाकर्मी हैरान रह गए।



प्रसूताओं में किडनी इंफेक्शन के पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच अभी चल ही रही है, लेकिन चिकित्सा मंत्री ने जांच रिपोर्ट आने से पहले ही अस्पताल प्रशासन को क्लीन चिट देने जैसी कोशिश की।



उन्होंने इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही से साफ इनकार करते हुए पीबीएम अस्पताल प्रबंधन का खुलकर बचाव किया। मंत्री ने कहा कि वे जांच से पहले किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहते, लेकिन शुरुआती नजर में वे डॉक्टरों और प्रशासन के प्रयासों से संतुष्ट दिखे।



​दवाओं की भूमिका की होगी जांच

चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसरने यह स्वीकार किया कि यदि दवाओं के कारण मरीजों की स्थिति बिगड़ने की आशंका है तो इसकी गंभीरता से जांच कराई जा रही है।



उन्होंने बताया कि प्राथमिक स्तर पर अस्पताल में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की गुणवत्ता को जांचने के लिए 27 विभिन्न प्रकार की दवाओं के नमूने (सैंपल्स) लिए गए हैं। इन सैंपल्स को लेबोरेटरी में जांच के लिए भेजा गया है।



उन्होंने कहा कि इन दवाओं की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकेगा और यदि दवाइयों में कोई कमी पाई गई, तो संबंधित दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।



​कोटा एपिसोड का जिक्र और तकनीकी कमियां

मंत्री ने कहा कि वे चिकित्सा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, मैंने पहले भी कहा था कि कोटा जैसा एपिसोड यहां स्वीकार नहीं किया जाएगा।



हालांकि, अस्पताल की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही थी। कुछ समय पहले भी बीकानेर के इसी पीबीएम अस्पताल में मरीजों को कैनुला और अन्य जरूरी चिकित्सा सामग्री न मिलने की शिकायतें आई थीं। इस पर मंत्री को अचानक आकर निरीक्षण करना पड़ा था। उस समय भी उन्होंने लापरवाही मिलने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी थी।



​समीक्षा बैठक और आगामी निर्देश

तल्ख टिप्पणियों के बाद चिकित्सा मंत्री ने अस्पताल के उच्च अधिकारियों, डॉक्टरों और प्रशासनिक अमले के साथ लंबी समीक्षा बैठक की।



इस बैठक में उन्होंने अस्पताल में संक्रमण फैलने के कारणों, वर्तमान में भर्ती प्रसूताओं के स्वास्थ्य की स्थिति और उन्हें दिए जा रहे इलाज की विस्तृत जानकारी ली।



मंत्री ने निर्देश दिए कि हर हाल में अस्पताल के भीतर चिकित्सा मानकों का कड़ाई से पालन होना चाहिए, जिससे सरकारी अस्पतालों पर आम जनता का भरोसा बना रहे।



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