राजस्थान के राज्य पक्षी की संख्या 94 हुई, 3 नए चूजों का जन्म
समझें क्या है पूरा मामला
- जैसलमेर में कृत्रिम गर्भाधान से गोडावण का जन्म, संख्या 94 हुई।
- तीन नए गोडावणों में दो आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन से पैदा हुए।
- रामदेवरा में 6.25 करोड़ से 64 मीटर लंबी सुरंग बन रही है।
- दो ब्रीडिंग सेंटरों में वैज्ञानिक तरीके से चूजों का पालन-पोषण हो रहा है।
- प्रजनन सीजन जारी, आने वाले समय में संख्या और बढ़ने की उम्मीद।
राजस्थान के राज्य पक्षी और विलुप्तप्राय गोडावण (Great Indian Bustard) के संरक्षण में एक और बड़ी सफलता मिली है। जैसलमेर के ब्रीडिंग सेंटरों में तीन नए चूजों के जन्म के साथ ही दोनों केंद्रों में कुल गोडावण की संख्या बढ़कर 94 हो गई है।
इनमें से दो चूजे कृत्रिम गर्भाधान यानी आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन (Artificial Insemination) के जरिए पैदा हुए हैं और एक जंगल से सुरक्षित लाए गए अंडे से।
प्रजनन सीजन अभी जारी है इसलिए संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। इसके साथ ही रामदेवरा में करीब 9 करोड़ रुपए की लागत से 160 मीटर लंबी विशेष ट्रेनिंग टनल बनाई जा रही है जो गोडावण को जंगल में छोड़ने से पहले तैयार करेगी।
2018 से चल रही है विशेष मुहिम
साल 2018 में भारत सरकार और राजस्थान वन विभाग ने गोडावण के लिए कैप्टिव ब्रीडिंग कार्यक्रम (Captive Breeding Programme) शुरू किया था। तब से लेकर अब तक वर्ष 2026 में 26 चूजे जन्म ले चुके हैं।
इनमें से 18 कृत्रिम गर्भाधान से, 4 प्राकृतिक प्रजनन से और 4 जंगल से लाए गए अंडों से पैदा हुए हैं। हाल ही में 3 और नए चूजों का जन्म हुआ जिससे दोनों ब्रीडिंग सेंटरों में कुल संख्या 94 तक पहुंच गई।
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस सफलता पर खुशी जताई है।
दो ब्रीडिंग सेंटरों में चौबीसों घंटे निगरानी
डेजर्ट नेशनल पार्क के डीएफओ (Divisional Forest Officer) बृजमोहन गुप्ता ने बताया कि जैसलमेर जिले में वन विभाग और जीआईबी (GIB - Great Indian Bustard) प्रोजेक्ट के तहत दो ब्रीडिंग सेंटर संचालित हैं। पहला सम के सुदासरी में और दूसरा रामदेवरा में।
इन केंद्रों में विशेषज्ञों की टीम चौबीसों घंटे निगरानी कर वैज्ञानिक तरीके से चूजों का पालन-पोषण करती है। प्राकृतिक प्रजनन के साथ-साथ जंगल से सुरक्षित लाए गए अंडों का भी संरक्षण किया जाता है।
जंगल से अंडे लाना क्यों जरूरी है?
जंगल से अंडे लाने का सबसे बड़ा फायदा गोडावण की आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity) को मजबूत बनाना है। इससे नई पीढ़ी के पक्षी अधिक स्वस्थ होते हैं और पर्यावरण के अनुसार खुद को ढालने में सक्षम बनते हैं।
जंगल में शिकारियों और जंगली जानवरों से अंडों को खतरा रहता है। ब्रीडिंग सेंटर में लाकर इस खतरे को खत्म किया जाता है।
9 करोड़ की टनल, उड़ान की ट्रेनिंग
गोडावण को ब्रीडिंग सेंटर से सीधे जंगल में छोड़ना खतरनाक हो सकता है। इसलिए रामदेवरा में एक विशेष गोडावण ट्रेनिंग टनल बनाई जा रही है। यह टनल 160 मीटर लंबी और 64 मीटर चौड़ी होगी। इसे जैसलमेर के रेगिस्तानी प्राकृतिक आवास की तर्ज पर विकसित किया जाएगा।
इस सेमी-वाइल्ड (Semi-Wild) माहौल में गोडावण को चार महीने रखा जाएगा। इस दौरान उन्हें प्राकृतिक तरीके से उड़ना, खुद भोजन ढूंढना और शिकारियों से बचाव, ये तीनों हुनर सिखाए जाएंगे। इससे जंगल में छोड़ने के बाद उनके जीवित रहने की संभावना काफी बढ़ जाएगी।
उम्मीदें मजबूत, लेकिन चुनौती बरकरार
डीएफओ बृजमोहन गुप्ता ने कहा कि लगातार मिल रही सफलताओं से गोडावण के भविष्य को लेकर उम्मीदें मजबूत हुई हैं। प्रजनन सीजन अभी जारी है और कुछ अन्य अंडों से भी चूजे निकलने की संभावना है।
ग्रेट इंडियन बस्टर्डएक बार में सिर्फ एक अंडा देता है। पहले इनकी तादाद हजारों में थी, लेकिन बिजली की हाई-टेंशन लाइनों से टकराने, शिकार और निवास स्थान के नष्ट होने से संख्या में भारी गिरावट आई। अब ब्रीडिंग सेंटर की यह कामयाबी उम्मीद की नई किरण है।
FAQ
- गोडावण क्या है और यह इतना दुर्लभ क्यों है?
गोडावण (Great Indian Bustard) राजस्थान का राज्य पक्षी है जो थार मरुस्थल में पाया जाता है। यह IUCN की गंभीर रूप से संकटग्रस्त (Critically Endangered) प्रजातियों में शामिल है। हाई-टेंशन बिजली लाइनों से टकराने, शिकार और आवास नष्ट होने से इसकी संख्या में भारी गिरावट आई है। - जैसलमेर में कृत्रिम गर्भाधान से गोडावण कैसे पैदा होता है?
विशेषज्ञों की टीम आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन के जरिए ब्रीडिंग सेंटर में गोडावण के अंडों का निषेचन करती है। अंडों को इनक्यूबेटर में रखकर चूजों को जन्म दिया जाता है। 2026 में 18 चूजे इसी तकनीक से पैदा हुए हैं।
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