पंचायत चुनाव में मंत्री खर्रा के बेटे की निर्दलीय एंट्री, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बोले- परिवारवाद नहीं चलेगा
राजस्थान में पंचायत चुनाव के बीच यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा के बेटे दुर्गा सिंह खर्रा के निर्दलीय चुनाव लड़ने से मामला गरमा गया है। इस पर गुरुवार को भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने पार्टी का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि भाजपा में परिवारवाद नहीं चलता और लोकतंत्र में हर व्यक्ति को चुनाव लड़ने का अधिकार है। किसी के इस अधिकार को छीना नहीं जा सकता।
दुर्गा सिंह ने सीकर जिले की श्रीमाधोपुर पंचायत समिति के वार्ड 19 से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल किया है। मंत्री के बेटे के इस फैसले ने पार्टी के भीतर और स्थानीय राजनीति में चर्चा छेड़ दी है। खास बात यह है कि उन्होंने भाजपा से टिकट मांगने के बजाय निर्दलीय चुनाव लड़ने का रास्ता चुना।
हर व्यक्ति को चुनाव लड़ने का अधिकार
भाजपा मुख्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान मदन राठौड़ ने कहा कि यह संबंधित व्यक्ति की अपनी सोच है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर व्यक्ति को चुनाव लड़ने का अधिकार है। उन्होंने इस मामले को सीधे अनुशासनहीनता या बगावत करार नहीं दिया।
भाजपा में नहीं चलता परिवारवाद
राठौड़ ने कहा कि भाजपा से कई लोगों को एलर्जी है और पार्टी में परिवारवाद नहीं चलता। उनके बयान को मंत्री पुत्र के निर्दलीय चुनाव लड़ने के फैसले के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, उन्होंने दुर्गा सिंह के खिलाफ किसी कार्रवाई की घोषणा नहीं की।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब भाजपा पंचायत चुनाव में संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं की एकजुटता के सहारे ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी पकड़ बढ़ाने में जुटी है।
ढाई साल से कार्यकर्ताओं में नाराजगी का दावा
दुर्गा सिंह खर्रा ने निर्दलीय चुनाव लड़ने की वजह स्थानीय भाजपा नेतृत्व के प्रति कार्यकर्ताओं की नाराजगी को बताया था। उनका कहना है कि क्षेत्र में पिछले करीब ढाई साल से पार्टी कार्यकर्ताओं में असंतोष बना हुआ है।
भाजपा से लडे़ंगे तो जितना मुश्किल
दुर्गा सिंह के मुताबिक, कुछ कार्यकर्ताओं और मतदाताओं ने उनसे कहा था कि यदि वे भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे, तो उनका समर्थन करना मुश्किल होगा। वहीं, निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरने पर वे उनके साथ खड़े होने को तैयार हैं।
इसी कथित नाराजगी के आधार पर उन्होंने स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का फैसला किया। हालांकि, क्षेत्र में कार्यकर्ताओं की नाराजगी कितनी व्यापक है, इस बारे में अलग से कोई आंकड़ा या स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
परिवारवाद पर भाजपा का रुख चर्चा में
मंत्री के बेटे के निर्दलीय चुनाव लड़ने और प्रदेशाध्यक्ष की प्रतिक्रिया ने परिवारवाद के मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है। राठौड़ ने एक ओर भाजपा में परिवारवाद नहीं चलने की बात कही, तो दूसरी ओर चुनाव लड़ने के व्यक्ति के अधिकार पर भी जोर दिया।
उन्होंने इस मामले में किसी तरह की सीधी कार्रवाई का संकेत नहीं दिया। ऐसे में अब निगाहें चुनावी नतीजों और पार्टी के आगे के रुख पर रहेंगी। यह भी देखना होगा कि दुर्गा सिंह की उम्मीदवारी का स्थानीय भाजपा संगठन और कार्यकर्ताओं पर क्या असर पड़ता है।
गहलोत के ‘चौथी बार सरकार’ वाले नारे पर भी तंज
मदन राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कथित तौर पर चौथी बार कांग्रेस सरकार बनाने के नारे पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को यह नारा पसंद नहीं है और दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक मतभेद हैं।
राठौड़ ने पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय के कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आने और बाद में कांग्रेस में लौटने के घटनाक्रम का भी जिक्र किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह घटनाक्रम गहलोत को आज भी चुभता है।
राठौड़ के मुताबिक, यदि चौथी बार सरकार बनाने के नारे लगाए जाएंगे, तो डोटासरा नाराज होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि गहलोत खुद ही ऐसे नारे लगवा रहे हैं।
फिलहाल, श्रीमाधोपुर में मंत्री पुत्र की निर्दलीय उम्मीदवारी और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के बयान ने पंचायत चुनाव की राजनीति को नया मोड़ दे दिया है। अब देखना होगा कि इस फैसले का चुनावी समीकरणों पर कितना असर पड़ता है।