जयपुर डिप्टी मेयर चुनाव: भाजपा से सरोज कंवर और कांग्रेस से सलमान मंसूरी मैदान में
समझें क्या है पूरा मामला
- जयपुर नगर निगम में आज डिप्टी मेयर चुनाव, भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने।
- भाजपा की सरोज कंवर और कांग्रेस के सलमान मंसूरी के बीच मुकाबला।
- संख्याबल में भाजपा मजबूत, लेकिन अंदरूनी विरोध से बढ़ी हलचल।
- सुबह 10 बजे शुरू होगी प्रक्रिया, शाम 5 बजे बाद आएंगे नतीजे।
- पार्षदों की वोटिंग से तय होगा जयपुर का नया डिप्टी मेयर।
जयपुर नगर निगम में आज डिप्टी मेयर का चुनाव हो रहा है। भाजपा ने सरोज कंवर और कांग्रेस ने सलमान मंसूरी को उम्मीदवार बनाया है। संख्याबल के हिसाब से सरोज की स्थिति मजबूत मानी जा रही है। आज शाम 5 बजे के बाद आएंगे नतीजे। कागजों पर मुकाबला भाजपा के पक्ष में दिख रहा है। पर पार्टी के अंदर विरोध की चर्चा ने चुनाव को रोचक बना दिया है।
एक ही दिन में पूरी प्रक्रिया
राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक नामांकन से लेकर मतदान तक की पूरी प्रक्रिया शनिवार 26 सितंबर को ही होगी। सुबह 10 बजे प्रक्रिया शुरू होगी। सुबह 11 बजे तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे। 11:30 बजे नामांकन पत्रों की जांच होगी। दोपहर 2 बजे तक उम्मीदवार नाम वापस ले सकेंगे। अगर मैदान में केवल एक उम्मीदवार बचा तो वह निर्विरोध चुना जाएगा। दो या ज्यादा उम्मीदवार रहे तो दोपहर 2:30 से शाम 5 बजे तक मतदान होगा। मतदान के तुरंत बाद गिनती होगी। फिर नतीजा घोषित किया जाएगा।
दोनों उम्मीदवार कौन हैं
सरोज कंवर पहली बार पार्षद का चुनाव जीती हैं। वहीं सलमान मंसूरी वार्ड 137 से पार्षद हैं। वे दूसरी बार पार्षद बने हैं। यानी अनुभव में सलमान आगे हैं, पर संख्याबल में सरोज मजबूत दिखती हैं।
कौन है सरोज कंवर
सरोज कंवर भाजपा के पूर्व प्रदेश मंत्री रणजीत सिंह सोडाला की पत्नी हैं। रणजीत सिंह रावणा राजपूत समाज के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। पार्टी ने पहली बार सरोज को पार्षद का टिकट दिया था। डिप्टी मेयर के लिए भाजपा ने ओबीसी और महिला चेहरे पर दांव लगाया है। सरोज जीतती हैं तो वे नगर निगम के इतिहास में पहली महिला डिप्टी मेयर होंगी।
भाजपा के पास है बहुमत
मेयर चुनाव के नतीजे संख्याबल की तस्वीर साफ करते हैं। मेयर चुनाव में भाजपा के सुनील कोठारी को 89 वोट मिले थे। कांग्रेस की सुनीता मावर को 60 वोट मिले थे। इसी आधार पर डिप्टी मेयर चुनाव में भी भाजपा मजबूत मानी जा रही है। भाजपा ने निर्दलीय पार्षदों के समर्थन का दावा भी किया है।
विरोध से बढ़ी हलचल
सरोज के नाम पर भाजपा के अंदर विरोध शुरू होने की चर्चा है। इसी वजह से मुकाबले को लेकर उत्सुकता बढ़ी है। अगर कुछ पार्षद अलग रुख अपनाते हैं तो गणित बदल भी सकता है। हालांकि अंतिम तस्वीर मतदान के बाद ही साफ होगी। निर्दलीय पार्षदों से दोनों खेमों ने संपर्क और बातचीत की है।
बाड़ेबंदी से लौटेंगे पार्षद
मेयर चुनाव से पहले भाजपा और कांग्रेस ने अपने पार्षदों की बाड़ेबंदी की थी। बाड़ेबंदी में पार्टियां अपने पार्षदों को एक जगह ठहराती हैं। इसका मकसद क्रॉस वोटिंग की आशंका को रोकना होता है। अब सभी पार्षद निगम मुख्यालय पहुंचेंगे। मतदान की स्थिति बनी तो सभी वोट डालेंगे। इसके बाद लंबे समय से चल रही बाड़ेबंदी खत्म होने की संभावना है।
बाकी निगमों में क्या हुआ
प्रदेश के सात नगर निगमों में डिप्टी मेयर पहले ही चुने जा चुके हैं। इनमें से छह में भाजपा के उम्मीदवार जीते, जबकि पाली में कांग्रेस समर्थित निर्दलीय को जीत मिली। अब जयपुर, जोधपुर और कोटा के नतीजों से पूरी तस्वीर साफ होगी।
डिप्टी मेयर की भूमिका
डिप्टी मेयर का चुनाव जनता सीधे नहीं करती। निगम के पार्षद वोट डालकर उसे चुनते हैं। मेयर की गैरमौजूदगी में बैठकों की अध्यक्षता जैसी जिम्मेदारियां डिप्टी मेयर संभालता है। नगर निगम के कामकाज में यह पद अहम माना जाता है। इसलिए दोनों दल इसे प्रतिष्ठा से जोड़कर देख रहे हैं।
शाम तक साफ होगी तस्वीर
भाजपा को अपने संख्याबल पर भरोसा है। कांग्रेस को उम्मीद है कि विरोध की चर्चा से मुकाबला बदल सकता है। शाम तक साफ हो जाएगा कि जयपुर का नया डिप्टी मेयर कौन होगा।
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