मेयर पद जनरल होते ही बदला दावेदारी का गणित, महिला उमीदवारों ने बनाई पार्षद टिकट से दूरी
समझें क्या है पूरा मामला
- जयपुर मेयर पद की आरक्षण लॉटरी से बदला चुनावी गणित।
- इस बार मेयर सीट सामान्य श्रेणी में रखी गई।
- भाजपा में पुरुष दावेदारों की दावेदारी मजबूत मानी जा रही।
- पिछली बार जयपुर मेयर पद OBC महिला के लिए आरक्षित था।
- कई महिला दावेदार पार्षद टिकट से दूरी बनाने पर विचार कर रहीं।
नगर निगम के मेयर पद की आरक्षण लॉटरी ने भाजपा की दावेदारी का पूरा गणित बदल दिया है। जयपुर सहित प्रदेश के 4 निगमों में मेयर पद इस बार सामान्य श्रेणी में है। पिछली बार जयपुर मेयर पद ओबीसी महिला के लिए आरक्षित था। अब सीट सामान्य होने से पुरुष दावेदारों की स्थिति मजबूत मानी जा रही है। कई महिला दावेदार अब पार्षद टिकट से भी दूरी बनाती दिख रही हैं।
मेयर पद इस बार सामान्य श्रेणी में
नगर निगम के मेयर पद की आरक्षण लॉटरी के बाद भाजपा के भीतर दावेदारी को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। जयपुर में मेयर पद इस बार सामान्य यानी जनरल ओपन श्रेणी में है।
तकनीकी रूप से देखा जाए तो इस सीट पर महिला और पुरुष दोनों मेयर बन सकते हैं। लेकिन भाजपा का बोर्ड बनने की स्थिति में पार्टी के भीतर पुरुष चेहरे की दावेदारी को ज्यादा मजबूत माना जा रहा है।
प्रदेश के 10 में से सिर्फ 4 निगम सामान्य
प्रदेश के कुल 10 नगर निगमों में से 6 में मेयर पद महिलाओं के लिए आरक्षित है। जयपुर समेत सिर्फ 4 निगम ही इस बार सामान्य श्रेणी में आए हैं।
इस आरक्षण व्यवस्था का सीधा असर टिकट के दावेदारों की रणनीति पर पड़ रहा है। जिन निगमों में सीट सामान्य है, वहां दावेदारों की संख्या और मुकाबला दोनों बढ़ने की संभावना है।
महिला दावेदारों ने बनाई दूरी
पार्टी सूत्रों के मुताबिक हवामहल से 2, झोटवाड़ा से 1 और सांगानेर से 3 महिला दावेदार अब चुनाव न लड़ने पर विचार कर रही हैं। यह जानकारी अभी अनौपचारिक सूत्रों पर आधारित है और पार्टी की ओर से इसकी सार्वजनिक पुष्टि नहीं हुई है।
सूत्रों के मुताबिक इन महिला दावेदारों की तैयारी मेयर पद को ध्यान में रखकर चल रही थी। सीट सामान्य होने के बाद अब उन्होंने धीरे-धीरे पार्षद टिकट से भी दूरी बनानी शुरू कर दी है।
पुरुष दावेदारों की संख्या बढ़ने की संभावना
सामान्य सीट आने के बाद पुरुष दावेदारों की संख्या बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। इसी वजह से महिला दावेदारों को मेयर बनने की संभावना कम नजर आ रही है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि यही वजह है कि कई महिला नेता अब पार्षद पद के लिए भी अपनी दावेदारी को लेकर पुनर्विचार कर रही हैं।
पिछली बार ओबीसी महिला, इस बार बदली तस्वीर
पिछले नगर निगम चुनाव में जयपुर मेयर पद ओबीसी महिला के लिए आरक्षित था। इसी आरक्षण के तहत भाजपा ने डॉ. सौम्या गुर्जर को मेयर बनाया था।
इस बार सीट सामान्य होने के बाद भाजपा के पास जयपुर में पुरुष चेहरे को आगे करने का भी विकल्प खुला है। इससे पार्टी के भीतर संभावित दावेदारों की नई सूची पर चर्चा शुरू हो गई है।
आगे क्या
फिलहाल यह पूरी जानकारी पार्टी के आंतरिक सूत्रों पर आधारित है। भाजपा की ओर से अभी किसी भी दावेदार के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
आने वाले दिनों में पार्षद टिकट के आवंटन और मेयर पद की उम्मीदवारी को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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