वसुंधरा राजे के गढ़ में हारी भाजपा, नगरपरिषद में मिला कांग्रेस को बहुमत
समझें क्या है पूरा मामला
- झालावाड़ में कांग्रेस का दबदबा।
- 29 वार्ड जीतकर कांग्रेस को बहुमत।
- भाजपा 13 सीटों पर सिमटी।
- AAP और निर्दलीयों ने भी खोला खाता।
- OBC आरक्षित सभापति पद पर नजर।
राजस्थान के झालावाड़ नगर परिषद चुनाव में बड़ा उलटफेर हुआ। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया झालावाड़ से विधायक रही हैं और उनके बेटे दुष्यंत सिंह यहां से सांसद है। झालावाड़ भाजपा का गढ़ माना जाता है। यहां कांग्रेस ने निकाय चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए बहुमत हासिल किया है। 45 वार्ड वाली झालावाड़ नगर परिषद में कांग्रेस ने 29 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि भाजपा को 13 वार्ड में सफलता मिली।
आम आदमी पार्टी के एक प्रत्याशी ने भी जीत दर्ज की है। वहीं, दो निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी जीत हासिल की है। चुनाव प्रक्रिया के दौरान कांग्रेस और भाजपा के एक-एक प्रत्याशी पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुके थे। इसके बाद 43 वार्ड के लिए मतगणना हुई।
झालावाड़ नगर परिषद चुनाव में कांग्रेस जीती
झालावाड़ नगर परिषद को लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। ऐसे में कांग्रेस की यह जीत राजनीतिक रूप से काफी अहम मानी जा रही है। नतीजों ने भाजपा के स्थानीय समीकरणों को भी प्रभावित किया है।
राजकीय पॉलिटेक्निक महाविद्यालय में सोमवार सुबह 8 बजे मतगणना शुरू हुई। ईवीएम खुलते ही कांग्रेस प्रत्याशियों की बढ़त सामने आने लगी। जैसे-जैसे परिणाम आते गए, कांग्रेस की स्थिति मजबूत होती गई।
सबसे बड़ा झटका भाजपा को वार्ड नंबर 39 में लगा। इस वार्ड से पिछले बोर्ड में भाजपा के सभापति संजय शुक्ला चुनाव जीते थे। इस बार भाजपा अपने ही सभापति के पुराने वार्ड को बचाने में सफल नहीं हो सकी।
वार्ड 39 में कांग्रेस प्रत्याशी इस्लाम खान ने भाजपा उम्मीदवार बृजेश को हराया। इस्लाम खान को 481 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी को 185 वोट मिले। निर्दलीय प्रत्याशी निकिता को 140 वोट मिले। कांग्रेस प्रत्याशी ने 296 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की।
कांग्रेस खेमे में जश्न
झालावाड़ नगर परिषद चुनाव के नतीजे आने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है। पार्टी ने भाजपा के प्रभाव वाले क्षेत्रों में भी जीत हासिल की है। अब सभी की नजर सभापति पद को लेकर होने वाले फैसले पर है। झालावाड़ नगर परिषद का सभापति पद ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित है। ऐसे में कांग्रेस बहुमत के बाद किस उम्मीदवार को मैदान में उतारती है, यह देखने वाली बात होगी।
दूसरी ओर भाजपा के लिए यह परिणाम आत्ममंथन का विषय बन गया है। पार्टी को अपने मजबूत माने जाने वाले क्षेत्र में मिली हार के कारणों पर मंथन करना होगा।
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