खजाने के चक्कर में 1100 साल पुरानी मूर्ति खंडित, पुलिस ने किया गिरफ्तार
समझें क्या है पूरा मामला
- जयपुर के साईवाड़ गांव में 1100 साल पुरानी लक्ष्मीनारायण मूर्ति चोरी होने का मामला आया सामने।
- 18 साल के युवक ने सोशल मीडिया पर खजाने की अफवाह पढ़कर मूर्ति चुराई।
- आरोपी ने मूर्ति को खेत में ले जाकर तोड़ा, लेकिन अंदर कुछ नहीं मिला।
- पुलिस ने 500 CCTV कैमरों और 1000 मोबाइल नंबरों की जांच के बाद आरोपी को पकड़ा।
- खंडित मूर्ति के अवशेष पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर बरामद किए।
आधुनिक युग में युवा जल्द पैसे कमाने की चाहा में मेहनत नहीं कारना चाहता बल्कि शार्ट कट अपनाना रहा है। एक ऐसा ही राजस्थान के जयपुर जिले के साईवाड़ गांव से सामने आया है। गणेश शर्मा नाम के एक युवक ने 1100 साल पुरानी भगवान लक्ष्मीनारायण की मूर्ति को चोरी कर लिया। गणेश की उम्र 18 साल बताई जा रही है। गणेश ने सोशल मीडिया पर खजाने की जानकारी पढ़कर यह वारदात की। मूर्ति में रत्न होने का भ्रम था, इसलिए उसे खंडित कर दिया।
मंदिर से गायब हुई सदियों पुरानी मूर्ति
जयपुर जिले के जमवारामगढ़ के पास साईवाड़ गांव में एक प्राचीन मंदिर है। यहां ठाकुर लक्ष्मीनारायण मंदिर में करीब 1100 साल पुरानी मूर्ति स्थापित थी। यह अष्टधातु से बनी करीब दो फीट ऊंची प्रतिमा थी। इसमें भगवान शेषनाग पर विराजमान स्वरूप में दिखाई देते थे।
4 जून की रात यह मूर्ति अचानक गायब हो गई। सुबह जब ग्रामीणों को पता चला तो पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया। लोग धरने पर बैठ गए और पुलिस से कार्रवाई की मांग की।
सोशल मीडिया ने दिया गलत रास्ता
पुलिस जांच में जो खुलासा हुआ वह चौंकाने वाला था। आरोपित गणेश शर्मा पिछले पांच-छह महीनों से सोशल मीडिया पर एक खास तरह की जानकारी खोज रहा था। उसे पढ़ने को मिला था कि प्राचीन मूर्तियों के भीतर नीलम और दूसरे कीमती रत्न छिपे होते हैं।
इसी भ्रम में उसने मंदिर की मूर्ति को निशाना बनाया। उस रात गांव में बिजली बंद थी। अंधेरे का फायदा उठाकर वह मूर्ति उठा ले गया।
खेत में तोड़ी, मिट्टी में दबाई
आरोपित मूर्ति को गांव के बाहर अपने ज्वार के खेत में ले गया। वहां उसने मूर्ति को खंडित किया। लेकिन भीतर कुछ नहीं मिला। कोई रत्न नहीं, कोई खजाना नहीं। घबराहट में उसने टूटी हुई मूर्ति को मिट्टी में दबा दिया। पुलिस ने बाद में उसी की निशानदेही पर खुदाई करवाई और खंडित अवशेष बरामद किए।
धरने में बैठकर रखता था नजर
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा। जो युवक मूर्ति चुराकर गया था, वही धरने में भी बैठा रहा। वह खुद को संदेह से दूर रखना चाहता था। पुलिस की हर गतिविधि पर उसकी नजर थी।
वह जानना चाहता था कि जांच किस दिशा में जा रही है। लेकिन पुलिस की तकनीकी जांच के सामने उसकी चालाकी काम नहीं आई।
14 दिन, 500 कैमरे, 1000 नंबर
पुलिस उपायुक्त (DCP) जयपुर उत्तर कर्ण शर्मा ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी (SIT) का गठन किया गया। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त नीरज पाठक, सहायक पुलिस आयुक्त सुरेंद्र सिंह राणावत और थानाधिकारी डॉ. गौतम डोटासरा की निगरानी में जांच हुई।
टीम ने गांव और आसपास के करीब 500 CCTV कैमरों की फुटेज देखी। करीब 1000 मोबाइल नंबरों की BTS और CDR की जांच हुई। मुखबिर तंत्र भी सक्रिय किया गया। 14 दिन की लगातार मेहनत के बाद आरोपित तक पहुंच बनाई गई।
क्या है तस्करी गिरोह का कनेक्शन
पुलिस अभी यह भी जांच कर रही है कि आरोपित का किसी मूर्ति तस्करी गिरोह से संबंध तो नहीं है। प्राचीन धरोहरों की अवैध खरीद-फरोख्त करने वाले नेटवर्क से जुड़ाव की भी पड़ताल हो रही है। साथ ही एक बाल अपचारी को भी निरुद्ध किया गया है।
FAQ
- साईवाड़ मंदिर से कौन सी मूर्ति चोरी हुई थी?
जयपुर के साईवाड़ गांव स्थित ठाकुर लक्ष्मीनारायण मंदिर से करीब 1100 साल पुरानी अष्टधातु निर्मित मूर्ति चोरी हुई थी। यह दो फीट ऊंची प्रतिमा थी जिसमें भगवान शेषनाग पर विराजमान स्वरूप में दिखाई देते थे। 4 जून की रात यह वारदात हुई थी। - साईवाड़ मंदिर से कौन सी मूर्ति किस ने चोरी की ?
18 साल के गणेश शर्मा ने सोशल मीडिया पर पढ़ा था कि प्राचीन मूर्तियों के भीतर नीलम जैसे कीमती रत्न होते हैं। इसी लालच में उसने मूर्ति चुराकर खेत में ले जाकर खंडित की। कुछ नहीं मिला तो मूर्ति मिट्टी में दबा दी। - मूर्ति चोरी मामले में पुलिस ने 14 दिन में कैसे सुलझाया?
पुलिस ने 500 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और 1000 मोबाइल नंबरों की CDR जांच की। मुखबिर तंत्र और तकनीकी निगरानी का सहारा लिया गया। SIT की टीम ने लगातार काम करते हुए आरोपित तक पहुंच बनाई और उसके खेत से खंडित मूर्ति बरामद की।
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