खजाना केस में मजदूरों ने उगले कई राज, लंदन बैंक 1860 की लगी मिली मुहर
समझें क्या है पूरा मामला
- जयपुर हवेली खजाना केस में मजदूरों ने उगले कई राज।
- 1500 मुगलकालीन चांदी के सिक्के 5 लोगों में बंटे थे।
- किसी ने शादी में खर्च किए, किसी ने शराब में उड़ाए।
- पुलिस ने अब तक सिर्फ 16 चांदी के सिक्के बरामद किए।
- 1860 की लंदन बैंक मुहर वाली चांदी की सिल्लियां मिलीं।
जयपुर में 200 साल पुरानी हवेली की खुदाई में निकला खजाना चुराने वाले ठेकेदार और मजदूरों ने पूछताछ में कई राज उगले हैं। चांदी के 1500 मुगलकालीन सिक्कों को 5 लोगों ने बराबर हिस्सों में बांट लिया था, यानी हर एक के हिस्से में 300-300 सिक्के आए थे।
सिक्कों का किसने क्या किया
एक मजदूर ने सिक्के बेचकर 9 लाख रुपए कमाए। दूसरे मजदूर ने यह रकम अपनी बेटी की शादी में खर्च कर दी। तीसरे मजदूर ने इससे अपना पुराना कर्ज उतारा। वहीं एक मजदूर सिक्के बेचकर मिले पैसों से रोजाना शराब पीने लगा। उसके पास आखिर में सिर्फ 12 सिक्के ही बचे थे, जिन्हें पुलिस ने बरामद कर लिया है।
खुदाई में पौने 2 करोड़ रुपए कीमत की चांदी की सिल्लियां भी मिली थीं। जांच में पता चला कि ये सिल्लियां लंदन के सेंट्रल बैंक, यानी आज के बैंक ऑफ इंग्लैंड से करीब 160 साल पहले जारी हुई थीं।
ठेकेदार के घर हुआ था बंटवारा
माणक चौक थाना पुलिस के अनुसार हवेली तोड़ने वाला ठेकेदार महेश मल्होत्रा खुदाई में मिले चांदी के सिक्के अपने घर ले गया था। खुदाई के काम में ठेकेदार सहित कुल 5 लोग शामिल थे, इसलिए सभी के हिस्से में 300-300 सिक्के आए।
रामगंज निवासी ठेकेदार महेश मल्होत्रा उर्फ छोटू खटीक ने मजदूर अनुज अरोड़ा के साथ मिलकर अपने हिस्से के सिक्कों को गला दिया और बाजार में 9 लाख रुपए में बेच दिया।
मजदूर जगदीश रजोरिया ने सिक्के बेचकर मिली रकम अपनी होमगार्ड बेटी की शादी में खर्च कर दी। मजदूर ओमप्रकाश खटीक उर्फ पप्पू ने करीब साढ़े 4 लाख रुपए में सिक्के बेचकर अपना कर्ज चुका दिया। वहीं मजदूर रजनी मल्होत्रा सिक्के मिलने के बाद लगातार शराब के नशे में रहने लगा।
रोज सिक्के देकर खरीदता था शराब
पुलिस पूछताछ में मजदूर रजनी ने बताया कि उसने कई ज्वेलर्स के पास सिक्के बेचने की कोशिश की। लेकिन किसी को उस पर भरोसा नहीं हुआ, इसलिए वह सिक्के बेच नहीं पाया। इससे परेशान होकर पैसे खत्म होने पर वह रामगंज स्थित एक शराब की दुकान पर पहुंचा।
उसने सेल्समैन को चांदी का एक सिक्का देकर शराब की बोतल खरीदी। अगले दिन फिर सिक्का लेकर पहुंचा, लेकिन सेल्समैन ने शराब देने से इनकार कर दिया। इसके बाद रजनी अलग-अलग शराब की दुकानों से सिक्के देकर शराब खरीदने लगा।
पुलिस ने वाइन शॉप के सेल्समैन से पूछताछ कर इस बात की पुष्टि की। इसी जानकारी के आधार पर जब पुलिस ने रजनी के घर तलाशी ली, तो वहां से सिर्फ 12 चांदी के सिक्के मिले।
लंदन के सेंट्रल बैंक की निकली सिल्लियां
मास्टरमाइंड ठेकेदार महेश मल्होत्रा ने बाकी मजदूरों से चांदी की सिल्लियों का राज छिपाकर रखा था। पुलिस ने अब तक दो सिल्लियां बरामद की हैं, जिनमें से एक का वजन 31 किलो और दूसरी का वजन 35 किलो है।
जांच में सामने आया है कि ये चांदी की सिल्लियां वर्ष 1860 की बनी हुई हैं, जिन पर लंदन के सेंट्रल बैंक की मुहर लगी है। अब तक कुल 16 चांदी के सिक्के ही बरामद हो सके हैं, जिनकी शुद्धता 80 प्रतिशत बताई जा रही है।
सोने के कलश का राज
हवेली की खुदाई में सोने का कलश निकलने का भी दावा किया जा रहा था। माणक चौक थाना सीआई (CI – Circle Inspector) राकेश ख्यालिया के अनुसार सभी आरोपियों से 5 अलग-अलग तरीकों से पूछताछ की गई। लेकिन किसी भी सुराग से यह पुष्टि नहीं हो सकी कि खुदाई या तोड़फोड़ के दौरान सोने का कलश मिला हो।
अलग-अलग टीमों ने आरोपियों से वैज्ञानिक तरीके, भावनात्मक तरीके, क्रॉस वेरिफिकेशन, सख्ती और आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की। सभी का जवाब एक जैसा ही रहा कि खुदाई में सिर्फ चांदी के 1500 सिक्के और 2 सिल्लियां ही निकली थीं।
मजदूर अनुज की बात से खुला पूरा राज
पुलिस पूछताछ में मजदूर अनुज ने बताया कि उसे शक हुआ था कि ठेकेदार महेश मल्होत्रा ने उसे हिस्से में कम सिक्के दिए थे। जब उसने ठेकेदार से बाकी हिस्सा मांगा, तो ठेकेदार ने बहाना बनाया कि मकान मालिक को इस बारे में पता चल गया था, इसलिए कुछ सिक्के उसे भी देने पड़े।
इसी दौरान अनुज शराब पीने लगा। कुछ दिनों बाद नशे की हालत में वह हवेली मालिक से यह पूछने पहुंच गया कि ठेकेदार ने उसके हिस्से में कितने सिक्के दिए थे। वहां उसे मालिक राहुल सेठी का एक दोस्त मिल गया, जिसने अनुज की पूरी बातचीत रिकॉर्ड कर हवेली मालिक को भेज दी। इसी रिकॉर्डिंग से यह पूरा राज खुला कि हवेली की खुदाई में मिला खजाना मजदूरों ने आपस में बांट लिया था।
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