जयपुर में बढ़ रहा है गाड़ी मॉडिफिकेशन का अवैध कारोबार, सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवाल
News In Short
- जयपुर में नियमों को ताक पर रख कस्टमाइज करवा रहे हैं गाड़ियों को।
- जयपुर शहर में 5,000 से अधिक अवैध मॉडिफिकेशन सेंटर चल रहे हैं।
- एक गाड़ी में 15,000-20,000 रुपये में हो जाता है मॉडिफिकेशन।
- मोटर व्हीकल एक्ट के तहत गाड़ियों में अवैध बदलाव करना गैरकानूनी।
News In Detail
राजस्थान की राजधानी जयपुर में अब गाड़ियों में मॉडिफिकेशन एक खतरनाक ट्रेंड बन चुका है। युवा गाड़ियों को स्टाइल और शो-ऑफ के लिए अवैध तरीके से मॉडिफाई कर रहे हैं। यह नया चलन अब सड़कों तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि खुलेआम सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रचारित हो रहा है। इसके जरिए ग्राहक आसानी से अपने वाहनों को कस्टमाइज (Customize) करवा रहे हैं। बड़ी बात यह है कि यह पूरी प्रक्रिया बिना किसी अनुमति के हो रही है।
अवैध मॉडिफिकेशन सेंटर
जयपुर के विभिन्न इलाकों जैसे जालुपुरा, मानसरोवर, आगरा रोड, झोटवाड़ा और निवारू रोड पर पांच हजार से अधिक अवैध मॉडिफिकेशन सेंटर चल रहे हैं। ये सेंटर बिना किसी अनुमति के गाड़ियों की संरचना में बदलाव कर रहे हैं। इन सेंटरों का प्रचार अब सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खुलकर किया जा रहा है। इससे ग्राहक आसानी से इनसे संपर्क कर रहे हैं और अपने वाहनों को कस्टमाइज करवा रहे हैं।
क्या बदलाव किए जाते हैं?
इस मॉडिफिकेशन के लिए सेंटर संचालक बाइकों से 15,000 से 20,000 रुपये तक वसूल रहे है, जबकि कार के लिए यह खर्च करीब 30,000 से 50,000 रुपये तक पहुंच जाता है। इनमें साइलेंसर का बदलाव, एलईडी लाइट्स लगाना, बॉडी किट बदलना किया जा रह है। सेंटर संचालक इंजन में भी अवैध तरीके से बदलाव कर रहे है। ये बदलाव वाहन की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा साबित हो रही है। जो सड़क पर दुर्घटनाओं का कारण बन सकती हैं।
कानून और विभाग की चुप्पी
इस अवैध कारोबार को लेकर चिंताजनक पहलू यह है कि यातायात पुलिस और परिवहन विभाग दोनों ही इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। मोटर व्हीकल एक्ट (Motor Vehicle Act) के तहत गाड़ी की संरचना में बदलाव करना गैरकानूनी है, और इसके लिए भारी जुर्माने का प्रावधान है। बावजूद इसके, इन सेंटरों के संचालक बिना किसी डर के ये काम कर रहे हैं।
परिवहन विभाग का जवाब
जयपुर के आरटीओ प्रथम राजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा, मोटर व्हीकल एक्ट नियमों के तहत वाहनों को मॉडिफाई नहीं किया जा सकता। हमने इस तरह की गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई की है और भविष्य में भी इस पर कार्रवाई जारी रखेंगे।
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