9.5 नंबर का चश्मा, खराब फेफड़ा, फिर भी पहुंचा IIT दिल्ली, गुंजन और मां की कहानी

Jageshwar prasad | Jul 05, 2026, 14:40 IST
बीमार बेटे के लिए मां बनी 'क्लासमेट', फेफड़ा कोलेप्स के बाद भी गुंजन ने पाया IIT दिल्ली
बिहार के सीतामढ़ी के गुंजन कुमार को JEE से पहले न्यूमोथोरेक्स हुआ, तीन महीने बिस्तर पर रहे। मां गुंजा ने राजस्थान के कोटा में ऑनलाइन क्लास से नोट्स बनाकर बेटे को पढ़ाया। अब गुंजन को IIT दिल्ली में CS मिल रही है।

बिहार के सीतामढ़ी के गुंजन कुमार कोटा में एक इंस्टीट्यूट से JEE की तैयारी कर रहे थे। लेकिन 5 अक्टूबर 2025 को रूटीन टेस्ट के अगले दिन अचानक सीने में तेज दर्द उठा। डॉक्टरों ने बताया कि भारी सामान उठाने के कारण बाएं फेफड़े पर दबाव पड़ा और वह कोलेप्स हो गया यानी न्यूमोथोरेक्स (Pneumothorax) हो गया।



तीन महीने बिस्तर पर रहे, क्लास नहीं जा सके। इसी मुश्किल घड़ी में उनकी मां गुंजा, जो पहले से उनके साथ कोटा में थीं, वे बेटे की क्लासमेट बन गईं। हर ऑनलाइन लेक्चर देखा, विस्तृत नोट्स तैयार किए और बेटे को पढ़ाया।



नतीजा यह हुआ JEE Advanced 2026 में PWD-OBC (PWD – Person with Disability, OBC – Other Backward Class) कैटेगरी में ऑल इंडिया रैंक 50 आई और IIT दिल्ली में कंप्यूटर साइंस मिल गया।



अचानक आई बड़ी मुसीबत

5 अक्टूबर 2025 को रूटीन टेस्ट से एक रात पहले गुंजन को ज्यादा भारी सामान उठाना पड़ा था। अगले दिन टेस्ट देने के बाद अचानक सीने में असहनीय दर्द उठा। अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच की और बताया कि बाईं तरफ का फेफड़ा कोलेप्स हो गया है। यह न्यूमोथोरेक्स की स्थिति थी।



करीब तीन महीने तक गुंजन बिस्तर से उठ भी नहीं सके। JEE Advanced से पहले यह झटका उनका सपना तोड़ने के लिए काफी था।



मां बन गई क्लासमेट

गुंजन की मां गुंजा बीएड पास गृहिणी हैं। वे पहले से बेटे के साथ कोटा में रह रही थीं। बेटे की पढ़ाई रुकती देखकर उन्होंने हार नहीं मानी। वर्षों बाद उन्होंने फिर से किताबें उठाईं।



हर ऑनलाइन लेक्चर को ध्यान से देखा उसे समझा। फिर उसके विस्तार से नोट्स तैयार किए। फिर वही नोट्स से बेटे को पढ़ाया। जो सिलेबस छूट गया था वह धीरे-धीरे पूरा होता चला गया।



9.5 का चश्मा भी नहीं रोक सका

गुंजन की परेशानी सिर्फ फेफड़े तक नहीं थी। उनकी 70 फीसदी से अधिक दृष्टि प्रभावित है और उन्हें 9.5 नंबर का चश्मा लगाना पड़ता है। इन दोनों चुनौतियों के बावजूद उन्होंने JEE Main में 91.8 पर्सेंटाइल हासिल की।



JEE Advanced में PWD-OBC कैटेगरी में AIR 50 और PWD कॉमन रैंक 120 मिली। अब गुंजन को JOSAA (JOSAA – Joint Seat Allocation Authority) काउंसलिंग के जरिए IIT दिल्ली में कंप्यूटर साइंस में दाखिला मिल रहा है।



2021 के टॉपर से मिली प्रेरणा

गुंजन कोटा इसलिए आए क्योंकि उन्होंने 2021 के JEE टॉपर मृदुल अग्रवाल का वीडियो देखा था। उसी से प्रेरित होकर 2023 में कोटा आए थे। उनके 10वीं में 82.5 और 12वीं में 70 फीसदी अंक थे। पिता राजनारायण प्रसाद बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (BRO – Border Roads Organization) में इंजीनियर हैं।



परिस्थितियां आपके पक्ष में नहीं होतीं

गुंजन का कहना है कि परिस्थितियां हमेशा पक्ष में नहीं होतीं वे विपरीत भी हो सकती हैं। परीक्षा सिर्फ पढ़ाई की नहीं, हौसले की भी होती है।



मां गुंजा कहती हैं कि बेटे का सपना ही उनका सपना था। अध्यापकों ने इस कहानी को छात्रों और अभिभावकों दोनों के लिए प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि कोटा सिर्फ परीक्षा की तैयारी नहीं, चुनौतियों से लड़ना भी सिखाता है।



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