979 करोड़ के जेजेएम घोटाले में सात अफसरों पर चलेगा मुकदमा, जानें ACB के पास क्या हैं सबूत
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान के जल जीवन मिशन घोटाले में सात अफसरों पर मुकदमा चलेगा।
- सरकार ने इन अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति दे दी है।
- ACB ने मामले में करीब 17,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है।
- जांच में 979.27 करोड़ रुपये के टेंडर सवालों में आए हैं।
- अब कोर्ट सबूतों के आधार पर आरोपों की सुनवाई करेगा।
राजस्थान के चर्चित जल जीवन मिशन घोटाले में एक बड़ी खबर सामने आई है। सरकार ने राजस्थान जलदाय विभाग के सात अधिकारियों के खिलाफ (अभियोजन) मुकदमा चलाने की स्वीकृति दी है। इसका मतलब है कि इन अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा चलाने का रास्ता साफ हो गया है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार यह स्वीकृति कृष्ण दीप गुप्ता, सुभांशु दीक्षित, दिनेश गोयल, अरुण श्रीवास्तव, महेंद्र प्रकाश सोनी, दिलीप कुमार गौड़ और विशाल सक्सेना के खिलाफ मिली है।
979 करोड़ के टेंडर सवालों में
मामला जल जीवन मिशन के तहत हुए बड़े टेंडरों से जुड़ा है। ACB के मुताबिक करीब 979.27 करोड़ रुपये के टेंडर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हासिल किए गए। जांच में जयपुर की श्री गणपति ट्यूबवैल और श्री श्याम ट्यूबवैल कंपनियों का नाम सामने आया।
जांच एजेंसी का आरोप है कि दोनों कंपनियों ने अनुभव प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल किया। इन प्रमाण पत्रों को IRCON के नाम से तैयार किया गया था। IRCON रेलवे मंत्रालय के तहत काम करने वाली सरकारी कंपनी है।
ACB के अनुसार इन दस्तावेजों में काम पूरा होने से जुड़े प्रमाण भी शामिल थे। जांच में टेंडर प्रक्रिया की शर्तों पर भी सवाल उठे हैं। आरोप है कि कुछ शर्तों से प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई।
फर्जी प्रमाण पत्रों का खेल
जांच के अनुसार कंपनियों ने IRCON के फर्जी लेटरहेड का इस्तेमाल किया। इन्हीं के जरिए अनुभव और काम पूरा करने से जुड़े दस्तावेज तैयार किए गए। ACB का आरोप है कि यह पूरा खेल टेंडर जारी होने से पहले तैयार किया गया था।
मामले में सबसे अहम कड़ी IRCON की ओर से भेजा गया ई-मेल बताया गया है। रिपोर्टों के अनुसार IRCON ने 16 फरवरी 2023 को विभाग को प्रमाण पत्रों की जानकारी दी थी। कंपनी ने दस्तावेजों को फर्जी बताए जाने की बात सामने रखी थी। इसके बाद भी टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ने का आरोप है।
यही बिंदु जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सवाल यह है कि शिकायत मिलने के बाद अधिकारियों ने क्या कदम उठाए। कोर्ट में इन्हीं घटनाक्रमों और दस्तावेजों की जांच होगी।
किन अफसरों पर कार्रवाई हुई
सरकार ने सात अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति दी है। इनमें कृष्ण दीप गुप्ता तत्कालीन मुख्य अभियंता, गुणवत्ता नियंत्रण से जुड़े रहे। सुभांशु दीक्षित राजस्थान वाटर सप्लाई एवं सीवरेज मैनेजमेंट बोर्ड में सचिव रहे थे।
दिनेश गोयल तत्कालीन मुख्य अभियंता, विशिष्ट परियोजना थे। अरुण श्रीवास्तव तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य अभियंता, क्षेत्र प्रथम रहे। महेंद्र प्रकाश सोनी तत्कालीन अधीक्षण अभियंता रहे थे।
दिलीप कुमार गौड़ तत्कालीन मुख्य अभियंता, जल जीवन मिशन रहे। विशाल सक्सेना तत्कालीन अधिशासी अभियंता, शाहपुरा खंड से जुड़े थे। इन पदों और आरोपों से संबंधित अंतिम जिम्मेदारी कोर्ट में तय होगी।
ACB की गिरफ्तारी सूची में इन अधिकारियों की भूमिकाएं और तत्कालीन पद भी दर्ज हैं। इससे जांच के दौरान उनकी प्रशासनिक जिम्मेदारियों का अंदाजा मिलता है।
17,500 पन्नों की चार्जशीट
ACB ने 4 जून 2026 को रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल के खिलाफ बड़ी चार्जशीट दाखिल की थी। यह चार्जशीट करीब 17,500 पन्नों की थी। इसमें 979.27 करोड़ रुपये के टेंडरों से जुड़े आरोपों की जांच का विवरण है।
ACB की जांच में अधिकारियों और निजी लोगों की कथित मिलीभगत की बात सामने आई। जांच एजेंसी ने फर्जी दस्तावेज और काम पूरा होने के प्रमाण पत्रों को अहम सबूत माना है। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत को करना है।
मामले में पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल भी आरोपी हैं। पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी के खिलाफ भी जांच और कानूनी कार्रवाई हुई है। अगस्त 2026 में राजस्थान हाईकोर्ट ने जोशी और अग्रवाल की जमानत याचिकाएं खारिज की थीं। कोर्ट ने आरोपों को गंभीर प्रकृति का बताया था।
अब आगे क्या होगा
अभियोजन स्वीकृति के बाद संबंधित सरकारी अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा आगे बढ़ सकेगा। अब जांच एजेंसी की ओर से जुटाए गए दस्तावेज अहम होंगे। इनमें टेंडर रिकॉर्ड, ई-मेल, प्रमाण पत्र और विभागीय पत्राचार शामिल हैं।
अरुण श्रीवास्तव को जून 2026 में राजस्थान हाईकोर्ट से जमानत मिली थी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि जमानत पर की गई टिप्पणियां ट्रायल को प्रभावित नहीं करेंगी।
इस मामले में नौकरी और मुकदमे की प्रक्रिया अलग-अलग हैं। अभियोजन स्वीकृति मिलने का मतलब तत्काल नौकरी से बर्खास्तगी नहीं है। विभाग सेवा नियमों के अनुसार निलंबन या विभागीय जांच कर सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह रहेगा कि कोर्ट में ACB के आरोप कितने साबित होते हैं। फर्जी दस्तावेजों की भूमिका भी सुनवाई में महत्वपूर्ण होगी। इसके साथ अधिकारियों की कथित भूमिका भी अलग-अलग जांची जाएगी।
ये भी पढ़ें:-
राजस्थान SET 2026 की पात्रता, फीस और परीक्षा पैटर्न, सब कुछ यहां जानें
22 जून से RPSC असिस्टेंट प्रोफेसर के इंटरव्यू शुरू, जानें पूरा शेड्यूल
RPSC में दो नए सदस्य नियुक्त, केसरी सिंह बने कार्यवाहक अध्यक्ष