बीएसएफ के सजे-धजे ऊंटों के साथ शुरू हुआ डेजर्ट फेस्टिवल-2026, देशी-विदेशी सैलानी हुए रोमांचित

Ashish Bhardwaj | Jan 30, 2026, 13:28 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान के जैसलमेर में शुक्रवार से इंटरनेशनल डेजर्ट फेस्टिवल-2026 का आगाज हुआ। पहले दिन बीएसएफ के रंग-विरंगे ऊंटों के साथ शोभायात्रा और लोक नृत्य ने फेस्टिवल को रंगारंग बना दिया।

News In Short

  • जैसलमेर में इंटरनेशनल डेजर्ट फेस्टिवल-2026 की हुई शुरुआत।
  • शोभायात्रा में बीएसएफ के ऊंट और लोक कलाकारों का कारवां शामिल हुआ।
  • कच्छी घोड़ी नृत्य और लोक वाद्ययंत्रों से माहौल संगीतमय हो गया।
  • सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए, पुलिस और ट्रैफिक पुलिस पूरी तरह तैनात रहे।
  • डेजर्ट फेस्टिवल की थीम "बीट्स ऑफ द थार" रखी गई है।

News In Detail

राजस्थान के जैसलमेर में शुक्रवार 30 जनवरी से इंटरनेशनल डेजर्ट फेस्टिवल-2026 का आगाज हो गया। यह आयोजन सोनार दुर्ग स्थित भगवान लक्ष्मीनाथ के दरबार में पूजा- अर्चना और आरती के साथ शुरू हुआ। बीएसएफ के सजे-धजे ऊंट और इन पर सवार जवान के साथ शोभायात्रा की शुरुआत हुई। इस आयोजन के दौरान स्थानीय अधिकारी, व्यवसायी और देशी-विदेशी सैलानी भी उपस्थित रहे। जैसलमेर के पूर्व राजपरिवार के सदस्य चैतन्यराज सिंह ने लक्ष्मीनाथ भगवान का पूजन किया। इस महोत्सव की थीम इस बार "बीट्स ऑफ द थार" रखी गई है।





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शोभायात्रा और सांस्कृतिक गतिविधियां

महोत्सव की शुरुआत ऐतिहासिक गडीसर सरोवर से एक भव्य शोभायात्रा के साथ हुई। शोभायात्रा ने गुलास्तला रोड, आसनी रोड, सालम सिंह हवेली, और गोपा चौक से होते हुए मुख्य बाजार और गांधी चौक से गुजरते हुए शहीद पूनमसिंह स्टेडियम तक का सफर तय किया। इस दौरान बीएसएफ के ऊंटों की सवारी, केमल माउंटेन बैंड वादकों का समूह, मंगल कलश लिए बालिकाएं और लोक कलाकारों का कारवां मुख्य आकर्षण बने। पर्यटक इस दृश्य को कैमरे में कैद करने के लिए बेताब दिखाई दिए।





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लोक नृत्यों से संगीतमय माहौल

महोत्सव के पहले दिन, आंगी गैर द्वारा शानदार नृत्य प्रस्तुत किया गया। कच्छी घोड़ी नृत्य ने पूरे वातावरण को संगीत और ताल के साथ रंगीन बना दिया। शोभायात्रा के दौरान लोक नृत्यों और वाद्यों की धूम रही, जिससे राजस्थानी संस्कृति और परंपराओं का प्रदर्शन हुआ।





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कड़ी सुरक्षा व्यवस्था

इस महोत्सव के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पुलिस का अतिरिक्त जाब्ता रेंज से मंगवाया गया था। शोभायात्रा के मार्ग पर पुलिसकर्मी तैनात थे, वहीं यातायात व्यवस्था के लिए ट्रैफिक पुलिस पूरी तरह से सख्त थी। पार्किंग की व्यवस्था नगर परिषद द्वारा अलग से की गई थी।



इतिहास और कैमल पोलो की शुरुआत

जैसलमेर में डेजर्ट फेस्टिवल की शुरुआत 1988 में हुई थी। वहीं, इस फेस्टिवल का प्रमुख खेल कैमल पोलो की शुरुआत 1987 में जैसलमेर में हुई थी। इस खेल की ईजाद 27 साल के जितेंद्र सिंह राठौड़ ने की थी। इन्हें जैसलमेर में "जीतू बन्ना" के नाम से जाना जाता है।



क्यों किया जाता है डेजर्ट फेस्टिवल

डेजर्ट फेस्टिवल का आयोजन मुख्य रूप से थार रेगिस्तान की सांस्कृतिक धरोहर, परंपराओं, कला, और लोक जीवन को अंतरराट्रीय पटल पर लाने के लिए किया जाता है। यह महोत्सव हर साल इसी अवधि में जैसलमेर में होता है। इसका उद्देश्य स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देना, पर्यटकों को आकर्षित करना, और राज्य के पर्यटन उद्योग को सशक्त करना है। इस फेस्टिवल में लोक नृत्य, संगीत, ऊंट रेसिंग, और पारंपरिक खेलों का आयोजन किया जाता है, जिससे राजस्थान की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को दुनिया भर में पहचान मिलती है।



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