जयपुर डिजिटल अरेस्ट केस में तीसरा आरोपी गिरफ्तार, बुजुर्ग दंपती से ठगे थे 76 लाख
समझें क्या है पूरा मामला
- जयपुर में बुजुर्ग दंपती से 76 लाख रुपए ठगे।
- NIA-ATS अधिकारी बनकर किया वीडियो कॉल।
- आतंकी गतिविधियों में आधार इस्तेमाल का डर।
- फर्जी NIA नोटिस भेजकर तुड़वाई बुजुर्ग दंपत्ति से FD।
- मनी ट्रेल से तीसरे आरोपी तक पहुंची पुलिस।
राजस्थान की राजधानीजयपुर के एक बुजुर्ग दंपती को ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर 76 लाख रुपए ठगने के मामले में स्टेट साइबर क्राइम पुलिस ने तीसरे आरोपी को गिरफ्तार किया। आरोपी ताहिर को उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर से पकड़ा गया। जांच में सामने आया है कि ठगी की रकम को अलग-अलग बैंक खातों में घुमाने और कैश में निकालने के नेटवर्क में उसकी भूमिका थी।
साइबर ठगों ने दंपती को पहले WhatsApp कॉल किया। खुद को पुलिस, ATS और NIA का अधिकारी बताया। इसके बाद दावा किया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों और करोड़ों रुपए के वित्तीय अपराध में हुआ।
गिरफ्तारी और गंभीर कार्रवाई का ऐसा डर बनाया कि बुजुर्ग दंपती ने अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट तक तुड़वा दी और कुल 76 लाख रुपए आरोपियों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए।
जयपुर में डिजिटल अरेस्ट कर 76 लाख ठगे
ठगों ने पूरी वारदात को असली दिखाने के लिए दंपती के व्हाट्स एप्प पर फर्जी NIA नोटिस भी भेजा। इसके बाद लगातार वॉयस और वीडियो कॉल किए गए।दंपती को यह विश्वास दिलाया गया कि उनके खिलाफ गंभीर मामला दर्ज है और गिरफ्तारी हो सकती। इसी मानसिक दबाव में उनसे रकम ट्रांसफर करवाई गई।
पुलिस ने साफ किया है कि कोई पुलिस या जांच एजेंसी व्हाट्सऐप वीडियो कॉल के जरिए किसी व्यक्ति को ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर पैसे ट्रांसफर करने के निर्देश नहीं देती।
76 लाख की रकम खातों में घुमाई
शिकायत मिलने के बाद स्टेट साइबर क्राइम पुलिस ने ठगों के व्हाट्सऐप और संदिग्ध मोबाइल नंबरों का तकनीकी विश्लेषण किया। इसके साथ बैंक खातों की ट्रांजैक्शन चेन खंगाली गई। जांच में सामने आया कि दंपती से ठगी गई रकम को एक खाते में रखने के बजाय अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया।इसी मनी ट्रेल का पीछा करते हुए पुलिस नेटवर्क की अगली कड़ियों तक पहुंची।
21 लाख ‘हनिया फ्रुट्स’ के खाते में पहुंचे
पुलिस के मुताबिक ठगी के 76 लाख रुपए में से 21 लाख रुपए हनिया फ्रुट्स नाम की फर्म के खाते में पहुंचे। इस फर्म का संचालक मुजस्सिम बताया गया है।आरोप है कि मुजस्सिम ने रकम आगे ट्रांसफर करवाने के लिए बैंक खातों की व्यवस्था करने को ताहिर से कहा। इसके बाद ताहिर ने अपने परिचित सतपाल सिंह के जरिए दूसरे बैंक खातों की डिटेल जुटाई। इन उपलब्ध कराए गए खातों में करीब 17 लाख रुपए जमा करवाए गए।
कमीशन काटा, 7 लाख कैश ताहिर तक पहुंचे
पुलिस जांच में पैसों के बंटवारे की चेन भी सामने आई है। आरोप है कि सतपाल ने अपना कमीशन काटने के बाद 7 लाख रुपए नकद ताहिर को दिए। इसमें से 5 लाख रुपए मुजस्सिम को दिए गए, जबकि 2 लाख रुपए ताहिर ने अपने पास रख लिए। यानी साइबर ठगी की रकम को खातों में घुमाने के बाद नकदी में निकालकर नेटवर्क के अलग-अलग लोगों तक पहुंचाया जा रहा था। पुलिस अब इस मनी ट्रेल और इस्तेमाल किए गए अन्य बैंक खातों की भूमिका की जांच कर रही है।
तीसरा आरोपी गिरफ्त में
स्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन की कार्रवाई में ताहिर को गौतमबुद्ध नगर, उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया गया। इस मामले में अब तक तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। कार्रवाई डीजीपी राजीव कुमार शर्मा और एडीजी विजय कुमार सिंह के निर्देशन तथा डीआईजी साइबर क्राइम शांतनु कुमार सिंह की निगरानी में की गई।
पुलिस की चेतावनी- ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसा कोई तरीका नहीं
साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि पुलिस, NIA, ATS या किसी अन्य जांच एजेंसी के नाम से वीडियो कॉल कर गिरफ्तारी का डर दिखाया जाए और पैसे मांगे जाएं तो रकम ट्रांसफर न करें।
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