नगर निगम कमिश्नर की कुर्सी कुर्क, 13 साल पुराने मामला में उठाया यह कदम
News In Short
- जयपुर नगर निगम में कोर्ट के आदेश के बाद कमिश्नर की कुर्सी कुर्क की गई।
- यह कार्रवाई 13 साल पुराने हाई कोर्ट आदेश का पालन न होने के कारण हुई।
- चंद्रकांत नागर की याचिका पर कोर्ट ने नगर निगम को आवंटन पत्र जारी करने का निर्देश दिया था।
- कोर्ट टीम और कानूनी अधिकारी नगर निगम मुख्यालय पहुंचे और दस्तावेजी कार्रवाई की।
News In Detail
राजस्थान की राजधानी जयपुर के नगर निगम में शुक्रवार को उस समय अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई, जब कोर्ट के आदेश पर कमिश्नर ओम कसेरा की कुर्सी कुर्क करने के लिए टीम पहुंची। यह मामला 13 साल पुराना है। इसमें राजस्थान हाई कोर्ट के आदेश की पालना नहीं की गई थी। इस पर कोर्ट ने कमिश्नर की कुर्सी कुर्क करने के आदेश दिए।
13 साल पुराना है मामला
यह मामला 2013 का है। परिवादी चंद्रकांत नागर की याचिका पर राजस्थान हाई कोर्ट ने 26 सितंबर 2013 को नगर निगम को आवंटन पत्र जारी करने के निर्देश दिए थे। लेकिन 13 साल बाद भी निगम प्रशासन ने आदेश का पालन नहीं किया।
कोर्ट के आदेश के बाद कार्रवाई
जयपुर महानगर की एससीजेएम-1 प्रथम कोर्ट (ACJM-1 Jaipur Metropolitan Court) ने चंद्रकांत नागर बनाम JDA और अन्य मामलों में एक्शन लेने का निर्देश दिया। कोर्ट के आदेश के बाद सेल अमीन बाबूलाल शर्मा, डिक्रीदार रश्मिकांत नागर और अधिवक्ता संजय शर्मा नगर निगम मुख्यालय पहुंचे।
अदालत ने कुर्सी कुर्क करने के आदेश दिए
लगातार आदेशों की अवहेलना के बाद ACJM-1 जयपुर महानगर प्रथम कोर्ट (ACJM कोर्ट) ने 20 मई को नगर निगम कमिश्नर की कुर्सी कुर्क करने के आदेश दिए। अदालत ने कहा कि लंबे समय तक आदेश न मानना न्यायालय की अवमानना के समान है।
प्रशासन और कानूनी हलकों में हलचल
कोर्ट की कार्रवाई के बाद नगर निगम में अफरा-तफरी जैसी स्थिति बनी रही। निगम अधिकारियों के बीच सवाल उठने लगे कि इतने सालों तक हाई कोर्ट के आदेश का पालन क्यों नहीं हुआ। कानूनी जानकार इसे सरकारी विभागों के लिए सख्त संदेश मान रहे हैं।
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