महात्मा गांधी के पोते गोपालकृष्ण गांधी बोले, भारत-पाक विभाजन बड़ी त्रासदी

Mukesh Sharma | Jan 16, 2026, 12:26 IST
Photograph: (the sootr)
महात्मा गांधी के पोते गोपाल कृष्ण गांधी ने जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में नफरत, गुस्से और बदले की बढ़ती भावना पर चिंता जताई, साथ ही माफी और क्षमा की अहमियत पर भी जोर दिया।

News In Short

  • महात्मा गांधी के पोते गोपाल कृष्ण गांधी ने जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में अपने विचार व्यक्त किए।
  • उन्होंने नफरत, गुस्से और बदले की बढ़ती भावना पर चिंता जताई।
  • गांधी ने माफी और क्षमा की अहमियत को बताया और इसे नैतिक शक्ति का प्रमाण माना।
  • भारतीय प्रशासनिक सेवा के अनुभवों को साझा करते हुए गांधी ने कहा कि प्रशासन केवल नियमों से नहीं चलता।
  • गांधी ने भारत-पाकिस्तान संबंधों और विभाजन को लेकर भी अपनी राय दी, इसे एक बड़ी त्रासदी बताया।

News In Detail

महात्मा गांधी के पोते और पूर्व राज्यपाल गोपाल कृष्ण गांधी ने जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में श्रोताओं से बातचीत की है। इसमें उन्होंने नफरत और गुस्से की बढ़ती भावना पर चिंता जताई। गांधी ने माफी और क्षमा की भावना को महत्वपूर्ण बताया है। उन्होने कहा कि ‘प्लीज’, ‘थैंक यू’ और ‘सॉरी’ जैसे सरल शब्द सबसे मुश्किल है। इसे नैतिक शक्ति का प्रतीक माना। उन्होंने प्रशासनिक जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि प्रशासन केवल नियमों से नहीं चलता, इसके लिए साहस और नैतिकता की आवश्यकता होती है।



महात्मा गांधी के पोते गोपाल कृष्ण गांधी की चिंता

महात्मा गांधी के पोते तथा पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल व पूर्व आईएएस गोपाल कृष्ण गांधी ने इतिहास को बदले और पीड़ित होने की नई कथाएं गढ़ने के औजार के रूप में इस्तेमाल किए जाने पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि आज ‘क्षमा’ सबसे दुर्लभ भावना बन चुकी है। अशोक, विली ब्रांट और ऑस्ट्रेलिया के उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि माफी कमजोरी नहीं, बल्कि नैतिक शक्ति का प्रमाण है। नई पीढ़ी को क्षमा करने की भावना विकसित करनी होगी। गांधी गुरुवार को जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के फ्रंट लॉन में आयोजित सत्र ‘दी अनडाइंग लाइट: इंडियाज फ्यूचर्स’ सत्र में बोल रहे थे। इस सत्र का संचालजन पत्रकार व लेखिका नारायणी बासु ने किया।



नफरत और गुस्से का बढ़ता दौर

भारत के वर्तमान हालात पर गांधी ने कहा कि आज गुस्सा,बदला और टकराव प्रमुख भावनाएं बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि आज से 30—40 पहले तक अखबारों में स्लैम शब्द दिखता ही नहीं था लेकिन,वर्तमान दौर में अखबारों में स्लैम शब्द आम हो गया है। उन्होंने कहा कि नफरत और बदले की भावना अंतहीन है और यह समाज को भीतर से खोखला कर देती है।



प्लीज,सॉरी और थैंक्स मुश्किल लेकिन जरुरी

उन्होंने कहा कि आत्म-ईमानदारी बहुत मुश्किल होती है और प्लीज,थैंक यू और सॉरी जैसे सरल शब्द सबसे मुश्किल लेकिन,जीवन में बेहद जरुरी हैं। विशेषकर तब जब सामने अपना कोई करीबी हो। गांधी ने कहा कि सच्ची माफी और क्षमा व्यक्ति को भीतर से ठीक करती है।



