चंदन के पेड़ चोरी में ऊपर से नीचे तक मिलीभगत, जेडीए करेगा 90 लाख के नुकसान की भरपाई
News In Short
- कैग ने चोरी हुए चंदन के पेड़ों के नुकसान की भरपाई के लिए जेड़ीए को कहा।
- रिपोर्ट में कहा कि 60 साल पुराने चंदन के पेड़ चोरी, 30 सुरक्षाकर्मी भी नहीं देख पाए।
- कैग ने साफ कहा है कि इस मामले में सिस्टम में ऊपर से नीचे तक मिलीभगत।
- 2019-20 में जयपुर के रामनिवास गार्डन से 3 चंदन के पेड़ हुए थे चोरी।
- आंकलन के अनुसार 90 लाख का नुकसान, एक पेड़ की कीमत 30 लाख।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान में जयपुर के ऐतिहासिक रामनिवास बाग से रियासतकालीन चंदन के पेड़ों की चोरी का मामला अब गहरा गया है। नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में इस पूरे प्रकरण को लीपापोती करार देते हुए जेडीए को नुकसान की भरपाई का आदेश दिया है। रिपोर्ट में साफ कहा है कि इस मामले में ऊपर से नीचे तक मिलीभगत थी।
30 गार्डों के बीच काटे गए 60 साल पुराने पेड़
रामनिवास बाग जयपुर में साल 2019-20 में मात्र सात महीने के अंतराल में दो बार चंदन के पेड़ चोरी हुए। जुलाई 2019 में दो पेड़ काटे गए, तो जनवरी 2020 में एक और पेड़ गायब हो गया। हैरत की बात यह है कि उस समय वहां सुपरवाइजर समेत 30 सुरक्षाकर्मी तैनात थे, लेकिन चोर भारी-भरकम 60 साल पुराने चंदन के पेड़ों को आराम से काटकर ले गए और सुरक्षाकर्मियों को पता भी नहीं चला। घटना के बाद दो एफआईआर दर्ज हुईं, लेकिन जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।
जेडीए ने सुरक्षा एजेंसी का ठेका बढ़ाया
जेडीए ने बाग की सुरक्षा का जिम्मा सहारा एक्स-सर्विसमैन वेलफेयर कॉ-ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड को दिया था। अनुबंध की शर्तों के अनुसार चोरी होने पर पूरे नुकसान की भरपाई सुरक्षा एजेंसी को करनी थी। वहीं शर्त नंबर 10 में यह भी प्रावधान था कि काम संतोषजनक न होने पर एजेंसी को तुरंत ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा।
न तो जेडीए ने स्वयं की शर्तों की कोई परवाह की न ही एजेंसी के खिलाफ कोई कार्रवाई की, बल्कि गंभीर शिकायतों के बावजूद उसके ठेके को बार-बार बढ़ाया गया। यानी चोरी कराने वाली एजेंसी को इनाम मिलता रहा। कैग ने इस पर तीखी टिप्पणी करते हुए इसे अनुबंध शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन बताया है।
क्या पाया गया जांच में?
कैग रिपोर्ट के अनुसार कई स्तरों पर एजेंसी और JDA अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई। 14 फरवरी 2020 को जेडीए के अतिरिक्त आयुक्त ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सुरक्षाकर्मियों की मिलीभगत से चोरी हुई है, काम संतोषजनक नहीं है, एजेंसी को तुरंत हटाया जाए।
5 मार्च 2020 को वरिष्ठ उद्यानविज्ञ ने सुरक्षा एजेंसी को नोटिस जारी कर चंदन के पेड़ों की कीमत का आंकलन कर वसूली करने की सिफारिश की। वहीं 1 फरवरी 2021 को वन संरक्षक ने अपनी रिपोर्ट में सुरक्षा एजेंसी और JDA इंस्पेक्टर को सीधे तौर पर दोषी ठहराया।
इसके बाद 27 अक्टूबर 2021 को वरिष्ठ उद्यानविज्ञ ने फिर से रिपोर्ट देते हुए एजेंसी पर गार्डों द्वारा अवैध वसूली, सुपरवाइजर न लगाने और चंदन की अवैध कटाई में लापरवाही के आरोप लगाए।
इतनी रिपोर्ट के बावजूद JDA ने न तो एजेंसी को हटाया और न ही वसूली की प्रक्रिया शुरू की। बल्कि 17 जुलाई 2021 में फिर से पेड़ों की कीमत का आकलन करवाने का प्रस्ताव रख दिया।
90 लाख का नुकसान, एक पेड़ की कीमत 30 लाख
जेडीए के वरिष्ठ उद्यानविज्ञ ने चंदन की कीमत 10,000 रुपये प्रति किलोग्राम आंकी थी। 60 साल पुराने प्रत्येक चंदन के पेड़ की कीमत 30 लाख रुपये लगाई गई। तीन पेड़ों का कुल नुकसान 90 लाख रुपये बैठता है। कैग के अनुसार यह पूरी राशि सुरक्षा एजेंसी से वसूली जानी चाहिए थी, लेकिन जेडीए ने ऐसा नहीं किया।
कैग ने अपनी रिपोर्ट में साफ लिखा है कि रामनिवास बाग से 60 साल पुराने तीन चंदन के पेड़ों की चोरी होना और फिर भी सहारा एक्स-सर्विसमैन वेलफेयर कॉ-ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड का ठेका बढ़ाते रहना स्पष्ट करता है कि सिस्टम में ऊपर से नीचे तक मिलीभगत थी।
ये भी पढे़:-
एक सड़क की गजब कहानी: स्पीकर के क्षेत्र की आधी सड़क ‘स्मार्ट’, विधायक के इलाके में आधी ‘बीमार’
IIT टॉपर से UPSC टॉपर तक, कनिष्क कटारिया की वो लव स्टोरी, जिसने IAS बनने का सपना बुन
मिनी सचिवालय और आयुर्वेद कार्यालय होंगे अर्टच, नियुक्ति नहीं देने पर कोर्ट ने दिखाया सख्त रुख