प्यार में ब्रेकअप और फोन ब्लॉक करना आत्महत्या का उकसावा नहीं-हाईकोर्ट
समझें क्या है पूरा मामला
- प्रत्यक्ष उकसावे की आवश्यकता,आपराधिक मंशा और तत्काल कदम साबित करना जरुरी।
- व्यक्तिगत संवेदनशीलता और कानून,अत्यधिक प्रतिक्रिया के आधार पर आपराधिक दायित्व नहीं।
- रिश्ता खत्म होने और नंबर ब्लॉक करने पर युवती ने की आत्महत्या।
- हाईकोर्ट ने कहा उकसावे के सबूत नहीं,आरोपी की जमानत याचिका स्वीकार।
राजस्थान हाईकोर्ट ने आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में टूटे हुए रिश्ते के कारण होने वाले मानसिक तनाव और आपराधिक कानून के तहत आपराधिक उकसावे के बीच एक महत्वपूर्ण कानूनी अंतर स्पष्ट किया है।
कोर्ट ने कहा है कि आत्महत्या के लिए उकसावे का अपराध साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष को आरोपी के किसी प्रत्यक्ष,सक्रिय और तत्काल उकसावे वाले कार्य को साबित करना होता है व जिसमें आपराधिक मंशा भी शामिल हो।
आरोप के आधार पर नहीं मानते उकसावा
जस्टिस फरजंद अजी ने याचिकाकर्ता दिनेश मेहरा की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए कहा है कि सिर्फ आरोपों के आधार पर उकसावे की कानूनी जरुरी तत्व को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
मानवीय व्यवहार में व्यक्तिगत संवेदनशीलता अलग-अलग होती है। लेकिन आपराधिक कानून किसी व्यक्ति को केवल इसलिए अपराधी नहीं ठहरा सकता क्योंकि पीड़ित ने किसी गैर-आपराधिक कदम पर अत्यधिक गंभीर प्रतिक्रिया दी हो। आपराधिक जिम्मेदारी केवल कानूनन अपराध की कैटेगरी में आने वाले व्यवहार पर ही तय की जा सकती है।
यह है मामला
एडवोकेट विभूतिभूषण शर्मा ने बताया कि मृतका और आरोपी पूर्व में एक-दूसरे के साथ रिश्ते में थे। लेकिन घटना से कुछ समय पहले उनके बीच बातचीत बंद हो गई थी। याचिकाकर्ता ने मृतका के नंबर ब्लॉक कर दिए थे। मृतका के आत्महत्या से पहले बनाए गए वीडियो में याचिकाकर्ता पर संबंध खत्म करने और दूसरी महिला से संबंध बनाने के आरोप लगाते हुए उसे अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराया गया था।
फोन ब्लॉक करना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं
कोर्ट ने कहा कि मृतका की अत्यधिक संवेदनशीलता और निराशा उसकी मानसिक स्थिति को तो स्पष्ट करती है। लेकिन, केवल फोन नंबर ब्लॉक कर देना या संबंध समाप्त कर लेना कानून की नज़र में आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध नहीं बन जाता। रिकॉर्ड के अनुसार भी घटना से ठीक पहले आरोपी द्वारा उकसाने का कोई प्रत्यक्ष काम करना नहीं पाया गया है। बल्कि आरोपी बातचीत बंद कर चुका था और मृतका स्वयं उससे संपर्क करने का प्रयास कर रही थी।
वीडियो में मृतका के लगाए गए आरोपों का मूल्यांकन ट्रायल में होगा। ट्रायल पूरा होने में लंबा समय लग सकता है और आरोपी को हिरासत में रखने का प्रथम दृष्टया कोई आधार नहीं है। कोर्ट ने मामले मे आरोपी को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं।
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