परिवहन विभाग के थ्री डिजिट फर्जीवाड़े में नए-नए खुलासे, वाहनों के मालिक और चेसिस नंबर बदले
News In Short
- जयपुर के परिवहन विभाग में 'थ्री डिजिट' फर्जीवाड़े के आरोपी बाबू जहांगीर खान को पुलिस ने गिरफ्तार किया।
- आरोपी ने पुराने वाहन नंबरों को फर्जी दस्तावेजों से नए वाहनों को आवंटित किया।
- जांच में 2129 संदिग्ध वाहनों के रिकॉर्ड पाए गए, जिनमें चेसिस नंबर बदलने का मामला सामने आया।
- पंजीकरण निरस्त होने से लाखों रुपए कीमत के विदेशी और लग्जरी वाहन कबाड़ में तब्दील हो जाएंगे।
- कई कर्मचारी और दलाल भूमिगत हो गए, पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी की तैयारी शुरू कर दी है।
News In Detail
जयपुर के परिवहन विभाग के आरटीओ प्रथम में हुए 3 डिजिट नंबरों के बैकलॉग एंट्री घोटाले अब नए- नए खुलासे हो रहे है। आरोपी बाबू जहांगीर अली खान से पूछताछ में सामने आया है कि कर्मचारियों, दलालों और कुछ वाहन मालिकों की मिलीभगत से पुराने और समाप्त हो चुके वाहन नंबरों को दोबारा सक्रिय किया। पुलिस ने शुक्रवार को गिरफ्तार आरोपी बाबू जहांगीर खान को झालाना स्थित आरटीओ (RTO) कार्यालय लेकर पहुंची। वहां उसकी मौजूदगी में विभागीय रिकॉर्ड खंगाले गए और कूट रचना से जुड़े अहम साक्ष्य जुटाए गए।
फर्जीवाड़े का पूरा विवरण
पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि आरोपी बाबू जहांगीर खान ने विभाग के कर्मचारियों और दलालों से मिलकर पुराने वाहन नंबरों को फिर से सक्रिय कर दिया था। ये नंबर 1989 से पहले के थे और अब अस्तित्व में नहीं थे। आरोपी ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए नए वाहनों को इन पुराने नंबरों का आवंटन कर दिया। जांच में 2129 संदिग्ध वाहनों के रिकॉर्ड सामने आए हैं, जिनमें कई के चेसिस नंबर पूरी तरह से बदल दिए गए थे। इस फर्जीवाड़े में विभागीय कर्मचारियों और दलालों की भी संलिप्तता पाई गई है।
बड़ी गिरफ्तारियों की तैयारी
थानाप्रभारी भजनलाल के अनुसार, इस फर्जीवाड़े में विभागीय कर्मचारियों और दलालों सहित करीब 38 लोगों की संलिप्तता का शक है। 9 दिसंबर 2025 को आरटीओ कार्यालय ने इस गड़बड़ी को पकड़ा था और अब पुलिस उन कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रही है जिनके जरिए कबाड़ हो चुके वाहनों के नंबरों का अवैध कारोबार हुआ। पुलिस अब अन्य नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई तेज कर रही है।
कबाड़ में तब्दील होंगे लाखों रुपए के वाहन
इस फर्जीवाड़े में शामिल 2129 संदिग्ध वाहनों के मालिकों को प्रादेशिक परिवहन कार्यालय द्वारा स्पष्टीकरण देने का मौका दिया गया था। हालांकि, महज 10 प्रतिशत वाहन मालिकों ने विभाग में जवाब पेश किया। अन्य वाहन मालिकों का जवाब न मिलने पर विभाग ने उन वाहनों का पंजीकरण निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पंजीकरण निरस्त होने के बाद, इन वाहनों का पुनः पंजीकरण नहीं हो सकेगा, जिससे लाखों रुपए कीमत के विदेशी और लग्जरी वाहन अब सड़कों पर नहीं दौड़ सकेंगे। ऐसे वाहन कबाड़ में तब्दील हो जाएंगे।
कई कर्मचारी और दलाल भूमिगत
सूत्रों के अनुसार, परिवहन विभाग में फर्जीवाड़े का मामला दर्ज होने के बाद, कई आरोपित कर्मचारी और दलाल भूमिगत हो गए हैं। पुलिस ने इन आरोपियों को पकड़ने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है और जल्द ही बड़े स्तर पर गिरफ्तारी की योजना बनाई जा रही है।
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