राजस्थान AGTF की कामयाबी: किडनैपर का यूएई से प्रत्यर्पण, जयपुर में होगी पूछताछ
समझें क्या है पूरा मामला
- जयपुर अपहरण कांड का मास्टरमाइंड दुबई से गिरफ्तार
- पुलिस वर्दी पहन व्यापारी का अपहरण, फिरौती मांगी, भागा दुबई
- इंटरपोल की मदद से एजीटीएफ ने दबोचा करण आसवानी
- 31 अगस्त को रवाना हुई टीम, गुरुवार रात आरोपी लेकर पहुंची
- 25 साल का आपराधिक इतिहास, 2000 में पहला हत्या का मामला
जयपुर के खोह नागोरियान थाना क्षेत्र में पुलिस की वर्दी का सहारा लेकर व्यापारी नरेंद्र नाथ दत्ता का अपहरण करने और परिजनों से भारी फिरौती मांगने वाले संगठित आपराधिक गिरोह के मुख्य सरगना करण आसवानी उर्फ कमल सिंधी का विदेश में छिपा ठिकाना भी उसे पुलिस से नहीं बचा सका।
वारदात के बाद साथी आरोपियों के पकड़े जाने पर आरोपी करण आसवानी फर्जीवाड़े और संगठित अपराध के दम पर विदेश भाग निकला था। हालांकि, राजस्थान एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) और राजस्थान पुलिस के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चले तलाशी अभियान के आगे उसकी फरारी खत्म हो गई।
पुलिस वर्दी में अपहरण और आगरा में बनाया बंधक
21 अगस्त 2025 को खोह नागोरियान थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। पीड़ित व्यापारी नरेंद्र नाथ दत्ता अपने परिचित और चालक योगेश के साथ वैशाली नगर जाने के लिए निकले थे, जिसके बाद उनका किडनैप कर लिया गया और परिजनों से फोन पर फिरौती मांगी गई।
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए व्यापारी और उनके चालक को सकुशल छुड़ाया। जांच में पुलिस ने गैंग के साथी आरोपियों हर्ष गौतम, कनक गांगुली और अजय बेनीवाल उर्फ शाका को गिरफ्तार कर वारदात में प्रयुक्त स्विफ्ट कार और अपहृतों की इनोवा क्रिस्टा बरामद की थी। आरोपियों ने पुलिस वर्दी पहनकर अपहरण किया था और पीड़ितों को आगरा में बंधक बनाकर रखा था।
रेड कॉर्नर नोटिस से अबू धाबी में कसा शिकंजा
मामले में जब करण आसवानी की मुख्य भूमिका सामने आई, तो वह देश छोड़कर दुबई भाग गया। ANTF व AGTF एडीजी दिनेश एमएन के निर्देशन में एजीटीएफ ने हार नहीं मानी और आरोपी के खिलाफ इंटरपोल के माध्यम से रेड कॉर्नर नोटिस (RCN) जारी करवाया।
डीआईजी योगेश यादव और एएसपी सिद्धांत शर्मा के सुपरविजन में टीम ने अबू धाबी स्थित इंटरपोल के साथ लगातार तकनीकी लोकेशन और इनपुट साझा किए। लोकेशन ट्रेस होने पर अबू धाबी इंटरपोल ने उसे डिटेन कर लिया।
31 अगस्त को दुबई रवाना हुई थी विशेष टीम
आरोपी के डिटेन होते ही प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई। एएसपी सिद्धांत शर्मा के नेतृत्व में डीएसपी रवींद्र प्रताप, पुलिस निरीक्षक सुनील जांगिड़ और राम सिंह नाथावत की टीम 31 अगस्त को जयपुर से दुबई के लिए रवाना हुई।
कानूनी कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद टीम गुरुवार देर रात आरोपी करण आसवानी को अपने कब्जे में लेकर जयपुर पहुंची। अब उसे अदालत में पेश कर विस्तृत रिमांड और पूछताछ की जाएगी।
ढाई दशक पुराना आपराधिक इतिहास: 2000 में दर्ज हुआ था पहला मर्डर केस
पकड़े गए करण आसवानी का आपराधिक नेटवर्क कोई नया नहीं, बल्कि ढाई दशक पुराना है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक:
- वर्ष 2000: मुरलीपुरा थाने में पहला हत्या (Murder) का मुकदमा दर्ज।
- वर्ष 2003 व 2005: शिप्रापथ थाने में बलवा, जानलेवा हमला, घर में घुसकर मारपीट और चोरी के केस।
- वर्ष 2009: मानसरोवर थाने में बलवा और जानलेवा हमले का मामला।
- वर्ष 2023: बिंदायका, खोह नागोरियान और मानसरोवर थानों में अपहरण, मारपीट और रंगदारी/जबरन वसूली के केस।
- वर्ष 2025: खोह नागोरियान थाने में व्यापारी का किडनैपिंग व फिरौती का मामला।
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