एक ही समय में दो जगह कैसे मौजूद रहा कांस्टेबल, कोर्ट ने पकड़ी पुलिस की लापरवाही

Mukesh Sharma | Jul 17, 2026, 19:02 IST
एनडीपीएस मामले
राजस्थान हाई कोर्ट ने एनडीपीएस मामले में पुलिस की गंभीर लापरवाही पकड़ी है। कोर्ट ने पाया कि एक कांस्टेबल एक ही समय पर दो अलग-अलग जगहों पर कार्रवाई में शामिल था। कोर्ट ने डीजीपी को इस फर्जीवाड़े की स्वतंत्र जांच के आदेश दिए हैं।

ऐसे समझें पूरा मामला

  • राजस्थान हाई कोर्ट ने एनडीपीएस मामले में पुलिस की गंभीर लापरवाही पकड़ी।
  • पूछा, एक ही समय में दो अलग-अलग छापेमारी में एक कांस्टेबल कैसे रहा मौजूद?
  • कोर्ट ने पुलिस की कार्यशैली पर उठाए सवाल, डीजीपी को जांच करने के दिए आदेश।
  • पुलिस की कहानी में झोल के चलते आरोपी कमल रामचंदानी की सजा निलंबित।

राजस्थान हाई कोर्ट ने नशीली दवाओं के स्टॉक रखने के मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति की सजा सस्पेंड कर दी। साथ ही कोर्ट ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।



जस्टिस अनिल उपमन ने कहा कि इस मामले में सूचना देने वाले कांस्टेबल की उपस्थिति कार्रवाई के समय घटनास्थल पर बताई है, जबकि कांस्टेबल ठीक उसी समय दूसरी जगह एक अन्य कार्रवाई में भी मौजूद बताया है।



यह संभव नहीं कि एक ही समय में एक पुलिसकर्मी दो अलग-अलग स्थान पर उपस्थित हो। यह मानवीय रूप से तो संभव नहीं है।



डीजीपी को दिए जांच के आदेश

अदालत ने कहा कि मामले में जब्ती की कार्रवाई 6 बजकर 40 मिनट पर की गई। घटनास्थल से 8 किलोमीटर दूर दूसरे मामले में जब्ती की कार्रवाई 7 बजकर 10 मिनट पर की गई। दोनों कार्रवाई में एक ही पुलिसकर्मी मौके पर उपस्थित था।



कोर्ट ने आरोपी की सजा को निलंबित करते हुए डीजीपी को मामले में स्वतंत्र जांच करके तीन महीने में रिपोर्ट पेश करने को कहा है। कोर्ट ने यह आदेश आरोपी कमल रामचंदानी के सजा स्थगन के प्रार्थना पत्र पर दिए।



मजिस्ट्रेट के समक्ष नहीं लिए नमूने

आरोपी के अधिवक्ता शांतनु बंसल ने कोर्ट को बताया कि पुलिस के अनुसार कॉन्स्टेबल गिरधारी लाल की सूचना पर 31 जनवरी 2022 को कमल मेडिकल एंड प्रोविजनल स्टोर से नशीली दवाओं का स्टॉक बरामद किया गया।



आरोपी के पास इन दवाओं के संबंध में खरीद का बिल और कोई वाउचर नहीं मिला। इसके बाद आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज किया गया, लेकिन मामले में कानूनी प्रवाधानों का पालन नहीं किया गया।



जब्ती के बाद अगले दिन एक फरवरी को पुलिस ने नमूने एफएसएल को भेज दिए। वहीं एनडीपीएस एक्ट में मजिस्ट्रेट के सामने ही नमूने लेने का प्रावधान है। जब्ती की कार्रवाई भी इंस्पेक्टर या सब-इंस्पेक्टर स्तर के पुलिस अधिकारी के द्वारा ही की जा सकती है।



इस मामले में मौके पर पहुंची औषधि नियंत्रण अधिकारी अरुणा मीणा ने बयानों में कहा कि मेरे घटनास्थल पर पहुंचने से पहले ही दवाओं की बरामदगी हो चुकी थी। यह बरामदगी कॉन्स्टेबल गिरधारी लाल ने की थी।



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