जयपुर मेयर की कुर्सी पर घमासान, भाजपा में कोठारी के नाम पर चर्चा तेज!
समझें क्या है पूरा मामला
- जैन समाज को साधने के लिए सुनील कोठारी को मैदान में उतारा गया।
- भाजपा खेमे में पार्टी की पूर्ण जीत और स्पष्ट बहुमत का दावा।
- टिकट कटने और समीकरणों के फेर में पुनीत कर्णावट की राह मुश्किल ।
- बागियों को मनाने और मेयर पद की उम्मीदवारी को लेकर खींचतान जारी ।
राजस्थान में नगर निकाय चुनाव चल रहे हैं और इनमें भी जयपुर नगर निगम चुनावों पर भाजपा-कांग्रेस विशेष रुप से अपनी राजनीतिक ताकत का इस्तेमाल करती हैं।
राज्य की राजधानी होने और राज्य का सबसे बड़ा नगर निगम होने के कारण जयपुर में पार्षद बनना और उससे भी ज्यादा मेयर बनना राजनीतिक रुप से अहम होता है।
जयपुर में मतदान 9 और 11 सितंबर को होना है। दोनों ही पार्टियों ने अपने-अपने उम्मीदवार तय कर दिए हैं। नामांकन वापिस लेने की तारीख 3 सितंबर तक है। इसके बाद स्पष्ट होगा कि कौन-कौन कहां से चुनावी मैदान में डटे रहेंगे। क्यों कि भाजपा और कांग्रेस में बागियों की संख्या भी कम नहीं है। लेकिन,दोनों ही पार्टियां बागियों को मनाने में लगी हुई हैं। जयपुर शुरु से ही भाजपा का गढ़ रहा है और भाजपा को इस बार भी पूर्ण विश्वास है कि उनका ही बोर्ड बनेगा। इन सबके बीच इस बार जयपुर का मेयर बनने को लेकर खींचतान भी शुरु हो गई है।
कोठारी पर लगाया है दांव
भाजपा और राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार भाजपा का बोर्ड बनना तय है। भाजपा का आकलन है कि वह किसी भी स्थिति में 80-90 से कम सीट नहीं जीत रही है। जीत का यह आंकडा ज्यादा तो हो सकता है लेकिन,इससे कम नहीं होगा।
ऐसे में मेयर बनने के लिए पहले से ही राजनीतिक दांव पेंच चले जा रहे हैं। लेकिन,जयपुर के वार्ड नंबर 112 से भाजपा के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष सुनील कोठारी को पार्षद चुनाव लड़वाना भाजपा की विशेष रणनीति का हिस्सा है। भाजपा ने यहां से पूर्व में मेयर रही कुसुम यादव का टिकट काटकर कोठारी टिकट ही इसलिए दिया है कि जीतने पर उन्हें ही मेयर बनाया जाएगा।
जैन समाज का है दबाव
भाजपा में सुनील कोठारी को मेयर बनाने के पीछे जैन समाज का दबाव बताया जा रहा है। भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि भाजपा ने खंडेलवाल,अग्रवाल और राजपूतों और ब्राहणों को सरकार व पार्टी और विशेषकर जयपुर में उचित प्रतिनिधित्व दिया हुआ है। लेकिन,भाजपा के कोर वोट बैंक के एक धड़े जैन समाज का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है।
कोर वोट बैंक का है मामला
सूत्रों के अनुसार जयपुर से ब्राहण सीएम,एक राजपूत डिप्टी सीएम व एक कैबीनेट मंत्री हैं। खंडेलवाल समाज को विधानसभा में टिकट दिया जा चुका है हालांकि वह हार गए। अग्रवाल समाज से भी एक विधायक है। जबकि जैन समाज का राजधानी में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। इसलिए भाजपा के रणनीतिकारों में जैन समाज को सम्मानजनक प्रतिनिधित्व देने की करीब-करीब सहमति बन चुकी है। बताया जा रहा है कि इसी रणनीति के तहत सुनील कोठारी को वार्ड 112 से पार्षद चुनाव लड़ाया जा रहा है कि उन्हें मेयर बनाया जाएगा। अन्यथा उन्हें पार्षद के चुनाव में नहीं उतारा जाता।
लेकिन दावेदार और भी हैं
भाजपा और संघ में भले ही कोठारी को मेयर बनाने की सहमति बन चुकी है लेकिन जैन समाज के दूसरे दावेदार पुनीत कर्णावट की ओर से भी चुनौती मिलने की पूरी संभावना है। कर्णावट मूलत:पूर्व मंत्री राजपाल सिंह शेखावत की कोर टीम का हिस्सा रहे हैं। वह नगर निगम में डिप्टी मेयर भी रहे हैं। उनकी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ से नजदीकी भी किसी से छिपी नहीं है। वह भी मेयर पद पर आंख गड़ाए हुए हैं।
कर्णावट के लिए राह कठिन
पुनीत कर्णावट की राह में मालवीय नगर विधायक कालीचरण सर्राफ एक बड़ा रोड़ा हैं। असल में कर्णावट ने 2023 विधानसभा चुनाव में मालवीय नगर विधानसभा क्षेत्र से टिकट मांगा था। इसके बाद से ही वह सर्राफ की आंख की किरकिरी बने हुए हैं। सर्राफ ने उनके स्थान पर पूर्व पार्षद कुलदीप मिश्रा को पार्टी सिंबल भी दे दिया था। लेकिन,कर्णावट के निर्दलीय नामांकन करने और पार्टी दफ्तर के बाहर धरना देने की धमकी के बाद पार्टी ने उन्हें सिंबल देकर अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित कर दिया। लेकिन,इससे पार्टी में उनकी इमेज प्रभावित हुई है। इसलिए मेयर बनने की उनकी संभावना में कमी आई है।
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