गोडावण चूजे ने पूरे किए 40 दिन, प्रोजेक्ट जंपस्टार्ट की दूसरी कोशिश सफल

Jageshwar prasad | Jul 12, 2026, 16:03 IST
कच्छ में गोडावण संरक्षण, जैसलमेर से लाए अंडे से पैदा हुआ चूजा
गुजरात के कच्छ में 21 मई 2026 को जन्मे दूसरे गोडावण चूजे ने अहम 40 दिन पूरे कर लिए हैं। राजस्थान के जैसलमेर से लाए गए एक पोषित अंडे को अनफर्टाइल अंडे से बदला गया था।

समझें क्या है पूरा मामला

  • गुजरात के कच्छ में गोडावण संरक्षण को बड़ी सफलता।
  • प्रोजेक्ट जंपस्टार्ट की दूसरी हुई कोशिश सफल।
  • पहला चूजा गायब हुआ, दूसरे ने क्रिटिकल 40 दिन पार किए।
  • जैसलमेर से कच्छ लाया गया था का एक फर्टाइल अंडा।
  • कच्छ में सिर्फ 3 माद थीं, अब नई पीढ़ी को मिला जीवन।

हाल ही में तमिलनाडु के कोयंबटूर में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति की 91वीं बैठक हुई। जिसमें केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादवने बताया कि गुजरात के कच्छ जिले में प्रोजेक्ट जंपस्टार्ट चलाया जा रहा है।



इसके तहत पैदा हुए ग्रेट इंडियन बस्टर्ड यानी गोडावण के दूसरे चूजे ने जिंदा रहने के लिए जरूरी अवधि सफलतापूर्वक पार कर ली है। 21 मई 2026 को पैदा हुआ यह चूजा अब लगभग 40 दिनों तक जीवित रहने के अहम पड़ाव को पार कर चुका है।



यह राजस्थान के जैसलमेर से लाए गए अंडे और कच्छ की एक पालक मादा गोडावण की देखरेख में हुआ। यह सफलता उस घटना के लगभग तीन महीने बाद मिली है जब इसी तकनीक से पैदा हुआ पहला चूजा अप्रैल में लापता हो गया था।



770 किमी का अंडे का सफर

21 मार्च 2026 को जैसलमेर के सम स्थित गोडावण ब्रीडिंग सेंटर से एक फर्टाइल अंडा चुना गया। इसे अत्याधुनिक पोर्टेबल इनक्यूबेटर में सुरक्षित रखते हुए लगभग 770 किलोमीटर दूर गुजरात के कच्छ जिले के नलिया क्षेत्र तक पहुंचाया गया। यह यात्रा करीब 19 घंटे में बिना रुके पूरी की गई।



21 मार्च को राजस्थान से लाया गया यह अंडा उस मादा गोडावण के घोंसले में रखा गया जो दूसरे अंडे सेने के लिए तैयार थी। 26 मार्च 2026 को इस अंडे से पहला चूजा बाहर निकला।



पहला चूजा लापता, दूसरे ने दी राहत

चूजे के जन्म को संरक्षण की बड़ी सफलता माना गया। चूजे की सुरक्षा के लिए 50 सदस्यीय टीम तैनात की गई। लेकिन 18 अप्रैल के बाद से चूजा अपनी जीपीएस टैग लगी मां के साथ दिखाई नहीं दिया। आशंका है कि सुरक्षा घेरे में कुछ कमजोर बिंदुओं से किसी शिकारी जानवर ने अंदर घुसकर इस नन्हे चूजे का शिकार कर लिया था।



इस झटके ने हताश तो किया लेकिन वैज्ञानिकों ने दूसरी बार भी वही प्रक्रिया अपनाई। 21 मई 2026 को दूसरा चूजा पैदा हुआ और अब यह 40 दिन की महत्वपूर्ण अवधि पार कर चुका है।



कच्छ में क्यों जरूरी था यह प्रयोग?

गुजरात के कच्छ इलाके में अब सिर्फ तीन मादा गोडावण ही बची हैं। नर पक्षियों के खत्म हो जाने के कारण प्राकृतिक तरीके से अंडा बनने की संभावना लगभग खत्म हो चुकी है।



यही कारण था कि राजस्थान के प्रजनन केंद्र से फर्टाइल अंडा लाकर कच्छ की मादा के घोंसले में रखा गया। इस क्रॉस-फोस्टरिंग या सरोगेसी तकनीक को ही जंपस्टार्ट अप्रोच कहा गया और इस प्रोजेक्ट को जंपस्टार्ट नाम मिला।



राजस्थान के केंद्रों में 98 गोडावण

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने जानकारी दी कि प्रोजेक्ट गोडावण की परिकल्पना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2011 में की थी, जिसे 2016 में औपचारिक रूप से शुरू किया गया।



इस परियोजना के तहत राजस्थान के सम और रामदेवरा स्थित केंद्रों में गोडावण का संरक्षण और प्रजनन किया जा रहा है। वर्तमान में इन संरक्षण प्रजनन केंद्रों में गोडावण की कुल संख्या 98 हो गई है।



गोडावण का संकट

गोडावण भारत की सबसे संकटग्रस्त पक्षी प्रजातियों में से एक है। यह IUCN की लिस्ट में क्रिटिकली एंडेंजर्ड है। हाईटेंशन बिजली लाइनों से टकराव, अवैध शिकार और प्राकृतिक खतरों के चलते यह प्रजाति तेजी से विलुप्ति की ओर बढ़ रही है।



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