होमगार्ड भर्ती घोटाला: 4 लाख में नौकरी का आरोप, मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचा मामला
News In Short
- होमगार्ड भर्ती में प्रति पद 4 लाख रुपए की घूस मांगने की शिकायत CMO तक पहुंची।
- वर्ष 2022 से लंबित 3,842 पदों की भर्ती पर भ्रष्टाचार के बादल मंडरा रहे हैं।
- गृह विभाग की संयुक्त सचिव की अध्यक्षता में 3 सदस्यीय दल 15 दिन में सौंपेगा रिपोर्ट।
- जांच में कल्याण निधि घोटाला भी आया सामने, निधि का अनुचित उपयोग पाया गया।
- कई अधिकारियों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की शिकायतें भी जांच के घेरे में हैं।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान में होमगार्ड के 3,842 पदों पर होने वाली भर्ती भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते विवादों में घिर गई है। इस भर्ती में एक पद के बदले 4 लाख रुपए की रिश्वत मांगने की शिकायतें सामने आई हैं। इसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के हस्तक्षेप पर एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन किया गया है।
4 लाख में बिक रही है नौकरी
होमगार्ड के 3,842 रिक्त पदों के लिए चल रही भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े हुए हैं। प्राप्त शिकायतों के अनुसार, प्रत्येक पद के लिए अभ्यर्थियों से 4 लाख रुपए तक की रिश्वत मांगी जा रही है।
यह मामला तब और भी पेचीदा हो जाता है जब हम इस भर्ती के इतिहास को देखते हैं। यह वर्ष 2022 की भर्ती है, जो लंबे समय तक कानूनी दांव-पेंच और कोर्ट के स्टे (स्थगन) के कारण अटकी रही थी। जैसे ही भर्ती प्रक्रिया दोबारा शुरू हुई, दलालों और भ्रष्ट अधिकारियों के गठजोड़ की खबरें मुख्यमंत्री कार्यालय तक जा पहुंची।
15 दिन में तय होगी जवाबदेही
मुख्यमंत्री के निर्देश पर गृह विभाग ने जांच कमेटी बनाई है, जिसका नेतृत्व संयुक्त सचिव अंजलि राजोरिया कर रही हैं। कमेटी में पुलिस उप महानिरीक्षक (भर्ती एवं पदोन्नति बोर्ड) मनोज कुमार और वरिष्ठ संयुक्त विधि सलाहकार उमेंद्र गोयल को शामिल किया गया है।
इस कमेटी को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे 15 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपें। जांच का मुख्य केंद्र नामांकन प्रक्रिया में नियमों की पालना, रिश्वत के आरोपों की सत्यता और भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों का उत्तरदायित्व निर्धारित करना होगा। इसके अलावा, हाल ही में ड्यूटी आवंटन के बदले पैसे लेने के मामले में ट्रैप किए गए अधिकारियों और आय से अधिक संपत्ति की शिकायतों को भी जांच के दायरे में रखा गया है।
कल्याण निधि घोटाला
भर्ती प्रक्रिया में धांधली तो केवल एक सिरा है, जांच की आंच अब गृह रक्षा कल्याण निधि तक भी पहुंच गई है। यह वह कोष है जिसका उपयोग केवल और केवल होमगार्ड्स के कल्याण के लिए किया जाना चाहिए। चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि इस कोष का पैसा होमगार्ड्स पर खर्च होने के बजाय विभाग के उच्चाधिकारियों के बच्चों की छात्रवृत्ति, उनके निजी जिम बनवाने और भव्य रिटायरमेंट पार्टियों के आयोजन पर खर्च किया गया।
इस निधि में अब तक करीब 137 करोड़ रुपये जमा हो चुके हैं। नियम यह है कि इस राशि धांधली सामने आने के बाद विभाग ने इस राशि को केवल होमगार्ड कल्याण तक सीमित कर शेष पैसा राजकोष में जमा करवा दिया है।
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