सिर्फ नियमों से नहीं चलता प्रशासन

गोपालकृष्ण गांधी के प्रशासनिक जीवन के अनुभवों पर बाते करते हुए कहा कि प्रशासन केवल नियमों से नहीं चलता बल्कि,इसके लिए गलत को गलत कहने का साहस चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रशासनिक सेवा उनके जीवन का महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण दौर रहा। उन्होंने अपने सिविल सेवा के इंटरव्यू का एक प्रसंग बताते हुए कहा कि यह सेवा व्यक्ति को नैतिक दृढ़ता सिखाती है।



नफरत और गुस्से का बढ़ता दौर

भारत के वर्तमान हालात पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि आज गुस्सा, बदला और टकराव प्रमुख भावनाएं बन चुकी हैं। अखबारों में ‘स्लैम’ शब्द आम हो गया हैं, जो 30-40 साल पहले इतने प्रचलित नहीं थे। नफरत और बदले की भावना अंतहीन होती है और समाज को भीतर से खोखला करती है।



टी.एन.शेषन को किया याद

गांधी ने इस दौरान पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन को भी याद किया और कहा कि उन्होंने चुनाव आयोग को देश की एक सशक्त संस्था बनाया। हालांकि व्यक्तिगत तौर पर वह कठिन स्वभाव के थे क्योकिं, सत्ता और पद कभी-कभी व्यक्ति को कठोर बना देते हैं। लेकिन सच्ची आलोचना के सामने सबसे शक्तिशाली व्यक्ति भी पिघल सकता है।



कलाकार मंच पर छुपा लेते हैं अपना दर्द

सत्र में सार्वजनिक जीवन में मिले महान व्यक्तित्वों को भी याद करते हुए उन्होंने कहा कि एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी केवल महान गायिका ही नहीं, बल्कि अत्यंत संवेदनशील इंसान भी थीं। उनका संगीत श्रोताओं को भीतर तक छू जाता था। उन्होंने कहा कि कलाकार अपने दुःख और संघर्षों को पीछे छोड़कर मंच पर अपना सर्वश्रेष्ठ देते हैं, जिसे दर्शक नहीं देख पाते।



विभाजन सबसे बड़ी त्रासदी

भारत-पाकिस्तान संबंधों पर उन्होंने कहा कि तमाम तनावों के बावजूद दोनों देश हर साल परमाणु प्रतिष्ठानों और कैदियों की सूची साझा करते हैं। यह उम्मीद की एक किरण है। उन्होंने चेताया कि नफरत और पूर्वाग्रह की आग को हवा देना भविष्य की पीढ़ियों के लिए खतरनाक होगा। भारत का विभाजन अब तक की सबसे बड़ी त्रासदी थी। उन्होंने कहा कि देश विभाजन केवल मानवीय विभाजन नहीं था बल्कि प्रकृति का भी विभाजन था जिसने नदियों तथा रेगिस्तान तक को बांट दिया।



खेल हमें मानवता व विनम्रता सिखाते हैं

गांधी ने ओलंपिक विजेता नीरज चोपड़ा की मां और शतरंज खिलाड़ी गुकेश के उदाहरण देकर कहा कि खेल हमें मानवता और विनम्रता सिखाते हैं। उन्होंने कहा भारत की रोशनी मंद जरूर है लेकिन बुझी नहीं है।



मुख्य बिंदू :

  • महात्मा गांधी के पोते गोपालकृष्ण गांधी ने समाज में बढ़ती नफरत, गुस्से और बदले की भावना पर चिंता जताई, जो समाज को भीतर से खोखला कर देती है।
  • गांधी ने कहा कि माफी कमजोरी नहीं, बल्कि नैतिक शक्ति का प्रमाण है, और नई पीढ़ी को क्षमा की भावना विकसित करनी चाहिए।
  • गांधी ने विभाजन को सबसे बड़ी त्रासदी बताया और कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनावों के बावजूद दोनों देशों के बीच परमाणु प्रतिष्ठानों और कैदियों की सूची साझा करना एक सकारात्मक कदम है।

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