होटल क्लार्क आमेर को सीज करने का अल्टीमेटम, कोर्ट ने यह सुनाया सख्त फैसला
News In Short
- जयपुर लेबर कोर्ट ने होटल क्लार्क आमेर को दिया अल्टीमेटम, वर्कर को भुगतान करें अन्यथा होगी सीज।
- होटल ने 1992 में कर्मचारी को निकाला, आदेश के बाद भी 10 साल से नहीं दिया बकाया।
- कोर्ट ने 8 जून तक 6.25 लाख रुपए का भुगतान और हर्जाना देने का आख़िरी मौक़ा दिया।
- आदेश का पालन नहीं होने पर जयपुर पुलिस को 9 जून को होटल सीज करने के आदेश।
- होटल प्रबंधन ने लेबर कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन स्टे नहीं मिला।
News In Detail
राजस्थान में जयपुर की लेबर कोर्ट-प्रथम ने मशहूर होटल क्लार्क आमेर को लेकर सख्त रुख दिखाया है। यह मामला वर्कर जगदीश से जुड़ा है। कोर्ट ने माना कि होटल प्रबंधन ने जगदीश को गलत तरीके से हटा दिया। साथ ही प्रबंधन 34 साल से उसके बकाया का भुगतान नहीं कर रहा है।
कोर्ट ने होटल क्लार्क आमेर को 8 जून तक वर्कर जगदीश को 6.25 लाख रुपए का अंतरिम भुगतान करने को कहा है। आदेश की पालन नहीं होने पर जयपुर पुलिस कमिश्नर को नौ जून को होटल सीज करने के आदेश दिए गए हैं। ।
भुगतान नहीं तो जारी होंगे कुर्क आदेश
लेबर कोर्ट के जज दिनेश गुप्ता ने जगदीश की अर्जी पर फैसला सुनाते हुए कड़ी टिप्पणियां की हैं। कोर्ट ने कहा कि 8 जून को ऑफिस समय तक आदेश की पालना नहीं होने पर उसी दिन कुर्की वारंट जारी किए जाएं। साथ ही उसे तामील के लिए जयपुर पुलिस कमिश्नर को भिजवाया जाए। होटल को सीज करने के समय पर्याप्त संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात करने के निर्देश भी दिए हैं।
कोर्ट ने याचिकाकर्ता वर्कर की मांगी गई 24.25 लाख की राशि की एक चौथाई रकम 6 लाख रुपए और खर्च व हर्जाने के 25 हजार रुपए 8 जून तक जमा करवाने केा कहा है। कोर्ट के निर्देश के अनुसार यह पैसा या तो वर्कर के खाते में जमा करवाएं या उसके नाम का चैक या डीडी कोर्ट में पेश करना होगा।
34 साल पहले निकाला था नौकरी से
याचिकाकर्ता जगदीश होटल क्लार्क आमेर में कर्मचारी था। 1 मार्च 1992 को होटल प्रबंधन ने नौकरी से निकाल दिया। इसे कोर्ट में चुनौती दी। 19 अक्टूबर 2015 को कोर्ट ने कर्मचारी को हटाने की कार्यवाही को अवैध और गलत ठहराते हुए वापस नौकरी पर रखने और पिछला बकाया वेतन-भत्ते सहित पूरे लाभ देने के आदेश दिए थे।
कर्मचारी ने मार्च 1992 से लेकर मई 2016 तक की अवधि के वेतन भत्ते देने की मांग करते हुए अदालत में याचिका लगाई थी। लेबर कोर्ट ने कर्मचारी को बकाया देने के आदेश दिए थे, लेकिन होटल प्रबंधन ने अदालती आदेश की पालना में पिछले 10 साल से भुगतान नहीं किया।
कोर्ट ने कहा 34 साल का पहाड़ जैसा लंबा समय गुजरा
जज दिनेश गुप्ता ने फैसले में कहा है कि 1 मार्च 1992 से वर्कर को उसकी आजीविका से वंचित कर दिया गया। कोर्ट के 19 अक्टूबर 2015 को पारित अवॉर्ड के बावजूद न तो कर्मचारी को ड्यूटी पर वापस लिया और न एक रुपए का भुगतान किया गया।
लगभग 34 साल का समय पहाड़ जैसा लंबा गुजर चुका है। इस लंबी अवधि में वर्कर और उसके परिवार को आर्थिक तंगी के कारण भोगी गई पीड़ा का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। यह सब विचलित करने वाले तथ्य और हालात हैं।
अदालत ने नहीं माने होटल मैनेजमेंट के तर्क
होटल क्लार्क आमेर की तरफ से 25 मई को कोर्ट में जवाब पेश किया जा चुका है। कोर्ट ने होटल के तर्कों को मानने से इनकार कर दिया। लेबर कोर्ट ने इससे पहले 17 मार्च को अंतरिम भुगतान और 25 हजार की कोस्ट देने के आदेश दिए थे। कोर्ट ने 18 मई को आदेश रिजर्व कर दिए थे। होटल ने 25 हजार की कोस्ट की राशि भी जमा नहीं करवाई।
अब तक स्टे नहीं मिला
होटल क्लार्क आमेर की तरफ से लेबर कोर्ट के सामने 25 मई को स्पष्टीकरण पेश किया गया। साथ ही लेबर कोर्ट के आदेशों के खिलाफ हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की गई है जो अब तक लंबित है। होटल की याचिका पर हाईकोर्ट ने कोई स्टे नहीं दिया है।
FAQ
- होटल क्लार्क आमेर को लेबर कोर्ट ने क्या आदेश दिया है?
जयपुर की लेबर कोर्ट-प्रथम ने होटल क्लार्क आमेर को वर्कर जगदीश को 8 जून तक 6.25 लाख रुपए का अंतरिम भुगतान करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि भुगतान नहीं होने पर 9 जून को होटल सीज किया जाएगा। - होटल क्लार्क के वर्कर जगदीश को कितना बकाया भुगतान मिलना है और क्यों?
वर्कर जगदीश (Worker Jagdish) को मार्च 1992 से मई 2016 तक के वेतन और भत्ते नहीं दिए गए थे। अदालत ने इसे अवैध हटाने की कार्रवाई मानते हुए बकाया का भुगतान सुनिश्चित करने का आदेश दिया है। इस कारण कुल 6.25 लाख रुपए अंतरिम भुगतान के रूप में जमा करवाने को कहा गया है।
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