जोधपुर फैक्ट्री ब्लास्ट: ग्रीन कॉरिडोर से जयपुर भेजे गए झुलसे दमकलकर्मी, मालिक का बेटा हिरासत में
समझें क्या है पूरा मामला
- जोधपुर में केमिकल फैक्ट्री में भीषण ब्लास्ट।
- 13 दमकलकर्मी झुलसे, 6 जयपुर रेफर।
- ग्रीन कॉरिडोर से भेजे गए घायल मरीज।
- तीन की हालत बेहद चिंताजनक, वेंटिलेटर पर।
- प्रशासनिक फैसले पर उठे गंभीर सवाल।
राजस्थान के जोधपुर शहर में आग बुझाने के दौरान दर्दनाक हादसा हुआ। अग्निशामक कर्मियों के त्वरित और उच्च स्तरीय इलाज के लिए प्रशासन हरकत में आया है। झुलसे जवानों को बेहतर चिकित्सा सेवा देने के लिए जोधपुर से जयपुर के बीच विशेष ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया।
इसके जरिए छह गंभीर दमकलकर्मियों को जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल भेजा गया। यह फैसला जिला प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन की पीड़ित परिवारों के साथ हुई लंबी वार्ता के बाद लिया गया।
छह मरीज जयपुर स्थानांतरित
हादसे में कुल 13 दमकलकर्मी झुलसे थे। इनमें से गंभीर रूप से प्रभावित छह को जयपुर भेजने का निर्णय लिया गया। जयपुर भेजे गए मरीजों में मोहम्मद हनीफ, प्रकाश, अविनाश जोगराम, आसिफ खान और प्रेम तंबोली शामिल हैं।
इनमें से तीन मरीजों की स्थिति अत्यंत नाजुक बताई जा रही है। ये तीनों दमकलकर्मी वर्तमान में वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं। ये जीवन से संघर्ष कर रहे हैं। हादसे के बाद अस्पताल परिसर में घायलों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
ग्रीन कॉरिडोर की व्यवस्था
मरीजों की सुरक्षित और बिना किसी बाधा के रवानगी सुनिश्चित करने के लिए बड़ी व्यवस्था की गई। जोधपुर शहर विधायक अतुल भंसाली स्वयं मौके पर उपस्थित रहे। उन्होंने पूरे मार्ग की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
उन्होंने एम्बुलेंस के काफिले को निर्बाध गति से रवाना करवाया। जोधपुर पुलिस और यातायात विभाग ने समन्वय बनाकर त्वरित ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया। इसका मुख्य उद्देश्य एम्बुलेंस को बिना जाम के जयपुर पहुंचाना था।
प्रशासन की मंशा पर सवाल
एक तरफ प्रशासन इसे त्वरित राहत और बेहतर इलाज का कदम बता रहा है। वहीं दूसरी तरफ इस फैसले को लेकर तीखा विरोध भी शुरू हो गया है। सुरेश जोड़ ने प्रशासन की कार्यशैली और नीयत पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
सुरेश जोड़ ने आरोप लगाया कि जोधपुर के महात्मा गांधी अस्पताल में ही इलाज की पुख्ता व्यवस्थाएं करने की बजाय मरीजों को जयपुर शिफ्ट करना जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ने जैसा है।
विधायक और आयुक्त से जवाब तलब
उन्होंने आशंका जताई कि प्रशासन को केवल इस बात का डर सता रहा है कि स्थानीय अस्पताल में किसी गंभीर मरीज के साथ कुछ अनहोनी हो जाती है। तब परिजनों और स्थानीय लोगों द्वारा उग्र प्रदर्शन किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि मरीजों को जयपुर भेज देने से इस संभावित विरोध को टाला जा सकता है। इसी डर के कारण गंभीर मरीजों को जल्दबाजी में रेफर किया गया। सुरेश जोड़ ने विधायक अतुल भंसाली और नगर निगम आयुक्त राहुल जैन से सीधे वार्ता की। उन्होंने प्रशासन की जल्दबाजी पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए जवाब मांगा है।
अस्पताल में कितने मरीज भर्ती
अस्पताल अधीक्षक के अनुसार हादसे के बाद कुल 14 दमकलकर्मी उपचार के लिए पहुंचे थे। इनमें से एक को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। बाकी 13 घायलों का एमजीएच में इलाज शुरू किया गया।
इनमें से छह को गंभीर हालत में जयपुर भेजा गया है। जोधपुर के एमजीएच में भर्ती सात अन्य मरीजों में भी तीन वेंटिलेटर पर हैं। उनकी स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। बाकी चार घायलों में से दो करीब 50 प्रतिशत तक झुलसे हैं। अधिकांश घायलों की उम्र 22 से 30 वर्ष के बीच है।
संक्रमण का खतरा
डॉ. फतेह सिंह भाटी ने बताया कि गंभीर रूप से झुलसे मरीजों में संक्रमण का खतरा काफी अधिक रहता है। इसी वजह से अस्पताल प्रशासन ने घायलों से मिलने वालों की संख्या सीमित रखने की सलाह दी है।
गुरुवार को अस्पताल में परिजनों के अलावा कुछ जनप्रतिनिधि भी वार्ड तक पहुंचे। अस्पताल प्रशासन ने संक्रमण से बचाव को लेकर सावधानी बरतने की अपील की है।
आग बुझने के बाद हुआ ब्लास्ट
बासनी स्थित केमिकल फैक्ट्री में बुधवार देर शाम आग लगी थी। दमकलकर्मी आग पर काबू पाने में जुटे थे। बताया जा रहा है कि जब आग लगभग बुझ चुकी थी, उसी दौरान केमिकल से भरे एक ड्रम में अचानक जोरदार विस्फोट हो गया।
ब्लास्ट के बाद आग फिर भड़क उठी। मौके पर मौजूद दमकलकर्मी इसकी चपेट में आ गए। घायलों को पहले एम्स और इसके बाद महात्मा गांधी अस्पताल लाया गया। गंभीर रूप से झुलसे कर्मचारियों का बर्न यूनिट में उपचार किया गया।
फैक्ट्री संचालक का बेटा हिरासत में
हादसे के मामले में बासनी थाना पुलिस ने फैक्ट्री संचालक के बेटे स्पर्श अग्रवाल को हिरासत में लिया है। थानाधिकारी नितिन दवे के अनुसार नगर निगम के मुख्य अग्निशमन अधिकारी जलज घसिया की रिपोर्ट पर एफआईआर दर्ज की गई है।
पुलिस के अनुसार रिपोर्ट में फैक्ट्री में बिना लाइसेंस के केमिकल भंडारण का आरोप है। अवैध तरीके से फैक्ट्री संचालित करने का भी आरोप है। फैक्ट्री में फायर एनओसी नहीं होने और अग्निशमन उपकरण नहीं होने की बात भी सामने आई है।
पुलिस ने विस्फोटक नियम, 2008 और पेट्रोलियम एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। फैक्ट्री संचालक राजेंद्र अग्रवाल मौके पर नहीं मिले। इसके बाद पुलिस ने उनके बेटे को हिरासत में लिया है।
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