गोपालपुरा के कोचिंग सेंटरों को राहत नहीं, सुप्रीम कोर्ट बोला- नियम टूटे तो होगी सीलिंग
समझें क्या है पूरा मामला
- गोपालपुरा बाईपास पर चल रहे कोचिंग सेंटर को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं।
- SC ने कहा कि बिल्डिंग नियमों के विपरीत चल रहे तो सीलिंग नहीं रुकेगी।
- जेडीए ने सर्वे के बाद 134 भवनों और परिसरों को नोटिस दिए हैं।
- कोचिंग संचालकों ने रखी सस्ती जगह की मांग।
- धमकी मामले में पुलिस कार्रवाई के निर्देश।
जयपुर। जयपुर के गोपालपुरा बाईपास पर चल रहे कोचिंग सेंटरों को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली। कोर्ट ने साफ कहा कि मास्टर प्लान या बिल्डिंग नियमों के खिलाफ इस्तेमाल हो रहे भवनों में कोचिंग सेंटर चल रहे, तो उनकी सीलिंग नहीं रोकी जा सकती।
रिहायशी इलाकों में नियमों के खिलाफ चल रही कमर्शियल गतिविधियों पर भी कोर्ट ने सख्त रुख रखा। दूसरी तरफ कोचिंग संचालकों ने प्रताप नगर के कोचिंग हब में रियायती दर या किराए पर जगह देने की मांग रखी। कोर्ट ने उन्हें अपना प्रस्ताव राजस्थान हाउसिंग बोर्ड और न्यायमित्र को देने को कहा।
सुप्रीम कोर्ट ने कोचिंग सेंटरों को राहत नहीं दी
मामले की सुनवाई जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच में हुई। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट गोपालपुरा बाईपास और आसपास के रिहायशी इलाकों में कोचिंग और दूसरी गतिविधियों से लोगों को हो रही परेशानी पर सवाल उठा चुका है। सुनवाई शुरू होते ही कोर्ट में वकीलों को कथित तौर पर जान से मारने की धमकी देने का मुद्दा भी उठा।
सीनियर एडवोकेट रंजीत कुमार और दूसरे वकीलों ने कोर्ट को इसकी जानकारी दी। मामले में 10-B कॉलोनी विकास समिति की तरफ से पैरवी कर रहे सीनियर एडवोकेट राजदीपक रस्तौगी और समिति अध्यक्ष एडवोकेट वीरेंद्र अग्रवाल को धमकी देने का आरोप है।
इस मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। धमकी का मामला गोपालपुरा बाईपास से कोचिंग संस्थानों को दूसरी जगह शिफ्ट करने की मांग वाली सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही से जुड़ा बताया गया है। कोर्ट को बताया गया कि FIR दर्ज होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।
DGP-CS को बुलाने की चेतावनी
इस पर कोर्ट ने राजस्थान सरकार के वकील को बुलाया। बेंच ने उनसे DGP से निर्देश लेने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक तौर पर कहा कि जल्द प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो मुख्य सचिव और डीजीपी को 24 सितंबर को कोर्ट में बुलाया जा सकता। सरकार की तरफ से बताया गया कि मामले में बयान दर्ज किए जा रहे हैं। इस पर भी कोर्ट ने नाराजगी जताई और जल्द ठोस कार्रवाई करने को कहा।
JDA ने 134 भवनों को नोटिस दिए
सुनवाई के दौरान JDA की कार्रवाई का ब्योरा भी सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा गया। जयपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी के हलफनामे के मुताबिक गोपालपुरा बाईपास क्षेत्र में संयुक्त सर्वे के बाद 134 भवनों और परिसरों को नोटिस दिए गए। 44 भवनों को सील किया गया। इनमें 26 कोचिंग सेंटर और 18 लाइब्रेरी शामिल हैं। तीन कोचिंग सेंटर दूसरी जगह शिफ्ट हुए और 14 बंद मिले। इस तरह कुल 66 मामलों में कार्रवाई की स्थिति सामने आई।
