पूर्व मंत्री महेश जोशी को झटका, हाई कोर्ट ने जमानत देने से किया इनकार
समझें क्या है पूरा मामला
- जल जीवन मिशन घोटाला की सुनवाई में हाई कोर्ट का बड़ा फैसला।
- पूर्व मंत्री महेश जोशी समेत सभी आरोपियों की जमानत याचिका खारिज।
- JJM घोटाले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कहा- मामला गंभीर।
- कोर्ट ने कहा- ऊंची दरों पर टेंडर जारी करने का आरोप संवेदनशील।
- सरकारी पक्ष ने कहा- मंत्री रहते हुए जोशी ने मुख्य भूमिका निभाई।
राजस्थान हाई कोर्ट ने जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी, रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल और आधा दर्जन अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं।
जस्टिस चंद्रप्रकाश श्रीमाली ने सभी याचिकाओं पर 5 अगस्त को बहस सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था और गुरुवार को यह आदेश दिया। अब सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में रहेंगे।
क्या है राजस्थान जल जीवन मिशन घोटाला?
जल जीवन मिशन एक केंद्रीय योजना है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक पाइप से पानी पहुंचाना है। राजस्थान में इस योजना के कार्यान्वयन में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगा है।
आरोप है कि कुछ अधिकारियों और तत्कालीन मंत्री ने मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ऊंची दरों पर टेंडर जारी किए। इससे सरकारी खजाने को बड़ा नुकसान हुआ।
जमानत याचिका खारिज क्यों?
अदालत ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया। सरकारी वकील (अतिरिक्त महाधिवक्ता) ने कोर्ट में कहा कि आरोपी अपने पदों का दुरुपयोग करके घोटाले में शामिल थे।
पूर्व मंत्री होने के नाते महेश जोशी विभाग के प्रमुख थे और उन्होंने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर फर्जीवाड़ा किया। इसलिए उन्हें जमानत नहीं दी जानी चाहिए।
वकीलों ने क्या तर्क दिए?
आरोपियों की ओर से पेश वकीलों ने कहा कि महेश जोशी टेंडर की समीक्षा समिति का सदस्य नहीं थे और सारा काम प्रशासनिक अधिकारियों ने किया। उन्होंने यह भी कहा कि एफआईआर दर्ज होने के डेढ़ साल बाद जोशी को गिरफ्तार किया गया।
एक अन्य आरोपी (एसई महेंद्र प्रकाश सोनी) की ओर से कहा गया कि इसी मामले में एक ठेका फर्म के संचालकों को पहले राहत मिल चुकी है और एसीबी ने आरोप पत्र भी पेश कर दिया है। हालांकि, कोर्ट ने इन तर्कों को खारिज कर दिया।
अब क्या होगा?
हाई कोर्ट के फैसले के बाद सभी 8 आरोपी फिलहाल जेल में ही रहेंगे। अब मामले की सुनवाई निचली अदालत में होगी, जहां आरोप पत्र के आधार पर मुकदमा चलेगा। एसीबी और अन्य जांच एजेंसियां मामले में सबूत जुटा रही हैं।
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