कोटा-बीकानेर के बाद जोधपुर में सिजेरियन के बाद 8 प्रसूताएं बीमार, 2 आईसीयू में

Jageshwar prasad | Jun 22, 2026, 11:05 IST
जोधपुर में सिजेरियन डिलीवरी के बाद संकट
राजस्थान के जोधपुर के पावटा जिला अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद 8 प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ गई। इनमें से 2 गंभीर महिलाओं को आईसीयू में भर्ती कराया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल का ऑपरेशन थिएटर बंद कर दवाओं पर रोक लगा दी गई है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • सिजेरियन डिलीवरी के बाद 8 महिलाओं की तबीयत बिगड़ी।
  • जोधपुर के पावटा जिला अस्पताल का है पूरा मामला।
  • गंभीर हालत में 2 प्रसूताएं अलग-अलग आईसीयू में भर्ती।
  • अस्पताल का ऑपरेशन थिएटर बंद, दवाओं पर लगी रोक।
  • कोटा-बीकानेर के बाद अब जोधपुर में मचा हड़कंप।

राजस्थान के कोटा और बीकानेर के बाद अब जोधपुर से भी प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने का गंभीर मामला सामने आया है। यहां के पावटा स्थित जिला अस्पताल में सिजेरियन (ऑपरेशन) डिलीवरी के बाद 8 महिलाओं की अचानक तबीयत खराब हो गई।



इन सभी महिलाओं को अत्यधिक ब्लीडिंग और ब्लड प्रेशर (BP) लो होने की शिकायत हुई थी। इनमें से 2 महिलाओं की हालत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें हायर सेंटर रेफर किया गया है।



प्रसूताओं की हालत बिगड़ने की खबर मिलते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। एहतियात के तौर पर पावटा जिला अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर (OT) को अगले आदेश तक पूरी तरह बंद कर दिया गया है।



इसके साथ ही ऑपरेशन के दौरान इस्तेमाल की गई सभी दवाओं और इंजेक्शनों के इस्तेमाल पर भी तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी गई है।



दो प्रसूताएं अलग-अलग आईसीयू में भर्ती

अस्पताल प्रशासन के मुताबिक 20 जून को अस्पताल में कुल 8 सिजेरियन ऑपरेशन किए गए थे। ऑपरेशन के बाद 2 महिलाओं की किडनी में इंफेक्शन फैलने की शिकायत सामने आई। इसके बाद मेडिकल टीम ने बिना कोई रिस्क लिए उन्हें तुरंत मथुरा दास माथुर (MDM) अस्पताल रेफर कर दिया।



इनमें से एक महिला सोनू को एमडीएम अस्पताल के आईसीयू (ICU) में रखा गया है। वहीं दूसरी महिला ललिता की हालत ज्यादा गंभीर होने के कारण उसे जोधपुर एम्स (AIIMS) रेफर किया गया।



ललिता डायबिटिक है और उसका ब्लड प्रेशर लगातार कम हो रहा है, जिसका एम्स के आईसीयू में इलाज जारी है।



बाकी 6 महिलाओं की स्थिति में सुधार

पावटा अस्पताल के पीएमओ (PMO) डॉ. कुलबीर चोपड़ा ने बताया कि बाकी बची 6 प्रसूताओं को इसी अस्पताल में भर्ती रखा गया है।



इन महिलाओं के नाम तस्लीम बानो, संतोष, गट्टू कंवर, नंदू कंवर, पायल और प्रियंका हैं। इन सभी की सेहत में अब काफी सुधार देखा जा रहा है।



अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार इन 6 प्रसूताओं के सभी वाइटल पैरामीटर्स अब पूरी तरह से संतोषजनक और सामान्य पाए गए हैं। प्रसूताओं के यूरिन और अन्य जरूरी टेस्ट भी करवाए गए हैं, जिनकी रिपोर्ट ठीक आई है।



दवाओं और ओटी के लिए गए सैंपल

मामले की उच्च स्तरीय जांच के लिए सरकार ने तुरंत एक विशेष कमेटी का गठन कर दिया है। इस जांच कमेटी में विशेषज्ञ डॉक्टरों और ड्रग इंस्पेक्टर को शामिल किया गया है।



जिला कलेक्टर आलोक रंजन ने बताया कि प्रथम दृष्टया स्टाफ के स्तर पर किसी तरह की लापरवाही सामने नहीं आई है।



कलेक्टर के निर्देश पर प्रसूताओं के ब्लड-यूरिन सैंपल के साथ ही ओटी में इस्तेमाल हुए उपकरणों, आईवी फ्लूइड्स और दवाओं के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं।



इन नमूनों को एसएन मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग और औषधि नियंत्रक अधिकारी के पास भेजा गया है। जांच रिपोर्ट आने तक ऑपरेशन थिएटर बंद रहेगा।



कोटा और बीकानेर में हो चुकी हैं मौतें

राजस्थान में सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओं की तबीयत बिगड़ने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज और जेके लोन अस्पताल में सिजेरियन के बाद 5 प्रसूताओं की किडनी फेल होने से मौत हो चुकी है।



इसके बाद बीकानेर के पीबीएम (PBM) अस्पताल में भी सिजेरियन के बाद 6 महिलाओं की किडनी फेल होने का मामला सामने आया था। बीकानेर में भी इलाज के दौरान 2 प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। यही वजह है कि जोधपुर के मामले को लेकर प्रशासन बेहद सतर्कता बरत रहा है।



चिकित्सा मंत्री ने दी सफाई

इस पूरे मामले पर राजस्थान के चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर का बयान भी सामने आया है। उन्होंने जोधपुर के मामले पर कहा कि पावटा अस्पताल की 6 महिलाएं बिल्कुल स्वस्थ हैं।



गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज और एम्स की बेहतरीन सुविधाओं का लाभ देने के लिए शिफ्ट किया गया है, इसमें चिंता की कोई बात नहीं है।



मंत्री खींवसर ने बीकानेर और कोटा के मामलों की तुलना को गलत बताया। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में ज्यादातर बेहद क्रिटिकल, इमरजेंसी और बिगड़े हुए केस ही रेफर होकर आते हैं। बीकानेर में जिस महिला की मौत हुई, वह पहले से वेंटिलेटर पर थी और इलाज के एक महीने बाद उसकी मौत हुई थी।



FAQ

  1. जोधपुर में सिजेरियन के बाद क्या हुआ?
    20 जून को पावटा डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में 8 सिजेरियन डिलीवरी हुईं। बाद में सभी महिलाओं की तबीयत बिगड़ गई। दो को किडनी संक्रमण के कारण आईसीयू में रेफर किया गया और बाकी 6 को सेप्टीसीमिया हुआ।
  2. सेप्टीसीमिया क्या होता है और यह खतरनाक क्यों है?
    सेप्टीसीमिया में बैक्टीरिया खून में फैल जाते हैं। यह बहुत तेज़ी से शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है। समय पर इलाज न मिले तो यह जानलेवा हो सकता है।
  3. राजस्थान में कोटा और बीकानेर में सिजेरियन के बाद क्या हुआ था?
    कोटा के दो सरकारी अस्पतालों में सिजेरियन के बाद 5 प्रसूताओं की किडनी फेल होकर मौत हो गई थी। बीकानेर के पीबीएम हॉस्पिटल में 6 महिलाओं की किडनी फेल हुई जिनमें से 2 की मौत हो चुकी है।

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