जेडीए का उत्तरी रिंग रोड पर बड़ा कदम, एनएचएआई से प्रोजेक्ट अपने हाथ में लेने के लिए भेजा प्रस्ताव

Ashish Bhardwaj | Mar 29, 2026, 12:52 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) राजधानी में उत्तरी रिंग रोड को लेकर नया कदम उठाने की तैयारी में है। उसने एनएचएआई से यह प्रोजेक्ट अपने हाथ में लेने का प्रस्ताव सरकार को भेजा है। उत्तरी रिंग रोड बनने से जयपुर को ट्रैफिक दबाव से राहत मिलेगी।

News In Short

  • जेडीए उत्तरी रिंग रोड प्रोजेक्ट अपने हाथ में लेने की तैयारी में।
  • जेडीए ने तैयार किया पूरा रोडमैप, सरकार को भेजा प्रस्ताव।
  • अभी तक यह प्रोजेक्ट एनएचएआई के पास, लेकिन काम शुरू नहीं।
  • जेडीए ने प्रोजेक्ट लेने के लिए जयपुर विस्तार को बनाया आधार।
  • उत्तरी रिंग प्रोजेक्ट बनने से जयपुर को ट्रैफिक दबाव से मिलेगी राहत।

News In Detail

राजस्थान में जेडीए जयपुर उत्तरी रिंग रोड प्रोजेक्ट का काम अपने हाथ में लेने की तैयारी में है। अभी यह प्रोजेक्ट एनएचएआई के हाथ में है, लेकिन इस पर काम शुरू नहीं पाया है। जेडीए आयुक्त सिद्धार्थ महाजन ने इस बारे में नगरीय विकास विभाग को प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव में यह भी दावा है कि जेडीए इस काम को जल्द पूरा करके जयपुर को ट्रै​फिक राहत दिला सकता है। प्रस्ताव में इसका पूरा रोडमैप तैयार किया गया है।



​क्यों जरूरी है उत्तरी रिंग रोड?

जयपुर में दक्षिणी रिंग रोड (अजमेर रोड से टोंक रोड और टोंक रोड से आगरा रोड) का निर्माण कार्य पहले ही पूरा हो चुका है। इससे ट्रैफिक को लेकर शहर के एक बड़े हिस्से को राहत मिली है।



हालांकि, समस्या अभी भी बरकरार है, क्योंकि अजमेर रोड से दिल्ली रोड और आगरा रोड जाने वाले भारी वाहन आज भी शहर की घनी आबादी वाले इलाकों से होकर गुजरते हैं। इससे न केवल ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती है, बल्कि वायु प्रदूषण में भी भारी बढ़ोतरी हो रही है। इस समस्या के स्थाई समाधान के लिए 3 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाला उत्तरी रिंग रोड प्रोजेक्ट प्रस्तावित है।



​प्रोजेक्ट की रूपरेखा और देरी का कारण

​उत्तरी रिंग रोड की कुल लंबाई लगभग 100 किलोमीटर है, जिसे दो मुख्य चरणों में बांटा गया है। इसमें ​आगरा रोड से सी जोन बायपास तक 45 किलोमीटर रहेगा, जबकि ​बायपास से अजमेर रोड तक 52 किलोमीटर प्रस्तावित है।



पिछले साल 10 दिसंबर 2024 को राइजिंग राजस्थान समिट के दौरान केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इस प्रोजेक्ट की घोषणा की थी। इसके बाद 6 नवंबर 2025 को एनएचएआई ने भूमि अवाप्ति की अधिसूचना भी जारी की, लेकिन जेडीए का मानना है कि घोषणा के एक वर्ष बाद भी प्रगति नहीं हुई है।



जेडीए ने प्रोजेक्ट के पक्ष में ये दिए तर्क

जेडीए ने इस प्रोजेक्ट को अपने हाथ में लेने के पीछे तर्क दिए हैं। जेडीए का कहना है कि उसका क्षेत्राधिकार अब बढ़कर 6,000 वर्ग किलोमीटर हो गया है। यदि जेडीए स्वयं निर्माण करता है तो रिंग रोड को मास्टर प्लान और जोनल प्लान की सड़कों से बेहतर तरीके से जोड़ा जा सकेगा।



जेडीए के अनुसार शहर के भीतर भारी वाहनों के प्रवेश को रोकने के लिए उत्तरी रिंग रोड का जल्द बनना अनिवार्य है। इससे शहर की हवा साफ होगी और सड़कों पर दबाव कम होगा। भारत में वर्तमान में प्रति हजार आबादी पर कारों की संख्या 40 है, जिसके विकसित देशों की तर्ज पर 600-800 तक पहुंचने की संभावना है।



जेडीए के अनुसार दक्षिणी रिंग रोड से वर्तमान में हर महीने 10 करोड़ रुपये का टोल मिल रहा है। उत्तरी रिंग रोड भी दीर्घकाल में जेडीए के लिए एक फायदेमंद होगा।



पीपीपी मोड पर होगा निर्माण

सरकार को भेजे प्रस्ताव में जेडीए ने स्पष्ट किया है कि वह इस प्रोजेक्ट का निर्माण पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर करेगा। निर्माण का पूरा खर्च अनुबंधित फर्म वहन करेगी। जेडीए केवल भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा। अनुबंध की अवधि पूरी होने के बाद टोल वसूली से जेडीए को नियमित और स्थाई आय होगी। ​जेडीए ने यह भी साफ कर दिया है कि वह एनएचएआई पहले से फाइनल किए गए एलाइनमेंट के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं करेगा और उसी नक्शे पर काम आगे बढ़ाएगा। जेडीए का दावा है कि वह इस प्रोजेक्ट को प्राथमिकता के आधार पर एनएचएआई की तुलना में अधिक तेजी से पूरा कर सकता है।



ये भी पढे़:-

न्याय केवल दंड का माध्यम नहीं, सुधार और अधिकारों पर दिखाया मानवीय नजरिया



सरकारी अस्पताल में सुरक्षा पर सवाल, युवक पर ब्लेड से जानलेवा हमला, जानें पूरी खबर



आरएएस भर्ती परीक्षा को लेकर संशय बना, आरपीएससी को अभी तक नहीं मिली अनुशंसा



खाकी पर दाग, बेटों की दबंगई और टूटते भरोसे की दास्तान, दे गई मरुधरा को बड़ा संदेश



Tags:
  • पीपीपी मोड
  • एनएचएआई
  • जेडीए
  • राइजिंग राजस्थान
  • उत्तरी रिंग रोड प्रोजेक्ट