खराब हेयरकट के बहाने निकाला था नौकरी से, अब पांच सितारा होटल को देना होगा 22.5 लाख का हर्जाना
News In Short
- जयपुर के एक होटल ने कर्मचारी को खराब हेयरकट के नाम पर नौकरी से निकाला।
- कर्मचारी अजय बहादुर ने होटल के फैसले को लेबर कोर्ट में दी चुनौती।
- नौकरी से निकालने पर साढ़े उन्नीस साल तक चली कानूनी लड़ाई।
- कोर्ट ने माना लेबर यूनियन की गतिविधियों के कारण निकाला था कर्मचारी को।
- कोर्ट ने होटल को 22.50 लाख रुपए का मुआवजा देने का आदेश दिया।
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राजस्थान में जयपुर के राजपूताना शेरटन होटल को अपने एक कर्मचारी को खराब हेयरकट के आरोप में नौकरी से निकालना भारी पड़ गया। साढे उन्नीस साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद लेबर कोर्ट ने कहा है कि प्रार्थी कर्मचारी अजय बहादुर को बालों की कटिंग के लिए नहीं, बल्कि लेबर यूनियन गतिविधियों की वजह से निशाना बनाया गया था। कोर्ट ने कर्मचारी की बर्खास्तगी को रद्ध करते हुए होटल मैनेजमेंट को कर्मचारी को 22.50 लाख रुपए का मुआवजा देने के आदेश दिए हैं।
जज दिनेश गुप्ता ने कहा है कि बेहतर होगा कि राजपूताना शेरटन होटल के जनरल मैनेजर एक मई को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर कर्मचारी को कुल 22,50,000 रुपए का चैक या डीडी अपने ऑफिस में या कोर्ट में दे दें। कोर्ट ने कहा है कि यदि एक मई तक पैसा नहीं दिया तो कर्मचारी एक मई, 2026 से अदायगी के दिन तक 18 फीसदी ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी होगा।
यह है मामला
एडवोकेट कुणाल रावत ने बताया कि प्रार्थी अजय बहादुर होटल राजपूताना शेरटन में काम करता था। होटल ने उसे बालों की सही कटिंग नहीं के आधार पर 1 नवंबर, 2006 को नौकरी से निकाल दिया था। अजय ने इसकी शिकायत श्रम आयुक्त व समझौता अधिकारी को दी थी। लेकिन समझौता नहीं होने पर सरकार ने रेफरेंस लेबर कोर्ट को भेज दिया था।
साढे उन्नीस साल तक चली कानूनी लड़ाई के बाद कोर्ट ने माना है कि प्रार्थी कर्मचारी को यूनियन गतिविधियों में भाग लेने के कारण नौकरी से बर्खास्त किया था। बेतरतीब तरीके से बाल कटवाने का आरोप बेबुनियाद और आधारहीन है। ना ही बालों की सही कटिंग होना किसी कर्मचारी को नौकरी से निकालने का उचित कारण ही है।
होटल मैनेजमेंट की ओर से पेश गवाहों ने भी विरोधाभासी बयान दिए हैं। एक गवाह ने उसे गंजा बताया है तो कटिंग बेतरतीब होने का आरोप ही निराधार हो गया।
अंदरुनी जांच भी फौरी तौर पर
कोर्ट ने कहा है कि मैनेजमेंट की अंदरुनी जांच भी फौरी तौर पर की गई है। आरोप पत्र और जांच में बालों की बेतरतीब कटिंग जैसे बेबुनियाद आरोप लगाए हैं। मैनेजमेंट ने किसी हेयर ड्रेसर या स्वतंत्र गवाह को भी पेश नहीं किया है, जो यह बता सके कि सही कटिंग कैसे होनी चाहिए थी। ना ही कोई फोटोग्राफ पेश किए हैं। एक गवाह ने प्रार्थी की कटिंग को सही बताया है।
कोर्ट ने कहा है कि यदि आरोप सही भी माना जाए तो ऐसे मामूली आरोप में कर्मचारी को बर्खास्त करना की सजा अत्यधिक कठोर और मनमानी है। ऐसे आरोप में तो कर्मचारी को चेतावनी देने जैसी हल्की सजा देनी चाहिए थी। विशेषकर उस स्थिति में, जब प्रार्थी कर्मचारी के विरुद्ध पहले दुराचरण की कोई शिकायत तक नहीं है। मैनेजमेंट का आरेाप है कि होटल के एक अतिथि ने प्रार्थी की बेतरतीब कटिंग की शिकायत की थी। लेकिन उस अतिथि की गवाही तक नहीं करवाई गई।
कोर्ट ने कहा है कि यूनियन गतिविधियों में भाग लेने के कारण होटल मैनेजमेंट ने प्रार्थी पर झूठा आरेाप लगाकर अत्याचार किया है। यह व्यवहार अनफेयर लेकर प्रैक्टिस में आता है।
60 साल से ज्यादा है उम्र इसलिए
कोर्ट ने प्रार्थी कर्मचारी की एक नवंबर, 2006 की बर्खास्तगी को अवैध घेाषित करके रद्ध कर दिया है। बर्खास्तगी के बाद साढे उन्नीस साल का लंबा समय हो गया है। प्रार्थी इस दौरान 60 वर्ष की उम्र भी पूरी कर चुका है।
इसलिए उसे बैक-वेजेज व समस्त परिलाभों के साथ पुन: नौकरी में बहाल करने का आदेश देना कानूनी तौर पर सही नहीं होगा। इसलिए होटल प्रार्थी को एकमुश्त मुआवजे के 21 लाख और खर्चे के डेढ़ लाख रुपए अदा करे।
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