अंडा तस्करी के अवैध कारोबार में दो IVF केंद्रों का लाइसेंस निलंबित

Jageshwar prasad | May 06, 2026, 12:21 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान के उदयपुर में अंडा तस्करी के खुलासे के बाद अमर आशीष आईवीएफ और सम्पत एआरटी बैंक के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं। जांच में कम उम्र की लड़कियों के अंडों का उपयोग और गंभीर धोखाधड़ी पाई गई है। अब पूरे राजस्थान के आईवीएफ केंद्रों की जांच होगी।

News In Short

  • अंडा तस्करी मामले में उदयपुर के अमर आशीष आईवीएफ सेंटर के सभी तीन पंजीकरण निलंबित।
  • जांच दल को आईवीएफ रिकॉर्ड में कम उम्र की लड़कियों और डोनर दस्तावेजों में छेड़छाड़ के सबूत मिले।
  • कान्हा आईवीएफ सेंटर बिना किसी राज्य पंजीकरण के अवैध रूप से काउंसलिंग करते हुए पाया गया।
  • राज्य नोडल अधिकारी की अध्यक्षता में विशेष कमेटी गठित की गई है जो विस्तृत जांच करेगी।
  • राज्य सरकार ने अब राजस्थान के सभी पंजीकृत आईवीएफ सेंटरों के औचक निरीक्षण के आदेश दिए हैं।

News In Detail

Udaipur: राजस्थान में आईवीएफ (IVF) की आड़ में चल रहे अंडा तस्करी के अवैध कारोबार पर राज्य सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। अंडा तस्करी के खुलासे के बाद हरकत में आए स्वास्थ्य विभाग ने उदयपुर के दो प्रतिष्ठित आईवीएफ केंद्रों के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए हैं। इस कार्रवाई के साथ ही राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी पंजीकृत आईवीएफ सेंटरों के औचक निरीक्षण के आदेश जारी कर दिए हैं।



IVF केंद्रों पर मिले गंभीर साक्ष्य

स्टेट कमेटी द्वारा की गई विस्तृत जांच में उदयपुर स्थित अमर आशीष अस्पताल एंड आईवीएफ सेंटर को गंभीर अनियमितताओं का दोषी पाया गया है। विभाग ने इस संस्थान के तीन प्रमुख पंजीकरणों-एआरटी बैंक, क्लिनिक लेवल-2 और सरोगेसी क्लिनिक को निलंबित कर दिया है।



जांच दल को दस्तावेजों की पड़ताल में चौंकाने वाले तथ्य मिले जिसमें डोनर (अंडा देने वाली महिलाओं) के दस्तावेजों में बड़े स्तर पर छेड़छाड़ पाई गई। कई पत्रावलियों में कम उम्र की लड़कियों के दस्तावेज मिले हैं, जो सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है। अनेक फाइलों में अनिवार्य पहचान पत्र (आधार कार्ड) संलग्न नहीं थे। एग सप्लाई करने वाले अन्य सेंटरों के साथ अस्पताल का कोई कानूनी समझौता (MOU) उपलब्ध नहीं था।



अमर आशीष अस्पताल एंड आईवीएफ सेंटर के साथ सम्पत एआरटी बैंक का भी पंजीकरण निलंबित किया है। ये अस्पातल अब किसी भी मरीज का पंजीकरण नहीं कर पाएंगे, इन सेंटरों की विस्तृत जांच के बाद विभाग आगे की कार्रवाई करेगा।



कान्हा और द पिंक आईवीएफ भी घेरे में

जांच में सामने आया कि कान्हा आईवीएफ केंद्र बिना राज्य पंजीकरण के ही आईवीएफ परामर्श और काउंसलिंग का कार्य कर रहा था। संस्थान ने स्वीकार किया कि वे निसंतान दंपतियों को अन्य केंद्रों पर भेजते थे, जिसके बाद उनका रिकॉर्ड जब्त कर लिया गया है। वहीं, द पिंक आईवीएफ के मामले में पाया गया कि पंजीकरण द पिंक आईवीएफ के नाम पर है, जबकि अन्य सभी प्रमाण पत्र शान्तिराज हॉस्पिटल के नाम पर चल रहे थे।



राज्य नोडल अधिकारी की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित

यह पूरी कार्रवाई उस खुलासे के बाद हुई है, जिसमें बताया गया था कि कैसे दलाल महज 25 हजार रुपए में बच्चियों के अंडे खरीदकर उन्हें लाखों में बेच रहे थे। इसके बाद राज्य नोडल अधिकारी की अध्यक्षता में एक विशेष जांच कमेटी का गठन किया गया, जिसमें डॉ. मधु रतेश्वर शर्मा, डॉ. जोगेश्वर प्रसाद और जेपी बुनकर शामिल रहे।



सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब पूरे राजस्थान में एआरटी विनियमन अधिनियम 2021 के प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाएगा और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।



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