जयपुर में अचार की टंकियों में मरी छिपकलियां, 85 हजार किलो माल सीज, पहले भी मिली शिकायत, निगरानी पर उठे सवाल

Raghvendra Singh Rathore | Oct 20, 2026, 16:52 IST
जयपुर की मुहाना मंडी में अचार की टंकियों में मरी छिपकलियां मिलीं।
जयपुर की मुहाना मंडी में श्री श्याम फूड्स के गोदाम में अचार की टंकियों से मरी छिपकलियां और कीड़े मिले। विभाग ने 85 हजार किलो अचार और कच्चा माल सीज कर गोदाम बंद कराया। सीएमएचओ मनीष मित्तल ने बताया कि पहले भी शिकायत मिली थी। अब ग्रामीण इलाकों में सप्लाई हुए उत्पादों की जांच होगी।

त्योहारी सीजन में मिठाई, मावा और दूसरे खाद्य पदार्थों की जांच के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमें सक्रिय हो जाती हैं। लेकिन सवाल यह है कि बाकी दिनों में खाद्य सामग्री बनाने वाले प्रतिष्ठानों की निगरानी कितनी होती है? जयपुर की मुहाना मंडी में अचार बनाने वाली फर्म पर हुई कार्रवाई ने विभाग की नियमित जांच व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।



मुहाना मंडी स्थित श्री श्याम फूड्स में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम को अचार की टंकियों में मरी हुई छिपकलियां, कीड़े-मकोड़े और दूसरे मृत जीव मिले। परिसर में जगह-जगह जाले लगे थे और काफी गंदगी थी। विभाग ने करीब 85 हजार किलो अचार और कच्चा माल सीज कर गोदाम सील कर दिया है।



चौंकाने वाली बात यह है कि विभाग को इस फर्म के खिलाफ पहले भी शिकायत मिली थी। अब सवाल उठ रहा है कि शिकायत मिलने से पहले इस प्रतिष्ठान की आखिरी जांच कब हुई थी और उस दौरान क्या स्थिति मिली थी?



बेसमेंट में 100 टंकियां, अंदर मरी छिपकलियां और कीड़े

19 अक्टूबर को खाद्य सुरक्षा विभाग की संयुक्त टीम ने मुहाना मंडी स्थित श्री श्याम फूड्स पर कार्रवाई की। जांच के दौरान बेसमेंट में प्लास्टिक की करीब 100 टंकियां मिलीं। इनमें अचार और उसे बनाने का कच्चा माल रखा हुआ था।



टंकियों में मरी हुई छिपकलियां, कीड़े-मकोड़े और दूसरे मृत जीव मिले। आसपास मकड़ियों के जाले लगे हुए थे। परिसर में साफ-सफाई के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे विभाग की कार्रवाई में करीब 5 हजार किलो तैयार अचार और 80 हजार किलो कच्चा माल मिला। इसमें कैरी, नींबू, गाजर और मिर्च जैसी सामग्री शामिल थी।



टीम ने खाद्य सामग्री के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे हैं। प्रयोगशाला की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि नमूने खाद्य सुरक्षा मानकों पर खरे उतरते हैं या नहीं।



पहले भी मिली थी शिकायत, फिर इतनी गंदगी में कैसे चलता रहा कारोबार?

इस कार्रवाई में सबसे बड़ा सवाल खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर है। सीएमएचओ जयपुर द्वितीय डॉ. मनीष मित्तल ने द सूत्र से बातचीत में पुष्टि की कि श्री श्याम फूड्स के खिलाफ विभाग को पहले भी शिकायत मिली थी। उसी शिकायत के आधार पर संयुक्त टीम ने कार्रवाई की।



ऐसे में सवाल है कि फर्म का पिछला निरीक्षण कब हुआ था? क्या पहले कभी यहां साफ-सफाई की कमी मिली थी? अगर मिली थी तो सुधार के लिए क्या निर्देश दिए गए थे? जयपुर में अचार, पापड़, नमकीन, मसाले और दूसरी खाद्य सामग्री बनाने वाले छोटे प्रतिष्ठान और गृह उद्योग भी संचालित होते हैं। इनकी नियमित जांच कितनी बार होती है, यह जानना जरूरी है।



खासकर ऐसे प्रतिष्ठानों में, जहां बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री तैयार कर बाजार में भेजी जाती है, सफाई और भंडारण की नियमित निगरानी बेहद जरूरी है।



डॉ. मनीष मित्तल बोले- पहले शिकायत मिली थी, अब सप्लाई किए गए उत्पाद भी जब्त करेंगे

सीएमएचओ जयपुर द्वितीय डॉ. मनीष मित्तल ने द सूत्र को बताया कि शिकायत मिलने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग की संयुक्त टीम ने श्री श्याम फूड्स की जांच की। उन्होंने बताया कि गोदाम के बेसमेंट में बड़ी संख्या में प्लास्टिक की टंकियां रखी थीं। इनमें मरी हुई छिपकलियां, कीड़े-मकोड़े और दूसरे मृत जीव मिले। पूरे परिसर में काफी गंदगी थी।



