छलकेगा खुशी का जाम, जानिए क्यों सस्ती होने जा रही है विदेशी स्कॉच
समझें क्या है पूरा मामला...
- भारत-यूके व्यापार समझौते से विदेशी स्कॉच की कीमतों में कमी आएगी।
- यह समझौता इसी 15 जुलाई से आधिकारिक रूप से लागू हो चुका है।
- ब्रिटेन से आयातित व्हिस्की और जिन पर सीमा शुल्क में 50 फीसदी की कटौती की है।
- विदेशी स्कॉच की खुदरा कीमतों में 20 से 25 प्रतिशत तक की गिरावट आएगी।
राजस्थान में व्हिस्की प्रेमियों के लिए अच्छी खबर है। यदि आप प्रीमियम और ब्रांडेड स्कॉच के मुरीद हैं तो बहुत जल्द आपके चेहरे पर मुस्कान तैरने वाली है।
राज्य में बॉटल्ड-इन-ओरिजिन (BIO) यानी सीधे विदेश से बोतल में बंद होकर आने वाली शराब की कीमतों में जल्द भारी गिरावट देखने को मिल सकती है।
भारत और ब्रिटेन के बीच हुए व्यापार समझौते के बाद अब मयखानों और खुदरा दुकानों पर प्रीमियम स्कॉच काफी किफायती दरों पर उपलब्ध होगी।
क्यों घट रहे हैं दाम? क्या है पूरा गणित?
दरअसल, इस राहत के पीछे की वजह भारत-यूके व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (CETA) है, जो 15 जुलाई से आधिकारिक रूप से लागू हो चुका है।
इस समझौते के तहत भारत सरकार ने ब्रिटेन से आयात की जाने वाली व्हिस्की और जिन (gin) पर लगने वाली बेसिक कस्टम ड्यूटी (सीमा शुल्क) में सीधी 50 फीसदी की कटौती की है।
पहले जहां यूके से आने वाली शराब पर 150 फीसदी का भारी-भरकम टैक्स लगता था, वहीं अबइसे घटाकर 75 प्रतिशत कर दिया गया है।
चूंकि भारत में बिकने वाली प्रीमियम आयातित शराब में सबसे बड़ा हिस्सा स्कॉटलैंड में बनी स्कॉच व्हिस्की का होता है, इसलिए सीमा शुल्क में आधी कटौती का सीधा असर इनकी लैंडिंग कॉस्ट (आयात लागत) पर पड़ेगा।
किन ब्रांड्स पर मिलेगा फायदा और कितनी घटेगी कीमत?
अगर आप सोच रहे हैं कि इस कटौती से आपकी जेब को कितनी राहत मिलेगी तो राजस्थान लिकर वेलफेयर एसोसिएशन के आंकड़ों के मुताबिक खुदरा कीमतों में 20 से 25 प्रतिशत तक की बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।
बाजार में नया स्टॉक आते ही जिन लोकप्रिय ब्रांडों की कीमतें कम होने वाली हैं, उनमें शामिल हैं:
- शिवास रीगल (Chivas Regal)
- बैलेंटाइन्स (Ballantine’s)
- जॉनी वॉकर (Johnnie Walker)
- ग्लेनफिडिच (Glenfiddich)
- द ग्लेनलीवेट (The Glenlivet)
- द मैकेलन (The Macallan)
राजस्थान लिकर वेलफेयर एसोसिएशन के अनुसार 15 जुलाई से नई टैक्स दरें लागू हो चुकी हैं। जैसे ही नई इंपोर्ट ड्यूटी के तहत नया स्टॉक बाजार में पहुंचेगा, दुकानों पर नई और सस्ती दरें लागू कर दी जाएंगी।
क्या रुक पाएगी गुड़गांव से होने वाली तस्करी?
राजस्थान में लंबे समय से एक ट्रेंड देखने को मिला है। यहां के शौकीन कम कीमतों के चक्कर में अक्सर पड़ोसी राज्य हरियाणा खासकर गुड़गांव से प्रीमियम शराब खरीदकर लाते हैं। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस टैक्स कटौती से राजस्थान सरकार को भी बड़ा फायदा होगा।
स्थानीय शराब विक्रेताओं के अनुसार यदि कीमतों का यह बड़ा अंतर कम होता है तो लोग रिस्क लेकर बाहर से शराब लाने के बजाय राजस्थान में ही खरीदारी करना पसंद करेंगे।
हालांकि, विक्रेताओं का यह भी कहना है कि गुड़गांव में भी दरें घटने की उम्मीद है, इसलिए वहां की कीमतों से शत-प्रतिशत मुकाबला करना शायद संभव न हो, फिर भी स्थानीय बिक्री में जबरदस्त उछाल आने की पूरी उम्मीद है।
देसी प्रीमियम ब्रांड्स के लिए चुनौती?
एक तरफ विदेशी स्कॉच के शौकीन जश्न मना रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय शराब उद्योग के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है।
एसोसिएशन का कहना है कि अगर शिवास रीगल या 100 पाइपर्स जैसी विदेशी स्कॉच की कीमतें भारतीय प्रीमियम व्हिस्की के करीब आ गईं तो लोग थोड़ा सा फर्क होने पर विदेशी ब्रांड चुनेंगे।
इसी संतुलन को बनाए रखने के लिए लिकर एसोसिएशन ने राजस्थान सरकार से मांग की है कि वह इंडियन मेड फॉरेन लिकर (IMFL) और भारतीय प्रीमियम व्हिस्की पर लगने वाले राज्य स्तरीय करों को भी युक्तियुक्त बनाए, ताकि बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा बनी रहे।
FAQ
- राजस्थान में विदेशी स्कॉच सस्ती क्यों हो रही है?
भारत और ब्रिटेन के बीच हुए व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते यानी सीईटीए के तहत ब्रिटेन से आने वाली व्हिस्की और जिन पर सीमा शुल्क में 50 फीसदी की कटौती की गई है। पहले यह टैक्स 150 फीसदी था, जिसे अब घटाकर 75 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे आयात लागत घटेगी और खुदरा कीमतें भी कम होंगी।
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