JDA ने कोर्ट को बताया था कि नियम तोड़कर चल रहे बाकी संस्थानों के खिलाफ भी सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी।
कोचिंग वालों ने मांगी सस्ती जगह
कोचिंग संचालकों की तरफ से कोर्ट में कहा गया कि वे प्रताप नगर स्थित कोचिंग हब में जाने के लिए तैयार हैं। परेशानी वहां जगह के आवंटन को लेकर है।उनकी तरफ से कहा गया कि हाउसिंग बोर्ड नीलामी के जरिए जगह दे रहा है। ऐसे में छोटे कोचिंग संचालकों के लिए प्रॉपर्टी खरीदना मुश्किल होगा। नीलामी में बड़े संस्थान ही जगह खरीद पाएंगे। इसी आधार पर मांग की गई कि कोचिंग हब में जगह रियायती दर पर दी जाए या किराए पर उपलब्ध कराई जाए।
प्रताप नगर में राजस्थान हाउसिंग बोर्ड ने कोचिंग हब तैयार किया है। इससे पहले अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने गोपालपुरा बाईपास से कोचिंग संस्थानों और PG को वहां शिफ्ट करने को लेकर निर्देश दिए थे।
प्रस्ताव पर विचार करेगा बोर्ड
सुप्रीम कोर्ट ने कोचिंग संचालकों से कहा कि वे अपनी मांग और प्रस्ताव मामले के न्यायमित्र और राजस्थान हाउसिंग बोर्ड को दें। हाउसिंग बोर्ड और न्यायमित्र इस प्रस्ताव पर विचार करेंगे। इसके बाद अपनी रिपोर्ट कोर्ट के सामने रखेंगे। यानी कोचिंग हब में रियायती दर या किराए पर जगह मिलेगी या नहीं, इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
कमर्शियल पट्टे की दलील
सुनवाई में कुछ कोचिंग और भवन मालिकों ने अलग दलील दी। उन्होंने कहा कि उनके पास कमर्शियल पट्टे हैं। इसलिए उनके भवनों में चल रहे कोचिंग सेंटर कानूनी हैं और उन्हें सील नहीं किया जाना चाहिए। इसके जवाब में एडवोकेट राजदीपक रस्तौगी ने कहा कि JDA ने नोटिस मास्टर प्लान के खिलाफ भू-उपयोग करने के आधार पर दिए हैं। उनका कहना था कि कमर्शियल और इंस्टीट्यूशनल उपयोग अलग-अलग हैं। मास्टर प्लान में भी दोनों के लिए अलग प्रावधान और नियम हैं।
नियम टूटे तो सीलिंग नहीं रुकेगी
सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर साफ किया कि अगर कोई भवन मास्टर प्लान के खिलाफ इस्तेमाल हो रहा है या बिल्डिंग रेगुलेशन तोड़कर बनाया गया है और उसमें कोचिंग सेंटर चल रहा है तो ऐसे भवन की सीलिंग पर रोक नहीं लगाई जा सकती। कोर्ट ने रिहायशी इलाकों में नियमों के खिलाफ चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को बंद करने की बात भी कही।
गोपालपुरा बाईपास के कोचिंग सेंटरों का मामला पिछले कई हफ्तों से चल रहा है। इससे पहले JDA, नगर निगम और हाउसिंग बोर्ड ने इलाके में संयुक्त सर्वे भी किया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद JDA ने कार्रवाई तेज की थी। अब इस मामले में अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी।
यह खबरें भी पढ़ें...
कोचिंग इंस्टिट्यूट हटाने की पैरवी करने वाले एडवोकेट आर डी रस्तोगी को जान से मारने की धमकी
गोपालपुरा में जाम से व्यापारी बेहाल, JDA से कोचिंग संस्थानों को शिफ्ट करने की मांग
जयपुर अग्निकांड: मानव अधिकार आयोग सख्त, कलेक्टर-कमिश्नर से 13 बिंदुओं पर मांगी रिपोर्ट
Rajasthan Top News: निकायों में BJP का दबदबा, जयपुर अग्निकांड पर 13 सवाल