बॉर्डर पर अपाचे हेलिकॉप्टर का शक्ति प्रदर्शन, धोरों के बीच बनाए हेलीपैड

Ashish Bhardwaj | Aug 21, 2026, 18:11 IST
अपाचे हेलिकॉप्टर
राजस्थान के जैसलमेर-बाड़मेर सेक्टर में भारतीय सेना का सैन्य अभ्यास जारी है। भारतमाला हाईवे पर अपाचे और रुद्र हेलिकॉप्टरों ने लैंडिंग-टेकऑफ किया।

समझें क्या है पूरा मामला

  • भारत-पाक सीमा पर सेना का बड़ा अभ्यास।
  • हाईवे पर उतरे अपाचे और रुद्र हेलिकॉप्टर।
  • भारतमाला हाईवे बना अस्थायी एयरबेस।
  • इमरजेंसी लैंडिंग क्षमता को परखा गया।
  • जैसलमेर-बाड़मेर सेक्टर में बढ़ी तैयारी।

भारत-पाकिस्तान सीमा के पास जैसलमेर और बाड़मेर सेक्टर में भारतीय थल सेना का एक बड़ा सैन्य अभ्यास चल रहा है। इस दौरान जोधपुर आर्मी एविएशन कोर के सबसे शक्तिशाली अपाचे हेलिकॉप्टर भारतमाला हाईवे की पट्टी पर सीधे उतरते और उड़ान भरते नजर आए। आमतौर पर किसी भी सैन्य मिशन के लिए एयरबेस या पक्के हेलीपैड की जरूरत होती है, लेकिन युद्ध या किसी आपातकालीन स्थिति में अगर मुख्य रनवे क्षतिग्रस्त हो जाए, तो सेना को वैकल्पिक रास्तों की जरूरत पड़ती है।



हाईवे को बनाया अस्थायी एयरबेस

इसी रणनीति के तहत जवानों ने नेशनल हाईवे को ही अस्थायी एयरबेस में बदलकर अपनी लैंडिंग और टेकऑफ की क्षमता को सफलतापूर्वक परखा। इस दौरान रेत के टीलों के बीच बनाए गए हेलीपैड से थलसेना के तीन एएच-64ई अपाचे और तीन एडवांस लाइट हेलिकॉप्टर रुद्र ने अपना पराक्रम दिखाया। ये सभी हेलिकॉप्टर जोधपुर आर्मी एविएशन कोर की यूनिट से संबंधित हैं।



जमीनी लड़ाई का सबसे ताकतवर हथियार अपाचे भी शामिल

जमीनी लड़ाई का सबसे ताकतवर हथियार माने जाने वाला अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर, अन्य स्वदेशी हेलिकॉप्टरों के साथ इस सैन्य अभ्यास में जुटा है। जोधपुर आर्मी एविएशन कोर की यूनिट के ये ताकतवर हेलिकॉप्टर इन दिनों जैसलमेर सेक्टर में हाईवे पर लैंडिंग और टेकऑफ का अभ्यास कर रहे हैं।



इससे पहले भी हो चुका है युद्धाभ्यास

इसी महीने के पहले सप्ताह में पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में एयरफोर्स ने रोटर क्लैप-3 युद्धाभ्यास किया था। इसमें हाई इंटेंसिटी हेलिकॉप्टर अभ्यास के दौरान ड्रोन और मानव रहित एयर सिस्टम के खतरे से निपटने पर खास फोकस किया गया था।



क्यों जरूरी है इमरजेंसी लैंडिंग का अभ्यास

सीमावर्ती इलाकों में भारतमाला परियोजना के तहत बनी सड़कें काफी मजबूत और चौड़ी हैं। युद्ध या आपदा के समय इन सड़कों का इस्तेमाल लड़ाकू विमानों और हेलिकॉप्टरों को लैंड कराने के लिए किया जा सकता है। इस अभ्यास का मकसद यही था कि विपरीत परिस्थितियों में भी ईंधन भरने, हथियार लोड करने और घायल जवानों को तुरंत रेस्क्यू करने का काम बिना रुके चलता रहे।



इस युद्धाभ्यास के दौरान सेना ने ड्रोन और मानव रहित हवाई प्रणालियों यानी यूएवी (UAV – Unmanned Aerial Vehicle) के खतरों से निपटने का भी अभ्यास किया। भारतीय सेना का यह कदम यह साफ दर्शाता है कि सरहद पर देश की सुरक्षा हर स्थिति में पूरी तरह मजबूत है।



सीमावर्ती इलाकों के लिए क्यों अहम है यह अभ्यास

जैसलमेर और बाड़मेर जैसे सीमावर्ती जिलों में इस तरह के सैन्य अभ्यास नियमित तौर पर होते रहे हैं। यह अभ्यास न सिर्फ सेना की तैयारियों को परखता है, बल्कि आपातकालीन स्थिति में वैकल्पिक रणनीतियों को भी मजबूत करता है। आने वाले दिनों में भी इस क्षेत्र में इसी तरह के अन्य अभ्यास जारी रहने की संभावना है।



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