डॉ. मित्तल के अनुसार, शुरुआती जांच में पता चला है कि यहां तैयार होने वाला अचार मुख्य रूप से जयपुर के ग्रामीण इलाकों में सप्लाई किया जा रहा था। अब विभाग यह पता लगा रहा है कि अचार किन-किन दुकानों और प्रतिष्ठानों तक पहुंचा है। इन उत्पादों की पहचान कर उन्हें भी जब्त करने की कार्रवाई की जाएगी।



उन्होंने बताया कि गोदाम सील कर दिया गया है। अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों पर भी निगरानी रखी जा रही है और शिकायत मिलने पर जांच की जा रही है।



गांवों में पहुंच चुका अचार, अब दुकानों तक पहुंचेगी जांच

इस मामले में केवल गोदाम सील करना ही पर्याप्त नहीं है। बड़ा सवाल उन उत्पादों का है, जो कार्रवाई से पहले बाजार में भेजे जा चुके हैं। विभाग की शुरुआती जांच के मुताबिक, श्री श्याम फूड्स का अचार जयपुर के ग्रामीण इलाकों में सप्लाई किया जा रहा था।



विभाग अब सप्लाई नेटवर्क की जांच कर रहा है। जिन दुकानों और प्रतिष्ठानों तक संबंधित उत्पाद पहुंचने की जानकारी मिलेगी, वहां से माल चिह्नित कर जब्त करने की कार्रवाई की जाएगी। इससे यह सवाल भी उठता है कि क्या विभाग के पास ऐसे प्रतिष्ठानों के बिक्री रिकॉर्ड और सप्लाई की नियमित निगरानी की कोई व्यवस्था है?



त्योहारी सीजन में जांच तेज, बाकी दिनों की निगरानी का हिसाब कौन देगा?

त्योहारों के दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से मिलावट के खिलाफ विशेष अभियान चलाए जाते हैं। मिठाई, मावा, दूध, घी और दूसरे खाद्य पदार्थों के नमूने लिए जाते हैं।लेकिन मुहाना मंडी की इस कार्रवाई ने यह सवाल खड़ा किया है कि पूरे साल चलने वाले खाद्य कारोबार की नियमित जांच किस तरह की जाती है।



क्या विभाग के पास जोखिम के आधार पर निरीक्षण की कोई समयबद्ध योजना है? क्या शिकायत मिलने के अलावा भी खाद्य निर्माण इकाइयों का निरीक्षण होता है? छोटे खाद्य उद्योगों और बड़े गोदामों में साफ-सफाई की जिम्मेदारी केवल संचालकों की नहीं है। खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित कराना विभाग की भी जिम्मेदारी है।



फर्म संचालक सुनील पारीक ने कुछ भी बोलने से किया इनकार

श्री श्याम फूड्स के संचालक सुनील पारीक से द सूत्र ने इस मामले में बात की। हालांकि, उन्होंने खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई और गोदाम में मिली गंदगी को लेकर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। विभाग की कार्रवाई के बाद फर्म का गोदाम सील कर दिया गया है। फिलहाल वहां कारोबार बंद है।



1700 किलो पैक्ड अचार और सॉस भी सीज

खाद्य सुरक्षा विभाग ने कार्रवाई के दौरान करीब 1700 किलो पैक्ड अचार और सॉस भी सीज किया है। टीम ने सॉस, मिक्स अचार और आम के अचार के नमूने लिए हैं। इन्हें प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया है।



विभाग ने फर्म का कारोबार बंद कर दिया है। खाद्य लाइसेंस निलंबित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। आगे की कानूनी कार्रवाई जांच रिपोर्ट और संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर होगी।



जनता की सेहत का सवाल, सिर्फ गोदाम सील करना काफी नहीं

मुहाना मंडी की कार्रवाई ने खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के सामने दो बड़ी चुनौतियां रखी हैं। पहली, खाद्य सामग्री बनाने वाले प्रतिष्ठानों में साफ-सफाई और भंडारण के नियमों का पालन सुनिश्चित करना। दूसरी, खराब परिस्थितियों में तैयार होने की आशंका वाले उत्पादों को बाजार तक पहुंचने से रोकना।



अब विभाग के सामने चुनौती है कि श्री श्याम फूड्स से सप्लाई हुए उत्पादों की पहचान करे और यह भी स्पष्ट करे कि ऐसे प्रतिष्ठानों की नियमित जांच के लिए क्या व्यवस्था है। क्योंकि सवाल सिर्फ 85 हजार किलो अचार और कच्चे माल का नहीं, बल्कि उन लोगों की सेहत का भी है, जो बाजार से खाद्य सामग्री खरीदकर अपने घर ले जाते हैं।



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